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Wednesday, February 28, 2024
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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

मंजिल का सफ़र (कविता )

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-  धर्मवीर कुमार           मंजिल का सफ़र कतई आसान न था,  क्योंकिं मुझ पर कोई भी मेहरबान न था. रास्ते में छोटे- बड़े अवरोध भी मिले,  सच कहता...

पल पल में अब बनेगा तेरा कल… (कविता)

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दीपशिखा शर्मा कुछ जिंदगी के पल… सपने बुनते – बुनते हमको कहते हैं कि चल कुछ जिंदगी के पल… कह गए मेहनत कर , बेहतर होगा तेरा कल। कुछ...

पिछलग्गू लोगों के शोर में और आन्दोलन में फर्क होता है

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चंदन कुमार मिश्र अन्ना से सरकार की अनबन और अन्ना के अनशन का खेल रोज दिख रहा है। तानाशाही तरीका अपनाना कहीं से न्यायोचित नहीं...

15 अगस्त पर लंबी भूमिका के साथ “एक कविता”

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चंदन कुमार मिश्र कुछ लोग कहेंगे, बकवास कविता है। कुछ कहेंगे, जब देखो रोता रहता है। कुछ कहेंगे, क्या घिसी पिटी बात दुहराकर कविता बना...

अंग्रेजी के खिलाफ़ जब बोले श्री सेठ गोविन्ददास(भाग-1):-

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चंदन कुमार मिश्र (बिहार राष्ट्रभाषा परिषद के नवम वार्षिकोत्सव में सभापति-पद से श्रीसेठ गोविन्ददास जैसा प्रख्यात और जबरदस्त हिन्दी-सेवी अंग्रेजी के भक्तों के सारे झूठे और बेबुनियाद ...

लालू के नाम उनकी गलतियों को लेकर एक पाती

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(यह पत्र बिहार के ही एक व्यक्ति ने लिखा है, इस शर्त पर कि उनका नाम प्रकाशित न करूं। चूंकि लालू प्रसाद बिहार की...

मानव ने प्रकृति से बहुत खेल खेला… (कविता)

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दीपशिखा शर्मा सावन की घटा छाई रिमझिम बूंदों की सवारी संग आई , हर जगह पहले तो वर्षा की खुशी थी छाई फिर कैसे दुखों की घड़ी है...

दोस्ती और रिश्तों की नयी परिभाषा है धारवाहिक परीक्षा गुरु

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राजू वोहरा, नई दिल्ली दोस्ती के बीच लालच और फिर उसे बदनाम कर अपने मंतव्यों को साधने वाले रिश्तों की कहानी बड़ी दर्दनाक होती है...

ईश्वर तुम्हें धिक्कार है! (कविता)

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चंदन कुमार मिश्रा निर्मल  हृदय की  प्रार्थना निष्कपट मन की  भावना कोई    नहीं   सम्भावना फिर   भी तुम्हारी साधना यह  कर  रहा  संसार है! ईश्वर  तुम्हें  धिक्कार है! ये  चीख कैसी आज...