निराश्रित अंजली और रिमझिम को नहीं मिल सकी ‘बिग बी’की मदद

रंजू संतोष,

“आदरणीय अमिताभ बच्चन अंकल,

नमस्ते

मैं बहेद खुश हूं हमेशा आपकी याद आती रहती है, आज भी वह दिन मैं भूल नहीं पाई हूं, जब आपने मुझे बाराबंकी में हजारों लोगों के बीच गोद में लिया था। पता नहीं आज क्यों आपकी बड़ी याद आ रही है और सोच रही हूं ऐसा मेरे साथ ही क्यों हो रहा है। पैदा लिया तो मां बाप ने फरेब किया, होश सम्भाला तो दुनिया वालों ने। फिर भी मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है। पढ़ना चहती हूं, कुछ बनना चाहती हूं, आने वाले वक्त में मेरी तरह कोई लवारिश की जिंदगी ना जी सके इसके लिए अपने पैरों पर खड़ी होना चाहती हूं। हो सके तो मेरा यह संदेश मेरे अंकल अमिताभ बच्चन तक पहुंचा देना जिन्होंने भरी सभा में मुझे और अंजली को गोद लिया था। और कहा था बेटी रिमझिम और अंजली तू पढ़, मैं तुझे डांक्टर बनाउंगा। उनकी वो बातें आज भी मेरे कानों में गूंज रहीं हैं। तू डाक्टर बनेगी मैं तुझे गोद लेता हूं, दस लाख का चैक दिया था, पता नहीं मेरा वो पैसा किसने ले लिया। आज भी मैं अपने उसी पुराने स्कूल में पढ़ रही हूं, जहां मेरी मां 7 वर्ष पहले छोड़कर चली गयी थी। उस स्कूल के संचालक मुझे बेटी की तरह रखते हैं, मैं कभी इन्हें छोड़ कर नहीं जाऊंगी लेकिन जब से मेरी बहन रिमझिम बीमार पड़ने लगी है, मुझे डर लगने लगा है। कोई तो मेरा अपना है, जिसके साथ मैंने कितनी रातें सिसकिया लेते हुए, एक दूसरे को लोरी सुनाते हुए गुजारी है। उसने अगर साथ छोड़ दिया तो फिर मैं कहीं की नहीं रह पाऊंगी। अमिताभ अंकल, मैं डांक्टर बनुंगी। आपको निराश नहीं करुंगी, मुझे पैसे की जरुरत नहीं है, बस मेरी बहन रिमझिम को बचा लें। उसे कुछ हो गया तो फिर मैं भी बच नहीं पाऊंगी।

आपकी बेटी अंजली”

ये दर्द भरी दास्तान है रिमझिम और अंजली की। जिनकी मां ने आज से सात वर्ष पहले पटना के कदमकुंआ स्थित शांति निकेतन स्कूल में इनका दाखिला कराया था। उस वक्त अंजली और रिमझिम के पिता भी साथ स्कूल आये थे। स्कूल में दाखिले के बाद वे जो गये फिर दुबारा लौट कर नहीं आयी। स्कूल प्रबंधक ने जब उनके द्वारा बताये गये पते की जानकारी ली गई तो पूरा पता फर्जी निकला। वहीं फोन नम्बर भी फर्जी निकले। इस दौरान छानबीन करने पर पता चला कि अंजली और रिमझिम की मां कोठे वाली है। फिर क्या था मीडिया के हाथ एक बड़ा मसाला मिल गया। शुरु हुआ इन्ड पीसिंग, सारे चैनल मैंदान में उतर गये। देखिए एक वैश्या मां अपने बच्ची को किस तरह स्कूल में लवारिश छोड़कर चली गयी। इस खबर में वो सभी बाते थीं जिसको मीडिया खोजती रहती है, लेकिन कुछ भी हो इस खबर के चलने के बाद अभिनेता अमिताभ बच्चन ने इन दोनों बच्चियों को गोद लेने की घोषणा की। उसके बाद फिर क्या था, मीडिया को एक माह का खुराक फिर से मिल गया। गोद लेने की खबर पूरे देश में फैल गयी और उसके बाद अमिताभ बच्चन की और से सूचना दी गयी कि वो बाराबंकी में अपनी बहू ऐश्वर्या राय के नाम से बनने वाले स्कूल के शिलान्यास समारोह में बारबंकी आ रहे हैं। उस कार्यक्रम में दोनों बच्चियों को लेकर आयें। इसकी सूचना मीडिया पर आते ही उनके मां की अचानक चैनल पर इन्ट्री होती है, मैं तो परिस्थिति की मारी हूं, मैं तो अपने दोनों बेटियों को अपने पास रखना चाहती हूं। मैंने तो इन्हें इस दलदल से दूर रखने के लिए हांस्टल में डाला था। इस इन्ट्री के बाद मीडिया की स्टोरी कलाईमैंक्स पर पहुंच गयी। अमिताभ बच्चन तक को जानकारी दी गयी कि उसकी मां आ गयी है, अब उसे ऱखना चाहती है। फिर क्या था मीडिया के साथ बारबंकी उसकी मां भी पहुंची स्कूल के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान मां अपनी दोनों बेटियों के साथ स्टेज पर पहुंची। पूरा बारबंकी मैंदान तालियों से गूंज गया। एक वैश्या जो अपनी बेटी को पढाना चाहती है, उस बदनाम दुनिया से दूर रखना चाहती है औऱ इसके मदद के लिए अमिताभ बच्चन खुद आगे आये हैं। मंच पर ही 10 लाख का चैक बच्चे और मां को दिया गया और वहीं पर घोषणा हुई कि दोनों लड़किया एश्वर्या राय के नाम से खुलने वाले इस नये स्कूल में मुफ्त में पढेंगी और हास्टल में रहेगी। कार्यक्रम खत्म हुआ मां अपनी बेटी को वहीं छोड़ कर दस लाख रुपये का चैक लेकर चम्मत हो गयी और उसके बाद से आज तक उसकी मां का पता नहीं है। जब इसकी जानकारी अमिताभ बच्चन को मीडिया वालों ने दी तो कुछ खास प्रतिक्रिया नहीं आयी बस यही कि वादे के अनुसार इन दोनों बच्चों को पढाई के लिए दो लाख रुपया प्रति वर्ष भेजा जा रहा है। यही नहीं पूरे देश विदेश से इन दोनों बहने के मदद के लिए 50 लाख से अधिक की राशि आयी लेकिन वो पैंसा कहा गया किसी को पता नहीं है। स्कूल संचालक मदद के लिए मीडिया के दफ्तर से लेकर अमिताभ बच्चन के पीआरओ तक को फोन कर रहे हैं अब तो लोग इनके फोन नम्बर देख कर फोन काट देते हैं। हलांकि इसकी जानकारी बच्चों को नहीं है, लेकिन स्कूल के संचालक अवितेश्वर प्रसाद और संचालिका सरोज देवी को ये डर सताने लगा है कि दोनों बहन बड़ी हो रही है, हमलोगों का उम्र बढ रहा है फिर रिमझिम को मिर्गी की बीमारी हो गयी है, कुछ हो गया तो फिर हम क्या करेंगे क्योंकि मुझे कोई कानूनी अधिकार भी नहीं है इन दोनों बच्ची को लेकर अब तो मदद की सारी उम्मीदें टूट चुकी हैं।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
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