सिर्फ सामाजिक धारवाहिक और फिल्में बनाना चाहता हूं : दीपक शर्मा

दीपक शर्मा टीवी कलाकार गजेंद्र चौहान के साथ

राजू बोहरा, नई दिल्ली

नयी दिल्ली, पिछले ही दिनों दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल डी डी नेशनल पर कन्या भ्रूण हत्या पर आधारित नया डेलीसोप ”कुल की ज्योति कन्या”का का प्रसारण शुरू हुआ है.हर सप्ताह सोमवार से शुक्रवार दोपहर 12 बजे दिखाए जा रहे मशहूर टीवी डायरेक्टर अलोक नाथ दीक्षित के निर्देशन में बन रहे इस मनोरंजक और सामाजिक डेलीसोप का निर्माण”डी एस प्रोडेक्शन प्राइवेट लिमिटेड”के बैनर तले युवा निर्माता दीपक शर्मा कर रहे है.धारावाहिकों के अलावा दीपक शर्मा फिल्मों के निर्माण में भी सक्रिय हैं.उनकी बतौर निर्माता पहली हिन्दी फिल्म ”दिल तो दीवाना है” जल्द ही प्रदर्शित होने जा रही है.मनोरंजक के साथ-साथ उदेश्यपूर्ण व सामाजिक  फिल्में और धारावाहिक बनाने में रूचि रखने वाले निर्माता दीपक शर्मा से तेवरआनलाइन के लिए हाल ही में एक ख़ास मुलाकात में खास बातचीत की वरिष्ठ फिल्म-टीवी पत्रकार राजू बोहरा ने. प्रस्तुत है  बातचीत के प्रमुख अंश.

प्र. आपका नया डेलीसोप कुल की ज्योति कन्याहाल ही दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल डी डी नेशनल पर शुरू हुआ है जिसकी इन दिनों काफी चर्चा है.उसके बारे में कुछ बताइए ?

उ.   मेरा यह नया धारावाहिक ”कुल की ज्योति कन्या” हर सप्ताह सोमवार से शुक्रवार दोपहर की सभा में 12 बजे दिखाए जा रहा है जो कन्या भ्रूण हत्या   जैसे गंभीर विषय पर आधारित है.इस धारावाहिक का निर्देशन मशहूर धारावाहिक निर्देशक अलोक नाथ दीक्षित कर रहे है जो दूरदर्शन के लिए दर्जनों सफल लोकप्रिय धारावाहिकों का निर्देशन कर चुके है. इसके लेखक पारस जायसवाल है जो दूरदर्शन के ढेर सारे हिट धारावाहिक लिख चुके है.धारावाहिक में गजेन्द्र चौहान, उपासन सिंह, अमित पचौरी, आशा सिंह,साहिबा,विजय भटिया,मल्लिका मल्होत्रा,मनीष जैन,चारू वाधवा,रमेश गोयल,सुमन गुप्ता,अंजू राजीव और राजेश तिवारी,जैसे जानेमाने कलाकार अभिनय कर रहे है।

प्र. क्या आपका यह धारावाहिक अभिनेता आमिर खान के शो सत्यमेव जयते से प्रेरित है ?

उ.  हमरा यह धारावाहिक आमिर खान द्वारा कन्या भ्रूण हत्या पर केन्द्रित उस मुहीम को आगे बढ़ाता है लेकिन सच यह है कि हमारा यह धारावाहिक अभिनेता आमिर खान के शो ”सत्यमेव जयते ”से प्रेरित नहीं है क्योकि हमने इसका पायलट एपिसोड दो साल पहले बनाया था तब से इस धारावाहिक पर कम चल रहा है. हमें ख़ुशी है की हमारा यह डेलीसोप मनोरंजन के माध्यम से आमिर खान द्वारा कन्या भ्रूण हत्या पर केन्द्रित उस मुहीम को आगे बढ़ा रहा है.

प्र. आपके इस दैनिक धारावाहिक क़ी कहानी क्या है ?

उ.  इस धारावाहिक क़ी कहानी एक आमिर परिवार के आदमी क़ी है जो बेटे क़ी चाह में अपनी गर्भवती पत्नी व छोटी बेटी को घर से निकाल देता है और दूसरी शादी कर लेता है जिससे उसे एक बेटा पैदा होता है लेकिन बाद में बेटे के बजाय उसकी बेटिया ही उसका सहारा बनती है तब उसे अहसास होता है क़ि वो कितना गलत सोचता था जबकि कुल की असली ज्योति तो कन्या ही होती है. यह शो उन लोगो के मुह पर तमाचा मरता है जो बेटे क़ि चाह में बेटियों को गर्भ में ही मार देते है.

प्र. बतौर निर्माता आपकी पहली हिन्दी फिल्म दिल तो दीवान हैही जल्द ही प्रदर्शित होने वाली है उसके बारे में बताइए ?

उ. मेरी यह फिल्म ”दिल तो दीवान है” के प्रदर्शिन में अभी थोडा समय है इसलिए आपको ज्यादा नहीं बता पाऊंगा.फिल्म ”दिल तो दीवान है” एक म्यूजिकल लव स्टोरी पर आधारित एक दिलचस्प फिल्म है जिसको मलेशिया क़ि खूबसूरत वादियों में शूट किया गया है.इस फिल्म की लीड कास्ट में हैदर खान और सदा की फ्रेश जोड़ी है.फिल्म में अपने ज़माने के दो बड़े सितारे राज बब्बर और जीनत अमान करीब तीस साल के लम्बे अंतराल के बाद इसमें शानदार भूमिकाओं में नजर आयेगे.”दिल तो दीवान है’में जीनत अमान जहा नायक हैदर खान की माँ की भूमिका में दिखेगी वही राज बब्बर नायिका सदा के पिता की गंभीर रोल में नजर आयेगे .इसकी स्पोटिंग कास्ट में हेमंत पांडे,गौरव घई,सुष्मिता मुखर्जी,अलोक नाथ,अरुण बक्षी,शबनम कपूर और गौरी शर्मा जैसे सितारे है,फिल्म के निर्देशन मशहूर फिल्म अभिनेता व निर्देशक राजा बुंदेला ने किया है।

प्र. आप किस तरह के धारावाहिक और फिल्में बनाना चाहते है ?
उ. मैं मनोरंजक के साथ-साथ उपदेश्य पूर्ण व सामाजिक फिल्में और धारावाहिक बनाना चाहता हूँ,इस बात का पुख्ता प्रमाण है मेरा पहला धारावाहिक ”कुल की ज्योति कन्या” और पहली फिल्म”दिल तो दीवान है” जो  लोगो का भरपूर मनोरंजन करने के साथ-साथ सामिजिक मैसिज भी देते है,”डी एस प्रोडेक्शन” हर तरह की अच्छी फिल्में और धारावाहिक बना रहा है,अभी तो शुरुआत है अभी बहुत आगे जाना है.

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
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