कभी-कभी (गजल)

1
27
राहुल रंजन महिवाल
राहुल रंजन महिवाल

डूब जाता है सागर में पैमाना कभी-कभी |

हो जाता है हर कोई दीवाना कभी-कभी |
यूँ तो हमारा प्यार ठहर सा जाएगा |
तुम भी मुझे देख कर शरमाना कभी-कभी |

संगदिल दुनियावालों की तंग नजरों से बच कर |
दिन ढले मेरे पास चली आना कभी-कभी |
हमारी तरह तुम्हारी नींदें उड़ी हैं कि नहीं |
और भी दिल की बातें बतलाना कभी-कभी |

रोशनी की तलाश में तुम तक पहुँचे हैं |
चेहरे से जुल्फों का साया हटाना कभी-कभी |
दिन-रात तुम्हें देख कर जीता है “महिवाल” |
तुम भी इस अदा पर मर जाना कभी-कभी |

राहुल रंजन महिवाल

भारतीय प्रशासनिक सेवा
जिलाधिकारी
अमरावती, महाराष्ट्र

Previous articleभारत की हार और इंडियन राजनीति की जीत – 2
Next articleटेक ओवर (कहानी)
सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here