नाइटशेड की पड़ताल अब साधना न्यूज पर

0
27

तेवरआनलाईन, पटना

नाइटशेड मीडिया प्रोडक्शंस प्राइवेट लिमिटेड ने एक बार फिर से पड़ताल…
कितना बदला बिहार और कहां पहुंचा झारखंड के साथ धमाकेदार इंट्री ली है
बिहार झारखंड में. दरअसल इसबार नाइटशेड का पूर्व चर्चित कार्यक्रम
पड़ताल साधना न्यूज बिहार झारखंड पर हुआ है गौरतलब है कि यह कार्यक्रम
पहले 50 एपिसोड तक  हमार टीवी पर सफलता पूर्वक प्रसारित हुआ था. नाइटशेड के सुत्रों के अनुसार विजिविलिटी कम होने के कारण ही हमार टीवी से इस कार्यक्रम को उतारा गया .अब नये तेवर और कलेवर के साथ इसे साधना न्यूज चैनल पर सप्ताह में तीन दिन शुक्रवार ,शनिवार और रविवार को रात 8.30 बजे प्रसारित हो रहा है . इसकी शुरुआत 11 मई से हो चुकी है .शुरुआत के तीन एपिसोड बिहार विभाजन पर  और आगे के दो एपिसोड बिहार के इतिहास पर आधारित हैं .

कार्यक्रम के कंटेंट स्क्रिप्ट और वीओ विशेष तौर पर पसंद किया जा
रहा है. इसके बाद के एपिसोड बिहार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर आधारित होंगे.
कार्यक्रम के प्रोजेक्ट हेड मुकेश महान बताते हैं. बिहार में शायद
नाइटशेड पहला प्रोड्कशंस हाउस है जिसने दूसरे निजी सेटेलाइट चैनल पर
सफलता पूर्वक अपनी यात्रा शुरु की है . कंपनी के सीएमडी एकेप्रभात रंजन
कहते हैं कि हमारी कोशिश होगी कि हम और चैनलों पर अपना कार्यक्रम ले कर आएं उन्होंने यह भी कहा कि साधना न्यूज बिहार झारखंड पर ही हम एक और कार्यक्रम सवेरे सवेरे जल्द ही लेकर आ रहे हैं .

कंपनी के पालिटिकल एडिटर प्रमोद दत कहते है कि गहन शोधपर आधारित कार्यक्रम आजकल बहुत कम बनते हैं .लेकिन पड़ताल कितना बदला बिहार ने यह साबित कर दिया कि जब भी अच्छे कार्यक्रम बनेंगे तो लोग उसे पसंद करेंगे ही.

Previous articleग्रामीण भारत की शानदार तस्वीर है ‘कभी तो मिल के सब बोलो’
Next articleआसान नहीं है नेपाल में लोकतंत्र की राह
सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here