डिबेट से ही रास्ता निकल सकता है : नीतीश

मुख्यमंत्री ने बिहार विधानसभा स्थापना दिवस समारोह का किया उद्घाटन

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज बिहार विधानसभा के विस्तारीकृत भवन परिसर में बिहार विधानसभा के स्थापना दिवस समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर उदघाटन किया। इस अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं सबसे पहले आज के इस कार्यक्रम के आयोजन के लिये बिहार विधानसभा के अध्यक्ष  विजय कुमार चैधरी को बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि पहली बार बिहार के लिये सबसे महत्पवूर्ण दिन 12 दिसम्बर 1911 को आया, जब अंग्रेजों के जमाने में दिल्ली दरबार में बिहार एवं उड़ीसा को मिलाकर बंगाल से पृथक एक राज्य बनाने की घोषणा की गयी एवं इसका मुख्यालय पटना निर्धारित किया गया। 22 मार्च 1912 को बंगाल से अलग होकर बिहार एवं उड़ीसा राज्य अस्तित्व में आया और पहली विधायी परिषद की बैठक 20 जनवरी 1913 को पटना काॅलेज के कैम्पस में हुयी थी, जिसे काउंसिल हॉल कहते हैं। बाद में जब 1920 में बिहार विधानमंडल का अपना भवन बना तो सात फरवरी 1921 को बिहार के प्रथम राज्यपाल श्री लॉर्ड सत्येन्द्र प्रसाद सिन्हा ने संबोधित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बहुत अच्छी पहल है। इसके आयोजन के कुछ दिनों बाद बजट सत्र होता है और इससे माहौल बनता है। उन्होंने कहा कि यह सिलसिला चलता रहना चाहिये और इसके साथ विधानमंडल के सदस्यों के लिये उन्मूखीकरण का कार्य होना चाहिये। मुख्यमंत्री ने विधानमंडल के सदस्यों से कहा कि जब इस तरह का कोई कार्यक्रम होता है तो उन्हें विधानसभा एवं विधान परिषद की कार्यवाही में जरूर हिस्सा लेना चाहिये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शून्यकाल और प्रश्नकाल में सामान्तया सभी सदस्यों की जबर्दस्त भागीदारी रहती है, उसके बाद लंच ब्रेक होता है और उसके बाद धीरे-धीरे सदस्यों की संख्या में कमी होने लगती है। उन्होंने कहा कि लोकसभा सदस्य के रूप में और केन्द्रीय मंत्री के रूप में भी संसद की कार्यवाही में भाग लेने का अवसर मिला है। जब रेल बजट होता था तो पूरी रात बजट पर चर्चा चलती थी। उन्होंने कहा कि लोकसभा में कोरम के लिये दस प्रतिषत सदस्य चाहिये, वह भी भोजन काल के बाद नहीं दिखता। उन्होंने कहा कि लोकसभा सदस्य बनते ही मुझे अपनी बात कहने का मौका मिला। कई सदस्य पांच साल गुजारने के बाद भी सदन में कभी नहीं बोलते लेकिन उनमें कुछ खासियत होती थी तो उनसे बैठकर बात करते थे। संख्या कम हो या अधिक सदन सही ढंग से चलनी चाहिये। किसी भी मसले पर डिबेट से ही रास्ता निकल सकता है। मूल बात की जानकारी भी सदस्यों को होनी चाहिये। उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा एवं बिहार विधान परिषद में हमेषा कोरम बनता है। संसद में तो बिना कोरम के भी कार्यवाही चलती है।

