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जश्न-ए-सलीमान : सलमान खान के 60वें जन्मदिन पर कला के ज़रिये विरासत और स्टारडम का उत्सव

अमरनाथ, मुंबई

बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान के 60वें जन्मदिन के विशेष अवसर पर “जश्न-ए-सलीमान” शीर्षक से एक भव्य कला प्रदर्शनी का आयोजन मुंबई प्रेस क्लब मुंबई में किया जा रहा है। यह प्रदर्शनी केवल चित्रों का संग्रह नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की एक जीवित विरासत को रंगों और कैनवास पर उतारने की एक कलात्मक कोशिश है।

इस विशेष कला प्रदर्शनी में लेखक सलीम खान और सलमान खान के जीवन, रचनात्मकता और स्टारडम के साथ-साथ उनके वंश, खानदान, सांस्कृतिक जड़ें और पारिवारिक विरासत को पेंटिंग्स और मिनिएचर के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। स्वात घाटी (पाकिस्तान – अफगानिस्तान बॉर्डर) से लेकर मायानगरी मुंबई तक का ये सफ़र, कला के रूप में दर्शकों के सामने जीवंत होता है।

प्रदर्शनी की पेंटिंग्स सलीम खान की लेखनी से उपजी संवेदनाओं, उनके विचारों और उस सिनेमा को श्रद्धांजलि हैं जिसने भारतीय दर्शकों को भावनाओं की गहराई से परिचित कराया। वहीं दूसरी ओर, सलमान खान के स्टारडम, उनके जन-सरोकार और पॉपुलर कल्चर पर प्रभाव को भी कलात्मक रूप में दर्शाया गया है।

इस विशेष कला प्रदर्शनी का आयोजन पत्रकार और लेखक जसीम खान और समकालीन भारतीय कलाकार इमरान खान द्वारा किया गया है। जसीम इससे पूर्व आजतक, एबीपी न्यूज़ और ज़ी न्यूज़ जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं। वे सलमान खान की चर्चित जीवनी ‘बीइंग सलमान’ के लेखक भी हैं। वहीं इमरान खान कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कला प्रदर्शनियों में सहभागिता कर चुके हैं और समकालीन भारतीय कला जगत में एक विशिष्ट पहचान रखते हैं।

“जश्न-ए-सलीमान” एक दृश्य कविता की तरह है—जहाँ विरासत रंगों में ढलती है, कहानियाँ कैनवास पर सांस लेती हैं और सिनेमा, संस्कृति व परिवार एक साथ संवाद करते हैं।

यह प्रदर्शनी कला प्रेमियों, इतिहास में रुचि रखने वालों, मीडिया प्रतिनिधियों और सिनेमा को एक सांस्कृतिक दस्तावेज़ के रूप में देखने वाले दर्शकों के लिए एक अनू

ठा अनुभव होगी।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

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