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मुंबई में कला और कानून का अनूठा संगम, 100 कलाकृतियों की प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र

देशभर के आठ कलाकारों की पेंटिंग्स का प्रदर्शन, साइबर सुरक्षा और डिजिटल वित्तीय साक्षरता पर भी हुई विशेष चर्चा

अमरनाथ, मुंबई: कला, संस्कृति और कानूनी जागरूकता के अनूठे संगम के रूप में मुंबई के प्रभादेवी स्थित पी.एल. देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी में ‘आर्ट एग्जिबिशन 2026: ए सेलिब्रेशन ऑफ कलर्स एंड क्रिएटिविटी’ का आयोजन किया गया। 27 अक्टूबर से 2 नवंबर तक चली इस सप्ताहव्यापी प्रदर्शनी में देशभर के आठ कलाकारों की करीब 100 मौलिक कलाकृतियां प्रदर्शित की गईं।

इस प्रदर्शनी का संयुक्त आयोजन IMACC (ICCAA की पहल) और राजस्थान की रेनबो पैलेट आर्ट अकादमी की ओर से किया गया। खास बात यह रही कि कला की विविध विधाओं और रचनात्मक अभिव्यक्तियों के साथ साइबर सुरक्षा, साइबर कानून और डिजिटल वित्तीय साक्षरता जैसे समसामयिक विषयों को भी आयोजन का हिस्सा बनाया गया।

उद्घाटन समारोह में राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अकील कुरैशी और न्यायमूर्ति एस.एस. शिंदे, बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश डी. धनुका, बॉम्बे हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति साधना एस. जाधव तथा राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अशोक कुमार गौड़ सहित कई गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं। नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (एनजीएमए), मुंबई की निदेशक निधि चौधरी, महाराष्ट्र कला अकादमी की निदेशक मीनल जोगलेकर और लोढ़ा फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. मंजू लोढ़ा भी समारोह में शामिल हुईं।

ICCAA के अध्यक्ष एवं नेशनल काउंसिल फॉर लीगल अवेयरनेस के प्रमुख सुनील ज़ोडे तथा UDAN के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कार्यक्रम की मेजबानी की। रेनबो पैलेट आर्ट अकादमी के संस्थापक संत कुमार ने राजस्थान के कलाकारों को राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराने की पहल की। प्रदर्शनी का क्यूरेशन इंदु गौड़ ने किया, जबकि मुंबई विश्वविद्यालय के विधि विभाग की प्रमुख प्रो. (डॉ.) राजेश्री वरहाडी ने अकादमिक मार्गदर्शन प्रदान किया।

कला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का माध्यम
उद्घाटन समारोह में न्यायमूर्ति अकील कुरैशी ने कहा कि कला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का महत्वपूर्ण माध्यम है। कलाकारों की व्यक्तिगत पसंद, कल्पनाशीलता और रचनात्मकता का सम्मान किया जाना चाहिए। वहीं, न्यायमूर्ति एस.एस. शिंदे ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि अदालती फैसले बदले जा सकते हैं, लेकिन इन चित्रों को नहीं। न्यायमूर्ति साधना जाधव ने कहा कि कला हमें कानून की सीमाओं से आगे बढ़कर जीवन के सौंदर्य और रचनात्मकता को समझने का अवसर देती है।

‘कॉस्मिक शिवा’ और मां काली की कलाकृति ने खींचा ध्यान
प्रदर्शनी में शिवानी भदौरिया की कलाकृति ‘कॉस्मिक शिवा’ विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसमें भगवान नटराज को छह भुजाओं के साथ ब्रह्मांडीय पृष्ठभूमि में चित्रित किया गया है। वहीं, श्रीकांत गोस्वामी की कोयले से तैयार मां काली की कलाकृति ‘रैथ ऑफ द डिवाइन’ ने भी दर्शकों को प्रभावित किया।

इसके अलावा भगवान गणेश, श्रीनाथजी और भगवान कृष्ण के चित्रों के साथ शास्त्रीय नृत्यांगना तथा ग्रामीण राजस्थान के बुजुर्ग के चित्र भी प्रदर्शित किए गए। प्रदर्शनी में ऑयल, एक्रेलिक, चारकोल, वॉटरकलर और मिक्स्ड मीडिया सहित विभिन्न कला माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।

साइबर सुरक्षा और डिजिटल वित्तीय साक्षरता पर मंथन
प्रदर्शनी के दौरान आयोजित विशेष परिचर्चा में डिजिटल भुगतान, यूपीआई, ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, फर्जी निवेश योजनाओं और डीपफेक जैसी उभरती चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल युग में वित्तीय साक्षरता साइबर धोखाधड़ी से बचाव का महत्वपूर्ण माध्यम है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और डिजिटल सेवाओं के नए उपयोगकर्ताओं को जागरूक करने की जरूरत है।

परिचर्चा में आईटी एक्ट, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण व्यवस्था और नए आपराधिक कानूनों के संदर्भ में डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण, साइबर फॉरेंसिक और त्वरित न्याय की चुनौतियों पर भी विचार रखे गए। वक्ताओं ने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालयों, कानूनी जागरूकता शिविरों और संस्थागत कार्यक्रमों में साइबर कानून एवं डिजिटल वित्तीय सुरक्षा को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।

आयोजकों के अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य केवल कलाकारों को मंच उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि कला और संस्कृति के माध्यम से सामाजिक सरोकारों तथा कानूनी जागरूकता को भी प्रोत्साहित करना था। इस तरह मुंबई की यह प्रदर्शनी रचनात्मकता, सांस्कृतिक विविधता और समकालीन सामाजिक चुनौतियों पर संवाद का साझा मंच बनी।

editor

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