अब काशी, मथुरा और हिन्दू राष्ट्र के लिए सक्रिय हो जाओ : टी. राजासिंह

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पटना: तिहरे तलाक पर प्रतिबंध, अनुच्छेद 370 हटाना और श्रीराममंदिर का निर्माण, ये 3 बातें पूर्ण हो गई हैं। अब केवल 3 बची हैं । वे हैं काशी में विश्‍वनाथ मंदिर और मथुरा में श्रीकृष्ण मंदिर बनाना तथा अंत में अखंड हिन्दू राष्ट्र की स्थापना ! अखंड हिन्दू राष्ट्र केवल बोलने से स्थापित नहीं होगा, उसके लिए प्रत्यक्ष आचरण करना होगा। इस हेतु छत्रपति शिवाजी महाराज और धर्मवीर संभाजी महाराज के मार्ग का अनुसरण करना होगा। हिन्दू राष्ट्र में ‘गोहत्या’, ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’ जैसे आघात हिन्दू धर्म पर नहीं होंगे। हिन्दू जागृत और संगठित होकर हिन्दू राष्ट्र हेतु सक्रिय हों, ऐसा आवाहन प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ तथा तेलंगाना के भाजपा विधायक टी. राजासिंह ने किया । वे हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से आयोजित ‘ऑनलाइन’ नवम ‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ के समापन सत्र में बोल रहे थे । इस समय अयोध्या के ‘श्री रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यासके कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेवगिरी महाराज भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा, भारत स्वयंभू हिन्दू राष्ट्र है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी हिन्दू साम्राज्य की स्थापना की । परंतु स्वतंत्रता के उपरांत सत्ताधारियों ने हिन्दूविरोधी विचारधारा अपनाई; अब आगे हिन्दू राष्ट्र अबाधित रखना, प्रत्येक हिन्दू का दायित्व है । इसके लिए वीर सावरकर द्वारा बताए अनुसार राजनीति का हिन्दूकरण होना आवश्यक है। इस समय सनातन संस्था के धर्मप्रचारक सद्गुरु नंदकुमार जाधव ने कहा, ‘मेरे भक्तों का नाश कभी भी नहीं होगा’, यह भगवान का वचन है। शासनकर्ता भले ही साधन-सामग्री संपन्न हों, तब भी वे जनता की रक्षा नहीं कर पा रहे, यह हम स्वयं अनुभव कर रहे हैं । परंतु ईश्‍वर भक्त की पुकार पर दौडे चले आते हैं। इसलिए आगामी आपातकाल में अपनी रक्षा होने हेतु स्वयं ईश्‍वर के भक्त बनें और अन्यों की भी साधना में सहायता करें।

हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळे ने कहा, ‘वर्तमान आपातकाल में संसार तृतीय विश्‍वयुद्ध की दहलीज पर खडा है। कोरोना महामारी के काल में चीन के विरोध में अनेक देश एकजुट हो गए हैं। विश्‍वयुद्ध चालू होने पर, दिल्ली दंगे, शाहीनबाग आंदोलन, सीएए के विरोध में हिंसक आंदोलन की भांति भारतविरोधी शक्ति जाति-धर्म के नाम पर गृहयुद्ध भडकाने के षड्यंत्र रचे जाने की पूरी संभावना है। इस भावी अराजक परिस्थिति का सामना करने हेतु हिन्दुत्वनिष्ठ अग्निशमन, प्रथमोपचार, आपातकालीन सहायता, नागरी सुरक्षा (सिविल डिफेंस) आदि आपातकालीन परिस्थिति संभालने का प्रशिक्षण लेने की आवश्यकता है। कालमहिमा के अनुसार वर्ष 2023 में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना निश्‍चित होगी । इसमें योगदान देना, हमारी साधना ही है ।’

इस अधिवेशन में राष्ट्र और धर्म रक्षा हेतु विविध विषयों पर कृति कार्यक्रम निश्‍चित करने हेतु ‘ऑनलाइन’ गुटचर्चा भी की गई । इसमें विविध राज्यों के हिन्दुत्वनिष्ठों के विभिन्न 16 गुट बनाकर ‘ऑनलाइन’ चर्चाओं में सैकडों हिन्दुत्वनिष्ठ सहभागी हुए। अधिवेशन के अंत में हिन्दू राष्ट्र की दृष्टि से कुछ प्रस्तावों का वाचन हिन्दू जनजागृति समिति के जळगाव जिला (महाराष्ट्र) समन्वयक प्रशांत जुवेकर ने किया। ‘हर हर महादेव’ के जयघोष के बीच तथा ‘कमेंट बॉक्स’ में भी ‘हर हर महादेव’ पोस्ट कर, इन प्रस्तावों का सभी ने अनुमोदन किया और प्रस्ताव पारित किया।

ऑनलाइन ‘नवम अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ में पारित हुए प्रस्ताव !

