बिहार के साथ पूरे देश का नाम रोशन करना चाहता हूं: ओमकार कुमार

राजू वोहरा, नई दिल्ली

शुरू से लेकर अब तक बालीवुड फिल्म इण्डस्ट्री में बतौर कलाकार बिहार की माटी में जन्मे, पले, बढ़े कई अभिनेता-अभिनेत्रियों ने न सिर्फ अपने अभिनय से अपनी अलग पहचान स्थापित की बल्कि साथ-साथ देश का नाम भी रोशन किया। जिसके जीते-जागते उदाहरण शत्रुघन सिन्हा, शेखर सुमन, मनोज वाजपेयी, नीतू चन्द्रा, विनीत कुमार जैसे अनेक कलाकार हैं, जो अभियन की दुनिया में अपनी खास पहचान रखते हैं। ऐसे सफल कलाकरों से प्रेरित होकर वर्तमान में भी बिहार के कई कलाकार, फिल्म, टीवी व माडलिंग के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के लिए प्रयासरत हैं। ऐसे ही उभरते युवा कलाकारों में एक नाम माडल-एक्टर ओमकार कुमार का भी शामिल है जो मूलरूप से नालंदा बिहार के रहने वाले हैं। बिहार की माटी में जन्मे-पले-बढ़े ओमकार कुमार ने ‘‘एशियन एकेडमी फिल्म एण्ड टेलीविज़न’’ (ए.ए.एफ.टी.) इंस्टीट्यूट नोएडा से बकायदा एक्टिंग की प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली है और अब तक कई प्रिंट ऐड के अलावा दो डैक्यूमेंट्री फिल्में, दो धारावाहिक और कई म्यूजिक वीडियोज़ भी कर चुके है।

 ओमकार महुआ न्यूज के क्राइम शो ‘‘तहकीकात’’ के दस एपिसोड में भी लगातार काम कर चुके है। वह आने वाले दिनों में ‘‘मी होम टीवी’’ के कामेडी धारावाहिक के ‘‘वाह दामाद जी’’ और आर.बी. कम्यूनिकेशन के एक नये धारावाहिक में भी अहम किरदारों में नज़र आयेंगे। इसके अलावा वह ‘‘चैनल वी’ के एक रिएलिटी शो में भी थर्ड राऊण्ड तक सार्ट-लिस्ट हो चुके हैं। छः फुट लम्बे अच्छी कद काठी वाले ओमकार बताते हैं कि मुझे माडलिंग और ऐक्टिग का शौक बचपन से रहा है, मेरे पिता जी श्री नवीन कुमार सिंह भी गांव में शौकिया नाटकों से जुड़े रहे हैं। उन्हीं के सहयोग से आज में प्रोफेशनल तौर पर इस क्षेत्र में इस क्षेत्र में यहां तक पहुंचा हूं। ओमकार आगे बताते हैं कि मैं एक्टिंग और माडलिंग की दुनिया में कामयाब होकर न सिर्फ बिहार का बल्कि पूरे देश का नाम रोशन करना चाहता हूं।

 ओमकार कुमार हिन्दी फिल्म, हो या भोजपुरी फिल्म हो या फिर धारावाहिक सभी जगह काम करना चाहते हैं। वह वैसे तो हर तरह की भूमिकायें करना चाहते हैं लेकिन उनकी पसंदीदा भूमिका निगेटिव है। ओमकार का मानना है कि निगेटिव किरदार नये कलाकरों को ज्यादा जल्दी पहचान देते हैं। ओमकार के जहां हिन्दी फिल्मों के पसंदीदा कलाकार आमिर खान, अमिताभ बच्चन, शत्रुघन सिन्हा, मनोज वाजपेयी हैं, वहीं भोजपुरी फिल्मों के रवि किशन और मनोज तिवारी हैं।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
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