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57 अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में डंका बजाने के बाद दोस्त ए फ्रेंड शॉर्ट फिल्म यूट्यूब पर प्रदर्शित

अमरनाथ, मुम्बई

कम संसाधनों में शॉर्ट फिल्म बॉलीवुड में नए निर्देशकों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक बड़ा माध्यम बन गया है । और शॉर्ट फिल्म का अपना एक दर्शक वर्ग भी है । खासकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिल्म फेस्टिवल कलाकारों निर्देशकों को अपनी पहचान बनाने का सुनहरा मौका भी देता है । इसी का एक ताजा उदाहरण है दर्शन सर्व प्रियदर्शी के निर्देशन में बनी शॉर्ट फिल्म दोस्त ए फ्रेंड । जो तकरीबन 57 वर्ल्ड फिल्म फेस्टिवल में अवॉर्ड जीतकर डंका बजा चुकी है । जिसे अब गणेश चतुर्थी के अवसर पर दर्शकों के लिए प्रदर्शित कर दिया गया है । जिसे दर्शकों का काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है ।

बॉलीवुड में बतौर मेक अप आर्टिस्ट के रूप में कई वर्षों से सक्रिय निर्देशक दर्शन सर्व प्रियदर्शी रंगमंच से भी गहराई से जुड़े रहे हैं और बॉलीवुड में बतौर निर्देशक भी अपनी पारी की शुरुआत की है, और अपने इस शॉर्ट फिल्म से अपने दम खम का शानदार प्रदर्शन किया है। 74 अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल से सलेक्ट होने के बाद 57 फेस्टिवल में अवॉर्ड जीतकर निर्देशक दर्शन सर्व प्रियदर्शी अपनी रचनात्मक सोच और अपनी प्रतिभा साबित करने में पूरी तरह से सफल दिख रहे हैं ।

सर्व प्रिय दर्शी फिल्म के बैनर तले बनी इस फिल्म के निर्देशन के साथ साथ निर्माण भी उन्होंने ही किया है । विश्वनाथ के शेट्टी द्वारा लिखित शॉर्ट फिल्म की कहानी बच्चों और गिरगिट पर केंद्रित है । जो एक घटनाक्रम में बच्चों का दोस्त बन जाता है । लेकिन गिरगिट की तस्करी वालों की नजर उस गिरगिट पर होती है ।जिसे बच्चे तस्कर से बचाने में कामयाब होते हैं ।फिल्म में एनिमल की सुरक्षा का एक बड़ा संदेश भी दिया गया है ।

फिल्म में प्रमुख भूमिका निभानेवाले कलाकार शरत सोनू , मणिकांत साह, गिरीश, मधु रावत, हर्ष सुथर, कृष यादव, चैताली बाघेला, शिवराज शेट्टी, शंभू राणा, देवेंद्र प्रतिपण और विश्वनाथ के शेट्टी ने अपने शानदार अभिनय से फिल्म को एक मुकाम देने में कामयाब रहे हैं । फिल्म का निर्देशन काफी सशक्त है ।फिल्म के सिनेमेटोग्राफर राजू आर कुमार, चंद्रिका प्रसाद, एडिटर राहुल तिवारी तथा इकबाल दरबार का संगीत भी प्रभावशाली है ।
फिल्म को निर्देशक के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल सर्वप्रिय दर्शी पर देखा जा सकता है ।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

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