लुबना (फिल्म स्क्रीप्ट- 3)

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               Scene -8

Character- Dhusar and Manku

Ext/day/ In front of Mhakal besides Shamshan

(धूसर एक एक पेड़ के नीचे महाकाल की प्रतिमा के सामने हाथ जोड़कर बैठा हुआ है, सामने शराब की एक बोतल रखी हुई है।)

               धूसर

(हाथ जोड़े हुये) देख महाकाल, हमनी के पेट के सवाल है….और फिर तोरा भी चढ़ावा चाहिये….जेतना आदमी  लाओगे, ओतना बोतल पक्का…एकाध बार छोड़कर के इ हिसाब में कोई गड़बड़ी नहीं हुई…(बोतल को उठाते हुये) देखो अभी दू ल्हास आया त हम एक बोतल लेके पहुंच गये…इ में कौनो गुस्सा होने की बात नहीं है….एक बार में एक ही बोतल पीओगे ना….दू चार ल्हास आज और ला दो….रात में पूरा परिवार तुम्हारे चरण में होगा….

(मनकु हांफते हुये धूसर के पीछे आकर खड़ा हो  आता है)

             मनकु

धूसर….(हांफते हुये)

             धूसर

(बिगड़ते हुये, बिना उसकी ओर देखे) देख नहीं रहा महाकाल से बात कर रहा हूं….

              मनकु

(अपने उखड़े हुये सांस पर काबू पाते हुये)

अभी-अभी दो ल्हास आया है

             धूसर

(महाकाल से)…जय महाकाल….ऐसे ही कृपा बनाये रखो….

(बोतल की आधी शराब महाकाल पर उड़ेल देता है, फिर मनकु की ओर मुड़ता है, और बोतल में से ही तीन चार लंबे-लंबे घूंट मारता है,)

             धूसर

(मनकु की ओर बोतल बढ़ाते हुये)

प्रसाद लो….

(मनकु बोतल हाथ में लेकर दो घूंट मारता है और घोड़े की तरह हिनहिनाता है, धूसर उसके हाथ से बोतल लेकर एक ओर बढ़ जाता है)

                धूसर

(दो घूंट गटकने के बाद) बिना प्रसाद के ल्हास के पास जाने की हिम्मत नहीं होती….

(वह आगे बढ़ जाता है, और मनकु उसके पीछे-पीछे भागता है)

                               कट टू….

               Scene -9

Character-शंभू, लुबना और सुखु

Ext/evening/ In front of hut

(शंभू खादी वाला जैकेट पहनकर झोपड़ी के सामने एक बड़े से हांडी में मांस पका रहा है। सुखु उसके पास बैठा हुआ है।)

                शंभू

(हांडी में कलछुल को चलाते हुये) धीरे-धीरे पकावे पर इ सिद्ध होगा….

                 सुखु

अभी-अभी दू गो ल्हास घाट पर आया है….आज महाकाल के प्रसाद की कमी नहीं होगी….दू बोतल तो पक्का है…

(लुबना एक कटोरे में मसाला लेकर आती है, और कटोरा शंभू की ओर बढ़ा देती है। )

                 शंभू

(कटोरा को उसके हाथ से लेते हुये)

जनानी को अपना दिमाग ठंडा रखना चाहिये….

(लुबना बिना कुछ बोले ही चली जाती है।)

               सुखु

जैकेट उतार दीजीये….मसाला लग जाएगा…

              शंभू

(कटोरा पकड़े हुये) मेरा हाथ तो गंदा है…तुम उतारो…

                सुखु

(शंभू के शरीर से जैकेट उतारते हुये) मैं भाग के गया हूं…और धूसर के साथ प्रसाद लेकर आया…

(वह जैकेट  पहनते हुये एक ओर भागता है)

                शंभू

(चिल्लाते हुये) भुतनी के… जैकेट क्यों ले जा रहा है…रख इधर…

                सुखु

 (पलटकर पीछे से दौड़ते हुये) ….बस अभी गया और अभी आया…

                               कट टू….

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