बिहारी तो सबसे ज्यादा असुरक्षित बिहार से बाहर ही हैं : किशोर कुमार

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किशोर कुमार

किशोर कुमार
पत्थर को पानी बनाने की हिम्मत से लबरेज हैं बिहार के युवा व्यवसायी

 अनिता गौतम, पटना

बिहार में उद्योग धंधे की बुरी स्थिति का रोना वर्षों से रोया जा रहा है, बार-बार यही सुनने को मिलता है कि यहां पर काम करने का माहौल नहीं है। लेकिन जो लोग वाकई   मेहनत और लगन से काम करने वाले हैं और हर परिस्थिति में सिर्फ और सिर्फ आगे कदम बढ़ाने की सोचते हैं वे   न सिर्फ लगातार बेहतर काम कर रहे हैं, बल्कि उनका शानदार काम अन्य लोगों को भी सकारात्मक उर्जा से भर दे रहा है। बिहार के उद्योग जगत में ऐसा ही एक नाम है किशोर कुमार। फोटोग्राफी जगत के व्यवसाय चाहे वह कोडक हो, निकान अथवा सीटीएमआरआई, एक्स-रे या फिल्म, किशोर कुमार की अपनी खास पहचान है। अपने को इस मुकाम तक पहुंचाने का श्रेय भी स्वंय उन्हें ही जाता है।

पिता बीमा कर्मचारी तथा मां होमियोपैथ डाक्टर के बेटे किशोर सात भाई-बहन हैं। पांच बहनों और दो भाइयों में उनका स्थान एक बहन के बाद है। इतने बड़े परिवार का भरण-पोषण तथा भाई-बहनों की पढ़ाई का खर्च माता-पिता के लिए एक चुनौती थी।

किशोर कुमार ने जब अपनी एमएससी की पढ़ाई पूरी कर कानून की पढ़ाई की तथा बाद में पटना विश्वविद्यालय से रुरल मैनेजमेंट की डिग्री हासिल कर ली, तब पिता ने अपने हाथ खड़े कर दिये तथा कहा,  बेटा अब तुम कुछ भी करो,  परन्तु पैसा कमाओ, चाहे वह सरकारी नौकरी हो या व्यवसाय।  उनके अनुसार नौकरी प्राप्ति ईश्वर को प्राप्त करने जैसा था। अत: व्यवसाय के लिए विचार मंथन शुरु किया। चूंकि परिवार में किसी ने कभी बिजनेस किया नहीं था,  फिरभी  घबराहट परन्तु आत्मविश्वास के साथ उस तरफ कदम बढ़ाने की ठानी। किसी भी व्यवसाय के लिए पूंजी चाहिए   जो घर से मिलने वाला नहीं था।   इस प्रकार  बैंक से लोन लेकर छोटे पैमाने पर कोडक का वितरण अधिकार प्राप्त किया। शुरुआती उठापटक के बाद आज उनका नाम फिल्म स्टाक वितरकों में सबसे ऊपरी पायदान पर है। बिहार से  होने वाले आधे से अधिक फिल्म उत्पादों का वितरण वे सफलतापूर्वक कर रहे हैं।

संभव हो तो पूरी दुनिया का भला करो। जीवन तो कुत्ते –बिल्ली भी जी रहे हैं , परन्तु इनसान होने का फर्ज पूरा करो। इनसान ही ऐसा है जिसने भगवान खोजने वाले को भी भगवान बना दिया। महावीर, बुद्ध, जीसस, मरियम सभी इनसान से भगवान बन गये और ऐसा कमाल किया इनसानों ने , यह दार्शनिक अंदाज दिखता है किशोर कुमार का।

 एक तरफ अर्थ और दूसरी तरफ दर्शन का बेमिसाल संगम है उनमें। उनका मानना है कि जीवन के साथ पैसा है, जीवन के बाद नहीं। यह अच्छे कर्म ही हैं, जिससे इनसान भगवान बन जाता है।

आम आदमी की धारणा को समझाने का तरीका भी उनका अनूठा है। उनके अनुसार  यदि आप किसी को अच्छा मानते हैं तो आपसे उसके अच्छे होने का सबूत मांगा जाएगा, परन्तु बुराई करने पर सभी आपकी हां में हां मिलाते नजर आएंगे।   

अपने सफल व्यापार के लिए वह ईश्वर को धन्यवाद देते हैं। उन्हें खुशी मिलती है कि कम से कम व्यापार के माध्यम से पिता को जिनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि पांच-पांच बहनों की शादी अच्छे घरों में कर पाते को उनके सहयोग से ताकत मिली और आज उनकी सारी बहनें अच्छे–अच्छे घरों में व्याही गई हैं।

उनकी तमाम खुशियों को ग्रहण तब लग गया, जब उनकी जान से भी बढ़कर प्यारे छोटे भाई, जिसे साधारण से पेट दर्द की शिकायत के बाद दोनों किडनी खराब होने की डाक्टरी रिपोर्ट आई। विषम परिस्थितियों में हिम्मत न हारने वाले किशोर कुमार ने अपने छोटे भाई को बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराने की ठानी। बेहतर चिकित्सा यानि बेहतर खर्चा। परन्तु चहां चाह वहां राह! उन्होंने अपने व्यवसाय में दो-तीन उत्पादों को और शामिल किया तथा अपने घर और परिवार पर आने वाले खर्चे को निकाल कर सारी आमदनी भाई पर लगाने की ठानी। पहले कोलकाता और अब दिल्ली। पिछले एक साल से उनका छोटा भाई डायलिसिस पर जीवन गुजार रहा था। फिलवक्त वह दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में अपनी किडनी प्रत्यारोपण के बाद घर वापसी का इंतजार कर रहा है। उसको किडनी प्रदान करने वाली उसकी पत्नी हर पल उसके साथ है यह बात किशोर कुमार को अत्यंत सुकून देती है।

प्रत्येक सफल इनसान के पीछे नारी होती है इससे उनको भी इनकार नहीं है। वह अपनी पत्नी को हर दृष्टिकोण से अपनी सबसे बड़ी सहयोगी बताते हैं। उन्हें खुशी है कि पत्नी भी जीवन जीने की कला सिखाती है और उसके साथ के बिना कोई भी व्यक्ति अधूरा है।

बिहार के व्यवसायियों के पलायन पर उनका मानना है कि यदि आप सही नहीं है तो कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं, चाहे वह दुनिया का कोई भी कोना हो। बिहारी तो सबसे ज्यादा असुरक्षित बिहार से बाहर ही है। कहने को पूरा देश अपना है परन्तु बिहारियों का अपमान अत्यंत विचलित करता है। अपने घर में भी है रोटी, के मर्म को समझकर दुनिया को अपनाओ।

6 COMMENTS

  1. वाकई में यह बड़ी बात है कि जब सारे बिहारी बिहार से बाहर रोजी-रोजी की तलाश में भटक रहे हैं किशोर कुमार यहीं रह कर एक मजबूत भविष्य का निर्माण कर रहे हैं…अनिता जी आपने बहुत ही अच्छी तस्वीर पेश की है बिहार की।

  2. Hey, I just hopped over to your site via StumbleUpon. Not somthing I would normally read, but I liked your thoughts none the less. Thanks for making something worth reading.

  3. किशोर कुमार का अपने घर- परिवार तथा भाई के लिये किया गया सहयोग निःसन्देह दूसरों को प्रेरणा प्रदान करेगा।

  4. किशोर कुमार का अपने घर-परिवार के लिये किया गया कार्य निःसन्देह सराहनीय एवं प्रेरणादायी है।

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