मुख्यमंत्री ने विधानमंडल के विस्तारीकृत परिसर के सदुपयोग के लिये और इसे फंक्षनल करने के लिये बिहार विधानसभा के अध्यक्ष एवं बिहार विधान परिषद के सभापति से अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले इस परिसर के पुस्तकालय भवन को सजा-संवारकर उपयोगिता के लायक बना दें। विधायक, पूर्व विधायक तो इस पुस्तकालय भवन का उपयोग तो करेंगे ही, विभिन्न क्षेत्रों के शोधार्थियों को भी इससे मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रभावी गतिविधि तब होगी जब दोनों सदन मिलकर इस पर कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि मैंने पहले भी कहा है कि दोनों सदनों की लाइब्रेरी एक होनी चाहिये और एक लाइब्रेरी होगी तो ज्यादा सुविधा होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां श्रम विभाग के कैंटिन से काम नहीं चलेगा। श्रम विभाग का कैंटिन के साथ-साथ अलग कैटरिंग की व्यवस्था की जानी चाहिये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विस्तारीकृत भवन में सेंट्रल हॉल का निर्माण किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा एवं विधान परिषद में जगह की बहुत कमी थी। लॉबी जो सतापक्ष और विपक्ष दोनों के लिये होती है, जगह की कमी थी, कामचलाऊ व्यवस्था में काम चल रहा था। इसमें सेन्ट्रल हाॅल का निर्माण किया गया है। उन्होंने कहा कि हाउस के बाद बैठने की जगह नहीं थी। दिल्ली के सेन्ट्रल हॉल की तर्ज पर यहां बैठने की व्यवस्था की गयी है। उन्होंने दिल्ली के सेन्ट्रल हॉल की चर्चा करते हुये कहा कि ऐसी जगह है जो पारदर्शी जगह है। वहां कोई किसी से बात नहीं छिपाता है, सचमूच वह अच्छी जगह है। मैं समझता हूं कि पारदर्षिता यहां भी रहेगी, लोकतंत्र में यह जरूरी भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार विधानसभा और बिहार विधान परिषद में जरूरी कर्मियों की कमी है। समय पर नियुक्ति होनी चाहिये। विधानसभा, विधान परिषद का स्वतंत्र दायित्व होता है। सब पुराने लोग सेवानिवृत हो जायेंगे तो विधानमंडल कैसे चलेगा। उन्होंने कर्मियों की भर्ती की नियमावली बनाने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि नियुक्ति मेरिट के आधार पर होनी चाहिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानमंडल सर्वश्रेष्ठ परम्पराओं को पुनर्जीवित करंे और आगे बढ़ाने की कोषिष करें। संस्था स्थायी होती है, बाकी लोग आते-जाते रहते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से पहचान बनती है और नयी पीढ़ी को संसदीय कार्यों के बारे में जानकारी मिलती है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को संसदीय कार्यों, लोकतंत्र, अपनी संस्कृति एवं इतिहास के बारे में जरूर बताया जाना चाहिये ताकि उनका व्यक्तित्व बेहतर बन सके और दुनिया में जो भारत की अलग पहचान है, वह कायम रह सके।

इसके पूर्व मुख्यमंत्री के समक्ष बिहार विधानमण्डल के गौरवषाली इतिहास पर आधारित वृतचित्र का प्रदर्षन किया गया। अध्यक्ष बिहार विधानसभा विजय कुमार चैधरी ने स्वागत भाषण किया और विधानसभा के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर प्रकाष डाला। कार्यक्रम को सभापति बिहार विधान परिषद अवधेष नारायण सिंह, बिहार विधान परिषद के नेता विरोधी दल  सुशील कुमार मोदी, बिहार विधान परिषद के उप सभापति  हारून रसीद, वित्त मंत्री  अब्दुलबारी सिद्दीकी, विधानसभा में नेता विरोधी दल डा प्रेम कुमार, बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष सदानंद सिंह ने भी संबोधित किया। धन्यवाद ज्ञापन संसदीय कार्य मंत्री  श्रवण कुमार ने किया। इस अवसर पर बिहार सरकार के मंत्रीगण एवं बिहार विधानमण्डल के सदस्यगण एवं बड़ी संख्या में पूर्व सदस्यगण उपस्थित थे।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
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