
आयुर्वेद को देश-दुनिया में नई पहचान मिलना भारत के लिए गौरव की बात : डॉ. मारिया जफर
लालमोहन महाराज,मुंगेर
आयुर्वेद दिवस के अवसर पर डॉ. मारिया ज़फ़र , एम.डी. आयुर्वेद चिकित्सा पदाधिकारी ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा, जीवनशैली और समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण का अभिन्न हिस्सा रहा है। आज आयुर्वेद को देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान और व्यापक स्वीकार्यता मिलना प्रत्येक भारतीय के लिए गौरव की बात है।
डॉ. जफर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में आयुर्वेद एवं भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा मिला है। आयुष मंत्रालय की स्थापना के साथ शोध, गुणवत्ता, मानकीकरण और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के माध्यम से आयुर्वेद को आगे बढ़ाने के प्रयासों से इसकी पहुंच देश-विदेश तक विस्तारित हुई है। उन्होंने इस दिशा में केंद्र सरकार के साथ-साथ बिहार सरकार द्वारा आयुर्वेद एवं आयुष चिकित्सा पद्धति को प्रोत्साहित करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए बिहार सरकार का भी हृदय से धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली को अपनाने की एक समग्र भारतीय स्वास्थ्य परंपरा है। आयुर्वेद हमें हजारों वर्षों से यह समझाता आया है कि वास्तविक स्वास्थ्य केवल रोगमुक्त होने का नाम नहीं, बल्कि शरीर, मन, इन्द्रियों और आत्मा के संतुलन में निहित है। “स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्, आतुरस्य विकार प्रशमनं च” आयुर्वेद का मूल उद्देश्य है, जिसका महत्व आज भी उतना ही प्रासंगिक है। बदलती जीवनशैली, बढ़ते मानसिक तनाव और जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के दौर में आयुर्वेद की दिनचर्या, ऋतुचर्या, आहार-विहार तथा निवारक स्वास्थ्य संबंधी अवधारणाएं लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक सजग बनने की प्रेरणा देती हैं।
बिहार की महिलाओं से विशेष अपील करते हुए डॉ. जफर ने कहा कि महिलाएं परिवार के स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण आधारशिला होती हैं। इसलिए बिहार की सभी महिलाओं को आयुर्वेद के प्रति जागरूक होना चाहिए और स्वस्थ जीवनशैली को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद से संबंधित प्रमाणित एवं वैज्ञानिक जानकारी को अपनाना और बिना विशेषज्ञ की सलाह के किसी भी औषधि का प्रयोग न करना स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. जफर ने कहा कि आज आवश्यकता केवल आयुर्वेद की प्राचीनता पर गर्व करने की नहीं, बल्कि उसके ज्ञान को वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रमाण-आधारित चिकित्सा, सुरक्षित औषधि प्रयोग और आधुनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर विकसित करने की है। हमारी शास्त्रीय विरासत हमें दिशा देती है, जबकि वैज्ञानिक शोध, चिकित्सकीय ईमानदारी और रोगी की सुरक्षा आयुर्वेद के भविष्य को और अधिक सुदृढ़ बनाती है।
उन्होंने कहा कि एक आयुर्वेद चिकित्सक के रूप में हमारा संकल्प होना चाहिए कि हम परंपरा का सम्मान करते हुए ज्ञान की निरंतर खोज करें, रोगी की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और समाज में स्वस्थ जीवनशैली एवं स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश पहुंचाएं। आयुर्वेद हमारी विरासत मात्र नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी है, जिसे ज्ञान, करुणा और विज्ञान के साथ आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी का कर्तव्य है।

