इन्फोटेन

मिनिएचर्स ड्रामा और फोर ब्रदर्स फिल्म्स प्रस्तुत करते हैं दिल दोस्ती फाइनेंस

अमरनाथ, मुम्बई

कहानी सुनाने का तरीका बदल रहा है
अब बड़े पर्दों से ज़्यादा नज़दीकी उस स्क्रीन की है जो आपकी जेब में है
मिनिएचर्स ड्रामा इसी बदलाव की शुरुआत कर रहा है
छोटी कहानियां, असली एहसास और सीधी बात

15 अगस्त 2025 से मिनिएचर्स ड्रामा पर स्ट्रीम हो रही है
दिल दोस्ती फाइनेंस
इसका निर्माण फोर ब्रदर्स फिल्म्स ने किया है
और इसे सहयोग मिला है इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ क्वांटिटेटिव फाइनेंस का

तीन दोस्त
तीन अलग ज़िंदगियां
तीन तरह की आज़ादी की तलाश
किसी को गरीबी से निकलना है
किसी को बीते हुए दर्द से
और किसी को अपनी पहचान बनानी है

ये कहानी है उन तीनों की जो हालातों से नहीं, अपने डर और सपनों से लड़ते हैं
दोस्ती ही उनकी ताकत है और उनकी लड़ाई भी
कभी एक-दूसरे का सहारा बनते हैं, कभी खुद को खींच कर बाहर निकालते हैं
जैसे भी हो, रुकते नहीं

मुख्य भूमिकाओं में हैं चेतन शर्मा, शैलजा चतुर्वेदी और अयाज़ पाशा
साथ में हैं ऋषिका चंदानी, कल्पना राव, स्वप्निल श्रीराव, सायली मेश्राम और सर्मिष्ठा धर
हर किरदार में एक साफ़ और अलग आवाज़ है
हर चेहरा एक नई कहानी लेकर आता है

इस शो को लिखा और निर्देशित किया है हिमांशु राज तलरेजा ने
एक ऐसा कलाकार जो कैमरे के पीछे भी उतना ही सच्चा है जितना सामने
ये शो उनके सफर की शुरुआत है
एक ईमानदार, मेहनती और समझदारी से बनी हुई कहानी

मिनिएचर्स ड्रामा का मानना है
कि अच्छी कहानियों को ना लंबा होने की ज़रूरत है ना ज़ोरदार होने की
सिर्फ सच्चा होना काफी है
हम ऐसी कहानियां दिखाएंगे जो आपके आसपास की हैं
आपके जैसे लोगों की हैं
हर छोटी जीत, हर चुप दर्द और हर कोशिश की आवाज़ हैं

हमारी कहानियां वर्टिकल होंगी
लेकिन उनकी गहराई सीधी दिल तक जाएगी

दिल दोस्ती फाइनेंस
15 अगस्त 2025 से
देखिए सिर्फ मिनिएचर्स ड्रामा यूट्यूब चैनल पर
फोन उठाइए और हमारी दुनिया से जुड़िए

editor

सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

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