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पंकज त्रिपाठी 12 साल बाद नाटक के मंच पर लौटे, होम प्रोडक्शन म्यूज़िकल प्ले ‘लाइलाज’ में बेटी आशी के साथ साझा करेंगे मंच

अमरनाथ, मुंबई

अभिनेता पंकज त्रिपाठी 12 साल के लंबे अंतराल के बाद म्यूज़िकल कॉमेडी स्टेज प्ले ‘लाइलाज’ के ज़रिये थिएटर में वापसी कर रहे हैं। यह वापसी उनके लिए बेहद खास और निजी है। इस नाटक का निर्माण पंकज त्रिपाठी और उनकी पत्नी मृदुला अपने होम प्रोडक्शन बैनर रूपकथा रंगमंच के तहत कर रहे हैं। खास बात यह है कि इस नाटक में उनकी बेटी आशी भी नज़र आएंगी, जिन्होंने पिछले साल थिएटर में डेब्यू किया था और अब पहली बार अपने पिता के साथ मंच साझा करेंगी।

इस नाटक का निर्माण मृदुला ने किया है और पंकज त्रिपाठी सह-निर्माता हैं। ‘लाइलाज’ को मशहूर थिएटर कलाकार फैज़ मोहम्मद खान ने लिखा और निर्देशित किया है। यह नाटक 8 फरवरी को मुंबई के रंगशारदा थिएटर में पेश किया जाएगा। संगीत, हास्य और भावनाओं से सजी यह प्रस्तुति भारतीय थिएटर की परंपराओं से जुड़ी हुई है, लेकिन इसमें एक आधुनिक सोच भी देखने को मिलेगी। पंकज त्रिपाठी के लिए यह प्रोजेक्ट सिर्फ थिएटर में वापसी नहीं, बल्कि अपने जड़ों की ओर लौटने जैसा है।

थिएटर में वापसी और बेटी के साथ मंच साझा करने को लेकर पंकज त्रिपाठी ने भावुक होते हुए कहा, “थिएटर से ही मेरे अभिनय सफर की असली शुरुआत हुई थी और 12 साल बाद मंच पर लौटना मेरे लिए बेहद भावुक और सुकून देने वाला अनुभव है। सिनेमा ने मुझे बहुत प्यार और पहचान दी है, लेकिन थिएटर की नज़दीकी और सच्चाई कुछ अलग ही होती है। यह आपको विनम्र बनाता है, चुनौती देता है और एक कलाकार के तौर पर ईमानदार रखता है। लाइलाज मेरे दिल के बहुत करीब है क्योंकि यह परिवार, दोस्ती और कहानी कहने के प्यार से जुड़ा हुआ है। अपनी पत्नी मृदुला के साथ इसे रूपकथा रंगमंच के तहत बनाना हमारे लिए एक प्रेमपूर्ण सफर रहा है, जिसने हमें फिर से याद दिलाया कि हमने सपने देखना क्यों शुरू किया था।”

बेटी आशी के साथ मंच साझा करने पर उन्होंने आगे कहा, “आशी को पहली बार मंच पर कदम रखते देखना मेरी ज़िंदगी के सबसे भावुक पलों में से एक रहा है। थिएटर अनुशासन, धैर्य और कला के प्रति सम्मान सिखाता है और उसके लिए इससे बेहतर शुरुआत हो ही नहीं सकती थी। उसके साथ मंच साझा करना पिता और बेटी का रिश्ता निभाने जैसा नहीं है, बल्कि दो कलाकारों का एक-दूसरे से सीखते हुए साथ आगे बढ़ना है। लाइलाज में हंसी, संगीत और अपनापन है, लेकिन इसके साथ हमारी अपनी सच्चाई और खुशी भी जुड़ी हुई है। मुझे उम्मीद है कि दर्शक इस जुड़ाव को महसूस करेंगे।”

‘लाइलाज’ के साथ पंकज त्रिपाठी न सिर्फ अपनी थिएटर जड़ों की ओर लौट रहे हैं, बल्कि मंच के ज़रिये अर्थपूर्ण कहानी कहने के अपने संकल्प को भी मज़बूत कर रहे हैं। रंगशारदा में इस नाटक की शुरुआत को लेकर थिएटर प्रेमियों और उनके प्रशंसकों में खास उत्साह है, जो एक बार फिर पंकज त्रिपाठी को लाइव परफॉर्मेंस में देखने और पिता-बेटी की इस खास जुगलबंदी का गवाह बनने के लिए उत्सुक हैं।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

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