केजरीवाल होने का मतलब, जो मुझे लगता है !

नवल शर्मा, प्रवक्ता , जनता दल युनाइटेड।

आज से तक़रीबन दो साल पहले अरविन्द केजरीवाल के दिल्ली में कौशाम्बी स्थित उनके गिरनार अपार्टमेंट वाले फ्लैट में लगभग आधे घंटे की निजी मुलाकात हुई थी .एक मेरे छोटे भाई तुल्य मित्र ने मेरे लिए उनसे समय लिया था . तब से मैं उस व्यक्ति का प्रशंसक हूँ . दुनिया चाहे लाख गाली दे पर उनके प्रति मेरी सोंच एकदम स्पष्ट है . —-जब मैं उनके फ्लैट में पहुंचा तो उनकी बच्ची ने नमस्ते अंकल कहते हुए फ्लैट का ग्रिल खोला . भीतर गया. ड्राइंग रूम में बैठा. इधर उधर नज़र घुमाया. ड्राइंग रूम के कोने में उनके बाबूजी लुंगी और गंजी में कंप्यूटर पर बैठे काम करते दिखाई दिए. अपने काम में मशगुल. बेंत का सोफा . सामने दीवाल पर सस्ती वाली पेंटिंग .

मैं उस घर में पैसा सूंघ रहा था.पर नहीं सूंघ पाया. तभी केजरीवाल पैजामा और गंजी में मुड़ा तुड़ा कुरता पहनते हुए वहां आये और गर्मजोशी से स्वागत किया. बैठने के तीन -चार मिनट के अन्दर ही उनकी पत्नी ट्रे में चाय – बिस्कुट लेकर आयीं ——बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ आधे घंटे की मुलाकात में लगभग 20 मिनट तक मैं बक बक करता रहा. अरविन्द बड़ी तल्लीनता से मेरी बातों को सुनते रहे बाद में विचार किया तो लगा कि भई ये आदमी जितना शानदार वक्ता है उससे ज्यादा धैर्यवान श्रोता मैं उन्हें उनके आन्दोलन की कमियों और मजबूत करने के उपायों के बारे में धाराप्रवाह बताता रहा —लगभग बीस मिनट के बाद उनका मुँह खुला और उन्होंने मुझे अपने साथ आने के लिए कहा मैंने विनम्रता से जवाब दिया कि सर मैं अपने नेता का कट्टर सेवक हूँ और राजनीतिक फायदे के लिए दल बदलना मेरी शब्दावली में राजनीतिक वेश्यावृति के तुल्य है और मेरा संस्कार मेरे पूरे जीवन में कभी भी इसकी इजाजत नहीं देगा —पर मैं दिल से चाहता हूँ कि आपका आन्दोलन सफल हो —-भारतीय राजनीति जाहिल और बेलुरे नेताओं की काली कोठरी में छटपटा रही है —आप जैसी ताकतें सफल हों यह मेरी इमानदार कामना है और आप जिस काम को व्यवस्था से अलग रहकर कर रहे हैं वही काम नीतीश जी व्यवस्था का अंग बनकर कर रहे हैं .
खैर, मुलाकात ख़त्म हुई . मैं बाहर निकला. जब तक मैंने अपना जूता नहीं पहन लिया, अरविन्द वहीँ खड़े रहे . उस आदमी के बड़प्पन से मन गिला हो गया. पूरा परिवार -बाल – बच्चा , पत्नी सब लोग ग़जब संस्कारी —-सेलेब्रिटी का परिवार होने का रत्ती भर भी गुमान नहीं भाई –क्या बताएं –दुआ-सलाम के बाद चल दिए वहां से. आज से छह महीने पहले तक उनसे फ़ोन पर भी बात होते रहती थी. पर अब वो नंबर दुर्भाग्यवश डिलीट हो गया. मुझे भी आवश्यकता महसूस नहीं हुई.
विरोधियों की नज़र में अरविन्द महत्वाकांक्षी हों, भ्रष्ट हों, अवसरवादी हों पर मेरी नज़र में वो एक ऐसे आदमी हैं जो भ्रष्ट नेताओं की आँखों की किरकिरी हैं. बेचारा निरीह आदमी ! री भ्रष्ट जमात हाथ धोके उके पीछे पड़ी है. सब उसे चोर और भगोड़ा बताने में लगे हैं. परी लुटेरी जमात उसके खिलाफ गोलबंद है. मैं जानता हूँ वो अकेला चना भांड नहीं फोड़ पायेगा. दुर्भाग्य है. और ये बुद्धि के बल पर समाज को दिशा दिखाने वाले बुद्धिजीवी भी लगता है सत्ता के क्रीतदास हो गए हैं. पर मैं जानता हूँ, अरविन्द साहसी हैं, औरों जैसे नहीं हैं, और मैं सदैव प्रार्थना करूँगा कि अरविन्द आप जैसे लोग सफल हों !

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
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