प्रसिद्ध साहित्यकार व चित्रकार डा. कुमुद ललित का निधन

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डा. कुमुद ललित
डा. कुमुद ललित

तेवरआनलाइन, पटना

पटना । बिहार के प्रसिद्ध कवि, चित्रकार व साहित्यकार डॉ ललित कुमुद का देहांत आईजीआईएमएस में इलाज के दौरान 4 अप्रैल 2012 (बुधवार) की सुबह 1 बजकर 30 मिनट पर हो गया। वे करीब 66 वर्ष के थे। कुमुद जी का जन्म 8 अगस्त 1946 को हुआ था। वे मूल रूप से मधुबनी जिला के अंधरा गांव के रहने वाले थे। कुमुद जी सीआईडी के रिटायर्ड फोरेंसिक साइंस एक्सपर्ट थे। इसके साथ ही वे हिन्दी और मैथिली साहित्य के विद्वान भी थे। कुमुद जी एक बढ़िया कवि व चित्रकार थे। इनके बनाये गए चित्र आज भीसरकारी और गैर सरकारी भवनों में लगे हैं। इनकी लिखी किताब ‘कला और छायाचित्र’ को लोगों ने काफी सराहा।  मैथिली की पहली फिल्म “ममता गाबय गीत” में और हिन्दी फिल्म “ज्योति बने ज्वाला” में बतौर कला निर्देशक काम किया था।हिन्दी फिल्म खंडहर से भी ये जुड़े रहे थे इसके साथ ही कुमुद जी ने करीब चार दर्जन किताबों का कवर भी डिजायन  किया था।

कुमुद जी ने अपने पीछे एक भरा पूरा परिवार छोड़ा है, जिसमें पत्नी अपराजिता कुमुद, पुत्र अनुराग अभिनव, अभिषेक अलंकार, पुत्री अनामिका प्रियदर्शनीऔर श्रेया हैं। कुमुद जी को मुखाग्नि उनके ज्येष्ट पुत्र अनुराग अभिनव ने गुलबी घाट पर दिया। दिवंगत आत्मा की शांति हेतु आर्य समाज पद्धति के अनुसार श्राद्ध कर्म उनके आवास- डी 1 फस्ट फ्लोर, अभियंता नगर, आसियाना नगर पोस्ट ऑफिस के पास होगा।  दिनांक 5 अप्रैल से 7 अप्रैल शाम 4 बजे से होम और हवन का अनुष्ठान किया जाएगा ।

कुमुद जी के निधन पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि कुमुद जी के निधन से कला, चित्रकला एवं साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। मुख्यमंत्री के साथ ही परिवहन एवं सूचना व जनसंपर्क मंत्री वृषिण पटेल, कला संस्कृति मंत्री डॉ सुखदा पाण्डेय, डॉ अनिल सुलभ, प्रसिद्ध चित्रकार श्याम शर्मा, आचार्य आनंद किशोर शास्त्री, पं. शिवदत्त मिश्र, बलभद्र कल्याण, नृपेन्द्र ऩाथ गुप्त, डॉ नरेश पांडेय चतुर नाइटशेड के चेयरमैन एके प्रभात रंजन , बरिष्ठ पत्रकार मुकेश महान, प्रमोद दत्त, श्रवन कुमार ,महिला संगठन की संचालिका नीता सिन्हा आदि ने भी शोक संवेदना व्यक्त की।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

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