भ्रष्टाचार की आंधी में उड़ जाएगा भारत का लोकतंत्र

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अविनाश नन्दन शर्मा

2-जी स्पेक्ट्रम घोटाला,आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाला एवं राष्ट्रमंड़ल खेल घोटाला की चल रही सनसनी खेज प्रक्रिया के साथ भ्रष्टाचार पर महाभियोग का सामना कर रहे कोलकात्ता हाई कोर्ट के जज सौमित्र सेन और अन्य घोटाले भारतीय लोकतंत्र का कब्र खोदनें में लगे हुए हैं। साइमन गो बैक के नारे के साथ  जब लाला लाजपत राय सड़कों पर लाठियां खा रहे थे तो उन्होंने कहा था कि मेरे उपर पड़ने वाली ये एक-एक लाठियां ब्रिटिश हुकूमत के ताबूत की एक-एक कील साबित होंगी।उसी तरह देश में हो रहे ये एक-एक घोटालें कहीं भारतीय लोकतंत्र के ताबूत की एक-एक कील न साबित हो जाएं।

आजाद भारत की पहचान बनते ये एक के बाद एक होने वाले घोटाले और उनकी लीपापोती। इस्तीफा,जांच-पड़ताल,विपक्ष के हो हंगामें और फिर उस पर लम्बी कानूनी प्रक्रिया के नाम पर छा जाने वाली चुप्पी जनमानस के लिए एक अबूझ पहेली बनी हुई है। घोटालेबाजों को सजा न मिलना नित नए घोटाले का बीजारोपन कर रहा है।बड़े अधिकारी,नेता, सफेदपोश बड़े ही शातिर अंदाज में न्याय और अन्वेषण प्रक्रिया को अपने अनुकूल बना ले रहे हैं। यही कारण है कि चारा घोटाले से ले कर अपने कार्यकाल में हुए सारे घोटालों की न्यायिक प्रक्रिया को लालू प्रसाद एक मजाक समझते हैं,और उन्ही की तर्ज पर मधु कोड़ा इस पर राजनीति कर रहे हैं।यह नहीं भूला जा सकता कि कभी कांग्रेस इनकी शक्ति रही है और ये लोग कदम से कदम मिला कर चलते रहे हैं। भ्रष्टाचारियों की पोषक रही कांग्रेंस आज 2-जी स्पेकट्रम घोटाले की 1.77 लाख करोड़ रुपये की रकम के साथ घोटालों की दौड़ में  सबसे आगे है।

एक ओर भारत की गरीब जनता और दूसरी ओर अरबों के घोटाले देश के जनतंत्र की कौन सी तश्वीर पेश कर रहे हैं।जहां देश की आजादी एक ऐसे राष्ट्र का सपना ले कर आई थी जो हर इंसान में तरक्की और हर परिवार की तरक्की में इंसानियत भर देगी। महात्मा गांधी एक संपन्न भारत का सपना देख रहे थे जो एक खुशहाल गांवों का समूह होगा। उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि भारत एक घोटालों का देश बन जाएगा, खून-पसीने की मेहनत से सींचे गए आजादी के ये पौधे जहरीले हो जाएंगे। भारत जो ब्रिटिश हुकूमत में अंग्रेजों की लूट का देश था आज नेताओं के घोटालों का देश बन गया है। सुभाष चंद्र बोस ने कहा था देश में वास्तविक जनतंत्र स्थापित करने के लिए भारत को 25 वर्षों तक तानाशाही व्यवस्था में रखनें की जरुरत है। आज सुभास बोस के ये शब्द अपनी सार्थकता दिखा रहे हैं।

भाजपा ने तो घोटालों की राजनीति कारगिल के शहीदों पर ही कर ड़ाली और देश को ताबूत घोटाले का उपहार दिया। देश की आजादी बनाए रखने के लिए अपनी शहादत देने वाले इन जवानों ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि इनकी कुर्बानी राजनीतिज्ञों के धन लालसा की पूर्ति का रास्ता तैयार करेगी।वक्त के इस बदलते दौर में किस-किस को टटोलें, किस पर उम्मीद करें,किस की तरफ देंखे। हर साख पर उल्लू बैठा है…

भ्रष्टाचार निरोधक कानून को निर्मित किया गया है जिसके तहत विशेष अदालतों की व्यवस्था की गई है। परंतु उस देश में न्याय की क्या उम्मीद की जा सकती है जहां जजों के उपर ही भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं और महाभियोग चलाये जा रहे हैं। और तो और जस्टिस सौमित्र सेन महाभियोग की प्रक्रिया पर ही कानूनी सवाल उठा रहे हैं। जजों की संपत्ति को सार्वजनिक करने के फैसले पर पहले ही बहुत उठापटक हुए और बहुत से  जजों द्वारा इस पर विरोध के स्वर उठाए गए साथ ही   आज जब उनकी संपत्ति सार्वजनिक है तो स्पष्ट रुप से देखा जा सकता है कि ज्यादातर जज करोड़पति हैं। दिल्ली –मुंबई जैसे बड़े शहरों में इनकी आलिशान कोठियां हैं जो इनके पद के दुरुपयोग की कहानी कह रही हैं। आज भी न्यायपालिका जनता के प्रति उतरदायी नहीं है तथा राजनेताओं के घोटालों से त्रस्त जन-भावना को न्यायपलिका में भी शरण नहीं मिल रहा है। इसी तर्ज पर मनमोहन सिंह द्वारा राजनेताओं एवं मंत्रिमंड़ल सहयोगियों की संपत्ति सार्वजनिक करने का फैसला घोटालों को रोकने में कितना कामयाब होगा?

देश में चल रही इन घोटालों की आंधी में कहीं हमारा लोकतंत्र ही न उड़ जाए। साथ ही जन मानस में देश की आजादी की सार्थकता ही न खत्म हो जाए। गांधी और सुभाष का यह देश कब तक भटकेगा ???

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

5 COMMENTS

  1. हाँ जरूर उड़ जायेगा .बशर्ते यह देश अब सब भुला सब से पहले भ्रष्टाचार को ही दुश्मन नंबर एक पहले मान ले और भ्रष्टाचार पर सीधा निशाना कसे .

    अलोक जी बहुत बधाई .तेवर में ‘ तेवर ‘ है !

  2. ब्रामणो ने लोकतंत्र को खत्म करके ब्रामणतंत्र स्थापित किया है । दुनिया मे कोई भी अल्पसंख्य समुदाय बहूसंख्य लोगो पर राज नही कर सकता पर 3% ब्रामण 85% मुलनिवासियोपर राज कर रहे है । ऊसका कारण है भ्रष्टाचार । भ्रष्टाचार के बिना ये संभव नही है ।

  3. भ्रष्टाचार की आंधी में jarur उड़ जाएगा भारत का लोकतंत्र kyu ki har jagha ab भ्रष्टाचार की आंधी hai kyu news papes v ab भ्रष्टाचार की awaz nhi uthati hai use ek add mil jye to sab भ्रष्टाचार khatam ho jata hai. or garibo ka awaz sunna ban kardeta hai or भ्रष्टाचार sarkar ka barai karta hai ye desh ka kya hoga bhagban hi jane लोकतंत्र ki awaz uthane bale hi भ्रष्ट hoge hai us jagha me kam karne balo ke satha sosan hota hai unhe gali di jati hai jo khud भ्रष्ट hai we dusre ka kya awaz uthayenge shirf dikhawa hai apna dhandha chalane ko lekar

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