पटना में संतोष भट्ट फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट में सीखेंगे छात्र फिल्म निर्माण की बारीकियां

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तेवरआनलाईन, पटना

“फिल्म उद्योग में लगातार 16 साल काम करने के बाद बहुत सारी चीजों को मैंने अपने तरीके से जाना और समझा है। इसके बाद एक सेलेबस तैयार किया है, जो तीन महीने में किसी भी व्यक्ति को फिल्म और सीरियल निर्माण की पूरी जानकारी देगा। फिल्म और सीरियल के निर्माण में प्रयुक्त होने वाले सारे साजो समान हमारे पास है, तो यहां छात्रों को प्रैक्टिकल करने का भी भरपूर मौका मिलेगा। मेरा मानना है कि किसी भी चीज को सीखने के लिए तीन महीने काफी होते हैं,” पटना में संतोष भट्ट फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट की बुनियाद रखने वाले संतोष भट्ट आत्मविश्वास के साथ कहते हैं।

“लोग फिल्म लाइन में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं, लेकिन समझ न होने की वजह से उन्हें काफी परेशानी होती है। ऐसे लोगों को हम फिल्म के हर पहलु से परिचित कराना चाहते हैं ताकि अपनी पसंद के मुताबिक वे इस क्षेत्र में महारात हासिल कर सके। हमारी योजना आने वाले समय में फिल्म उद्योग के क्षेत्र में कुशल लोगों को तैयार करना है, ताकि बिहार में फिल्म उद्योग की नींव मजबूत हो, और यहां के निर्माताओं को कुशल लोगों के लिए बाहर जाने की जरूरत न पड़े,” यह कहते हुये संतोष भट्ट की आंखे चमक उठती है।

बिहार में एक बेहतर फिल्म संस्थान की कमी शिद्दत से महसूस की जा रही थी, फिल्म की पढ़ाई के लिए लोगों को दूसरे सूबों की ओर रुख करना पड़ता था। संतोष भट्ट का योजना फिल्म की समझ को सहज तरीके से लोगों तक पहुंचाने की है। यही वजह है कि लीक से इतर हटकर महाभारत की पृष्ठभूमि में इसका सेलेबस तैयार किया है। महाभारत के हर प्रमुख चरित्र को उन्होंने फिल्म निर्माण के किसी ने किसी खास विधा से जोड़ दिया है। यहां तक संतोष भट्ट के सेलेबस में व्यास जी और गणेश जी भी क्रमश: मुख्य और सहायक स्क्रिप्ट राइटर के तौर पर नजर आते हैं।

“हम शुरुआत ही मूल प्रश्नों से करते हैं, जैसे आखिर इन्सान को लिखने की जरूरत क्यों होती है ? किसी व्यक्ति पर अपनी ओर से कुछ थोपने के बजाय उसके दिमाग को सक्रिय करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। एक बार दिमाग सक्रिय हो जाएगा तो वह अपने तरीके से काम करने लगेगा। लंबे समय तक फिल्म और सीरियल निर्माण के दौरान कई चीजों को विस्तार से विश्लेषण करने का मौका मुझे मिला, और फिर उन चीजों को सहज तरीके से लोगों तक पहुंचाने का मैंने निश्चय किया।,” संतोष भट्ट कहते हैं।

“बिहार में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, मेरी कोशिश इन प्रतिभाओं को बस निखारने की है ताकि बिहार में फिल्म उद्योग समृद्ध हो। लोगों को काम के लिए बाहर न जाना पड़े। मैं कोशिश करूंगा कि भविष्य में बिहार सरकार ऐसी फिल्मों को प्रोत्साहित करे जिसकी 60 प्रतिशत शूटिंग बिहार व झारखंड में हई हो। यहां माहौल तेजी से बदल रहा है, फिल्म निर्माण के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है, लेकिन इस क्षेत्र में कुशल लोगों की कमी महसूस की जा रही है। हमारी कोशिश इस गैप को खत्म करना है। हमारी फैकेल्टी टीम में मुंबई के कई जानी मानी हस्तियां हैं, जो छात्रों को फिल्म निमार्ण से जुड़ी हर पहलुओं की संपूर्ण जानकारी देने में सक्षम है।”

संतोष भट्ट फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट में स्क्रिप्ट लेखन पढ़ाने की जिम्मेदारी संतोष प्रसाद पर है। संतोष प्रसाद कहते हैं, बेहतर अभिनय करने वाले कई लोग उत्साह में आकर मुंबई तो चले जाते हैं लेकिन उन्हें कैमरा के सामने अभिनय करने का अनुभव नहीं होता है, जिसकी वजह से उन्हें काफी मुश्किलें पेश आती है। कैमरा के सामने संवाद अदायगी एक महत्वपूर्ण विद्या है, फिल्म या सीरियल में अभिनय करने वालों के लिए यह जरूरी है कि कैमरा के सामने उनका झिझक टूटे। हम स्क्रिप्ट लेखन में संवाद लिखने के साथ साथ कैमरा के सामने उनकी अदायगी का तरीका भी बताते हैं। इसी तरह अभिनय सीखाने की जिम्मेदारी राज वर्मा ने संभाल रख है। साउंड एडिटिंग और सिनेमेटोग्राफी की क्लास क्रमश: अखिलेश और रंजन झा लेंगे। और विडियो एडिटिंग के हुनर की जानकारी छात्रों को अवध नारायण सिंह देंगे। डायरेक्शन की बारीकियों की जानकार स्वय संतोष भट्ट देंगे।

“मेरी योजना सीरियल बनाने की है। इसके लिए जरूरी है कि पहले एक अच्छी टीम तैयार हो जाये। जो छात्र यहां आएंगे उन्हें ही इसके लिए तैयार किया जाएगा। और एक बार जब वे सबकुछ सीख लेंगे तो सीरियल निर्माण की जिम्मेदारी पूरी तरह से उन्हें सौंप दी जाएगी। हम काम करने में यकीन रखते हैं, और इस काम में पटना में कई लोगों का सहयोग भी हमें मिल रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो वह दिन दूर नहीं जब बिहार में खुद अपने पैरों पर खड़ा हो जाएगा। अभी तो जरूरत है इस क्षेत्र में कुशल लोगों को तैयार करने की, जो हम पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं।”

बहरहाल पटना में संतोष भट्ट फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट को लेकर छात्रों में उत्साह देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में छात्र इसमें दाखिला ले रहे हैं, जिससे संतोष भट्ट का आत्मविश्वास और बढ़ गया है। संतोष भट्ट की योजना उत्तर भारत के हर छोटे बड़े शहर में संतोष भट्ट फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट का ब्रांच खोलने की है। और उन्हें यकीन है कि इससे फिल्म निर्माण के क्षेत्र में रुची रखने वाले लोगों को लाभ मिलेगा।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

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  1. इस तरह की उमदा सोच के लिए भट्ट साहब को ढेरों बधाईयां…इतना जोखिम उठाकर पटना को मुंबई की फिल्मी दुनिया सौंपना सचमुच काबिल-ए-तारीफ है…हमारा भी सहयोग ऐसे व्यक्तित्व के साथ हमेशा बना रहेगा….

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