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Sunday, May 29, 2022

महान कवि की कविता

ऊंची इमारत की ऊपरी मंजिल पर लिखी जाने वाली कविताओं में अब हिन्दुस्तान का बोध नहीं होता शब्द गमगीन की जगह सौंदर्य से भरे होते हैं वातावरण खुशनुमा होता...

हिंदुस्तान का क्या होगा (कविता)

मुर्दों से भरे पड़े हिंदुस्तान को मर जाने में भला है जीने से क्या होने वाला कुछ भी तो नहीं यूं कोशिश लगातार कई दशकों से चल रही...

…If we could last SEVEN days together !!!

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A Story by Alok Nandan Milton just comes back from India. For last four years he has been doing a research project related with Indian...

काले कागज़ पे काली स्याही असर क्यों छोड़े !(कविता)

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हज़ारों अर्जियों पड़ी हैं उनके  मेज़ पर कब से तेरे अर्जी की दाखिली का वक़्त कल ही आएगा..! खड़े रहो तब-तलक, बनो कतार का हिस्सा.. थक के...

मंदिर में भगवान

सूखी रोटी के लिए शोर है संसार में आज जीवन फल-फूल रहा हत्या और अपराध में केवल रोटी की कीमत चुका दे जो आदमी वह आदमी भगवान है धधकते इस मकान...

बूढ़ा लोकतंत्र (कविता)

दस धूर जमीन के चलते महल की खूबसूरती उदास हो गयी है उस गैर-मजरुआ जमीन पर राजा ने वेश्यालय बना रखा था जहां पर जिस्मफरोशी का धंधा कागज के...

…Oh! still I love you ( a story)

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Alok nandan I am not Voltaire; and you are not Marquise Du Chatelet. But to me you are not less than Chatelet, although we have...

पिछड़ा वर्ग की सामाजिक स्थिति का विश्लेषण

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(पुस्तक-समीक्षा) रमेश प्रजापति समाजशास्त्र की ज्यादातर पुस्तकें अंग्रेजी में ही उपलब्ध होती थी, परन्तु पिछले कुछ वर्षो से हिन्दी में समाजशास्त्र की पुस्तकों के आने से...

अफवाह बना विश्वास (कविता)

निर्भय देवयांश पत्थर की बनी मूर्ति में कोई आवाज नहीं है निर्जीव है लाशों की तरह इंसान के जजबात ने कुछ देर के लिए पत्थर पर विश्वास कर लिया कुछ...

जंग खाते अतीत की चमकदार पेंटिंग

दुर्गेश सिंह, मुंबई छुट्टी के दिन के इस कोरस को बॉलकनी में बैठकर चाय की चुस्कियों के बीच बिता देना आसान न होगा। क्योंकि कोरस...