
एम्स पटना में अत्याधुनिक IVUS तकनीक की शुरुआत, जटिल हृदय रोगों के इलाज में मिलेगी नई मजबूती
पटना 11 मई 2026
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पटना के कार्डियोलॉजी विभाग में अब अत्याधुनिक हाई-डेफिनिशन इंट्रावास्कुलर अल्ट्रासाउंड (IVUS) तकनीक के माध्यम से हृदय रोगियों का अधिक सटीक और सुरक्षित उपचार संभव हो सकेगा। संस्थान के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने शनिवार को नई IVUS प्रणाली का औपचारिक उद्घाटन किया। इस तकनीक की स्थापना को एम्स पटना में प्रिसीजन बेस्ड कार्डियक केयर की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार IVUS एक उन्नत इंट्राकोरोनरी इमेजिंग तकनीक है जो हृदय की धमनियों के भीतर से रियल टाइम और हाई रेजोल्यूशन इमेज उपलब्ध कराती है। सामान्य एंजियोग्राफी में जहां केवल रक्त प्रवाह और ब्लॉकेज का बाहरी आकलन संभव होता है वहीं IVUS धमनियों की आंतरिक संरचना, ब्लॉकेज की गंभीरता, प्लाक की प्रकृति, कैल्शियम की मात्रा तथा रक्त वाहिका के वास्तविक आकार की विस्तृत जानकारी देता है। इससे चिकित्सकों को एंजियोप्लास्टी के दौरान सही आकार का स्टेंट चुनने और उसे अधिक सटीक तरीके से प्रत्यारोपित करने में सहायता मिलती है।
कार्डियोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो.(डॉ.) अनुपम भंभानी ने बताया कि IVUS गाइडेड पीसीआई (Percutaneous Coronary Intervention) तकनीक विशेष रूप से जटिल कोरोनरी आर्टरी डिजीज, लेफ्ट मेन डिजीज, मल्टी वेसल ब्लॉकेज, लंबे एवं कैल्सीफाइड ब्लॉकेज तथा बार बार स्टेंट ब्लॉकेज जैसी जटिल स्थितियों में अत्यंत उपयोगी मानी जाती है। इस तकनीक के उपयोग से प्रक्रिया की गुणवत्ता बेहतर होती है, स्टेंट फेलियर और पुनः ब्लॉकेज की संभावना कम होती है तथा मरीजों के दीर्घकालिक उपचार परिणामों में सुधार देखने को मिलता है।
उद्घाटन अवसर पर प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि एम्स पटना लगातार ऐसी अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीकों को संस्थान में शामिल कर रहा है जिससे बिहार एवं पूर्वी भारत के मरीजों को अपने राज्य में ही विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को अब जटिल हृदय उपचार के लिए दिल्ली, मुंबई या अन्य बड़े महानगरों की तरफ जाने की आवश्यकता नहीं होगी जिससे समय और आर्थिक बोझ दोनों में ही राहत मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि नई IVUS प्रणाली केवल मरीजों के उपचार तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि यह शोध और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। डीएम कार्डियोलॉजी के विद्यार्थियों एवं युवा इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट को अब अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित एडवांस इमेजिंग गाइडेड प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण संस्थान में ही प्राप्त होगा। इससे भविष्य में बेहतर प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैयार करने में मदद मिलेगी।
एम्स पटना में पिछले कुछ वर्षों में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। नई IVUS तकनीक के जुड़ने से अब जटिल हृदय रोगों के उपचार में संस्थान की क्षमता और अधिक मजबूत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुविधा बिहार के हजारों हृदय रोगियों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकती है। एम्स पटना ने इस नई उपलब्धि के साथ एक बार फिर यह संदेश दिया है कि आधुनिक, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाना ही संस्थान की प्राथमिकता है।