1. अयोध्या में बननेवाला श्रीराममंदिर हिन्दुओं की धर्मशिक्षा का केंद्र बने । यहां के अन्य मंदिरों तथा ऐतिहासिक धरोहरों को आक्रमणमुक्त कर उनका जीर्णोद्धार करे। धार्मिक असंतोष से बचने हेतु अयोध्या में अन्य धर्मियों के धार्मिक निर्माणकार्य को अनुमति न दे ।

2. हिन्दुओं के मूलभूत अधिकारों का हनन करनेवाला ‘प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991’, यह कानून तत्काल निरस्त कर राममंदिर की भांति काशी, मथुरा आदि जैसे मुगल आक्रांताओं द्वारा हडपे हिन्दओं के हजारों मंदिर और उनकी भूमि हिन्दओं को सौंपे ।

3. सभी को समान अधिकार देने हेतु संविधान से ‘सेक्युलर’ शब्द हटाकर वहां ‘स्पिरिच्युअल’ शब्द जोडे तथा भारत को ‘हिन्दू राष्ट्र’ घोषित करे ।

4. ‘नेपाल हिन्दू राष्ट्र घोषित हो’; नेपाली हिन्दुओं की इस मांग का अधिवेशन संपूर्णतः समर्थन करता है ।

5. हिन्दू समाज की तीव्र भावनाओं को ध्यान में रख केंद्रशासन ‘संपूर्ण देश में गोवंश हत्या बंदी’ एवं ‘धर्मांतरणबंदी’ के विषय में निर्णायक कानून पारित करे ।

6. पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं श्रीलंका के हिन्दुओं के साथ जो अत्याचार हो रहे हैं, उनकी जांच अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन और भारत सरकार करे तथा वहां के अल्पसंख्यक हिन्दुओं को सुरक्षा प्रदान करे ।

7. कश्मीर घाटी में स्वतंत्र ‘पनून कश्मीर’ नामक केंद्रशासित प्रदेश बनाकर विस्थापित कश्मीरी हिन्दुओं को कश्मीर में फिर से बसाया जाए ।

8. तमिलनाडु के श्री नटराज मंदिर का अधिग्रहण निरस्त करने के सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार पूरे देश में अधिगृहीत सभी मंदिरों का अधिग्रहण तत्काल रद्द कर, वहां का व्यवस्थापन भक्तों को सौंपे ।

9. केंद्र सरकार तत्काल ‘केंद्रीय नामकरण आयोग’ की स्थापना कर, पूरे देश के जिन नगरों, भवनों, सडकों आदि के नाम विदेशी आक्रांताओं का नाम पर रखे हैं, उन नामों को बदलकर उनके मूल नामानुसार नामकरण करे ।

10. ‘वेबसीरीज’ के माध्यम से हिन्दू धर्म, देवी-देवता, संत आदि का निरंतर हो रहा घोर अपमान, बडी मात्रा में हो रहा अश्‍लीलता और हिंसा का प्रसार ध्यान में रख शासन ‘वेबसीरीज’ को ‘सेन्सर’ करे । साथ ही इस माध्यम से हिन्दू धर्म और देवी-देवताओं के हो रहे अनादर के विरोध में कठोर कार्रवाई होने हेतु विशेष कानून तत्काल पारित किया जाए ।

11. राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भारत में आश्रय प्राप्त रोहिंग्या मुसलमानों को वापस भेजने हेतु सरकार कानून बनाए ।

12. देहली दंगों के सूत्रधार आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसेन, तथा ‘सीएए’ और ‘एनआरसी’ कानून के विरोध में शाहीनबाग जैसे हिंसक आंदोलन करनेवालों पर देशद्रोह का अभियोग चलाए ।

13. पिछले कुछ वर्षों में अहिन्दुओं की लोकसंख्या का विस्फोट देखते हुए सभी धर्मियों की जनसंख्या का संतुलन बनाए रखने हेतु देश में तत्काल ‘जनसंख्या नियंत्रण कानून’ लागू किया जाए ।

14. भारत में ‘एफ.एस.एस.ए.आइ.’ और ‘एफ.डी.ए.’ जैसी शासकीय संस्थाएं होते हुए भी धार्मिक आधार पर ‘समांतर अर्थव्यवस्था’ निर्माण करनेवाली ‘हलाल सर्टिफिकेशन’ की व्यवस्था त्वरित बंद की जाए ।

15. विरोध में कोई प्रमाण न होने पर भी कारागृह में सड रहे सर्व हिन्दुत्वनिष्ठों के अभियोग (मुकदमे) चलाने हेतु ‘विशेष द्रुतगति न्यायालय’ की स्थापना करे और निर्दोष हिन्दुत्वनिष्ठों को न्याय दें ।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।