घूस के लिए चंदा जुटा रहे हैं विधायक, इस्तीफा भी देंगे

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रंजीत रंजन सिंह//
औरंगाबाद (बिहार)। सोमप्रकाश इसी वादे पर ओबरा के विधायक चुने गए थे कि किसी को घूस नहीं देनी होगी। लेकिन आजकल वे घर-घर जाकर चंदा मांग रहे हैं ताकि घूस दी जा सके। उन अधिकारियों को जिन्होंने रिश्वत न दिए जाने पर लगभग 20 सरकारी राशन दुकानों का लाइसेंस निरस्त कर दिया। मुख्यमंत्री से शिकायत पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। सिस्टम से हताश सोमप्रकाश  अब इस्तीफा देने जा रहे हैं।

तीन साल पहले पुलिस सब-इंस्पेक्टर के पद से इस्तीफा देकर उन्होंने बतौर निर्दलीय विधानसभा चुनाव जीता। उनका नारा था – न घूस लो और न दो। इससे बहुत से लोग प्रभावित हुए। 45 वर्षीय रामजी यादव भी उनमें से एक थे। वे जमुआंवा गांव में सरकारी राशन की दुकान चलाते थे। जिला आपूर्ति अधिकारी को बीपीएल के लिए मिलने वाले प्रति क्विंटल गेहूं पर 40 रुपया कमीशन देने से उन्होंने इंकार कर दिया। अधिकारी ने कोटा ही रोक दिया। सोमप्रकाश ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शिकायत की। उन्होंने खाद्यमंत्री श्याम रजक से जांच को कहा। जांच पूरी होती इससे पहले ही अधिकारियों ने दुकान का लाइसेंस कैंसिल कर दिया। निराश रामजी ने बतौर सिक्योरिटी जमा किए 70 हजार
रुपए मांगे तो रिफंड के लिए 20 हजार की घूस मांगी गई। आज उनके पास इंजीनियरिंग पढ़ रहे बेटे की फीस तक के पैसे नहीं हैं।

खर्च लेते हैं मजदूर जितना ।

नौकरी छोड़ने के बाद सोमप्रकाश ने नौजवान सभा का गठन किया। उन्हें मिलने वाला 55 हजार प्रतिमाह वेतन इसी सभा के खाते में जाता है, जिसे दस लोगों की समिति ऑपरेट करती है। उन्हें खर्च के लिए मिलते हैं सिर्फ 3600 रुपए , मनरेगा में मिलने वाली मजदूरी जितना। पेट्रोल से लेकर मोबाइल बिल तक का हिसाब वे सभा को देते हैं। विधायक निवास में उनके परिजनों के रहने की मनाही है। औरंगाबाद जिले के दाउदनगर कस्बे की गलियों के बीच दो कमरे का मकान ही उनका ठिकाना है। कमरे में एक चौकी, एक टेबल और चार-पांच
कुर्सियां हैं। यह उनका बेडरूम-कम-ड्राइंगरूम है। अंदर पत्नी-बच्चों के
लिए एक कमरा और है। सोफा, फ्रिज और टीवी नहीं हैं। वे कहते हैं कि यहां बैठने की जगह कम है। इसलिए सामने के पीपल के पेड़ के नीचे बैठक जमती है।

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