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Thursday, May 26, 2022

विजया भारती की काव्य संग्रह “रंग पिया का सोहना” में नारी...

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नई दिल्ली, तेवरऑनलाइन। “रंग पिया का सोहना नारी-चेतना से आपूरित है। विजया भारती ने इस पुस्तक में नारी-संघर्ष की तो बात की ही है,...

लुप्त (हिन्दी काव्य)

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शिव कुमार झा 'टिल्लू' दड़क गए शिखर मेरु के हिलकोरें सागर की लुप्त हुईं रवि आभा जब मलिन दिखा- नीरज पंखुड़ियाँ लुप्त हुईं वात्सल्य स्नेह में भी छल है संतति...

नब्बे के हुये नामवर

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जब आइना झूठ बोलेगी तो नामवर पैदा होगा आलोक नंदन नई दिल्ली  । नब्बे बहार देखने के बाद हिन्दी साहित्य के  सुविख्यात समालोचक नामवर सिंह ने अपने...

बेटी (कविता)

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ऐ श्रृष्टि रचाने वाले, दुनिया को बसाने वाले। बस इतना तू बता दे मुझको, ऐ इंसान बनानेवाले। मैं ही जननी हूँ फ़िर भी, मुझसे ही नफरत...

ब्रह्म नहीं कुछ (कविता)

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आदि शक्ति हो या अन्धेश्वर मन की तार तरंग तुम्हारी भक्ति भाव से पूज ले बन्दे ब्रम्ह नहीं कुछ हम ब्रम्हेश्वर काला पीला हरा बैंगनी नहीं किसी का रंग...

‘सार्थक’ पहल के साथ जेएलएफ में राजकमल प्रकाशन

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गुलाबी शहर में साल की शुरूआत में ही आयोजित होने वाला सबसे बड़ा साहित्य महोत्सव- जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल में राजकमल प्रकाशन अपने नए और...

सच का सच (कविता)

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-डॉ. व्यथितानंद घूम रहा था भीड़ में अकेला थी माथे पर एक पोटली जिसमें भरा पड़ा था- झमेला ही झमेला। देखा बायें-दायें घूमा, ऊपर-नीचे गया मंदिर-मस्जिद चर्च-गुरुद्वारा ढूंढा भारवाहक मिले गुरु दर गुरु नहीं मिला कोई चेला।

नायक

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नायक (कविता ) (समस्या...बड़ी है..) ईक्षा नायक बनने की प्रबल ईक्षा...! पर डर. लाखों लाशों का बोझ. शायद टूट जाए कमर.. फिर वही लहू, आंसू और मलाल, एक गली साफ़,...

भारतीय कोशकारिता में तीन परिवर्तनकारी क़दम !

अरविंद कुमार ने अभी अभी भारतीय कोशकारिता में तीन परिवर्तनकारी क़दम उठाए हैँ. शुरू से ही कुछ नया करते रहने की उन की आदत पुरानी...

मुझे है यक़ीं , तेरे प्यार पे (कविता)

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उत्तम पाल. मुझे है यक़ीं , तेरे प्यार पे , ये दिल है अब तो , खुमार पे। तुझे भूलना मुमक़िन नहीं , मेरा इश्क़ है , इंतज़ार...