पहला पन्ना

“समकालीन युग में संवैधानिक न्यायशास्त्र की पुनर्कल्पना” विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न

अमरनाथ, मुंबई। National Stock Exchange of India Limited के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित ऑडिटोरियम में “समकालीन युग में संवैधानिक न्यायशास्त्र की पुनर्कल्पना” विषय पर एक भव्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम Indian Chamber of Commerce for Affirmative Action द्वारा आयोजित तथा Department of Law, University of Mumbai के सहयोग से संपन्न हुआ।
यह सम्मेलन महात्मा ज्योतिराव फुले एवं B. R. Ambedkar की जयंती सप्ताह के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसमें देश-विदेश से 300 से अधिक प्रतिनिधियों—जिनमें न्यायाधीश, विधि विशेषज्ञ, शिक्षाविद, शोधकर्ता एवं विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवर शामिल थे—ने भाग लिया।
कार्यक्रम में Justice Prasanna Varale (सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश) ने मुख्य अतिथि एवं कीनोट वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए समकालीन संवैधानिक मुद्दों पर गहन विचार प्रस्तुत किए। समापन सत्र में Justice Sadhana Sanjay Jadhav ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार साझा किए।
सम्मेलन की अध्यक्षता Ashish Chauhan, प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एनएसई द्वारा की गई। आयोजन के प्रमुख सूत्रधार Sunil Zode रहे। इस अवसर पर Rajeshri Tara Narayan Varhadi, K. N. Pimple, Parveen Rani एवं Srinivasan K. Rao सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
उद्घाटन सत्र में राष्ट्रगान, दीप प्रज्वलन, स्वागत भाषण, पुस्तक विमोचन तथा ICCAA आइकन अवॉर्ड्स 2025 का वितरण किया गया। इसके पश्चात विभिन्न तकनीकी सत्रों में ऑफलाइन एवं ऑनलाइन माध्यम से शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें संवैधानिक कानून के समकालीन विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।
समापन सत्र में प्रेरक संबोधन, पुरस्कार वितरण एवं धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ। उल्लेखनीय है कि Arjun Ram Meghwal, जिन्हें उद्घाटन सत्र का मुख्य अतिथि निर्धारित किया गया था, वे कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके।
National Stock Exchange of India Limited ने वेन्यू पार्टनर के रूप में उत्कृष्ट व्यवस्थाएं प्रदान कर कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह सम्मेलन संवैधानिक न्यायशास्त्र के क्षेत्र में समकालीन चुनौतियों एवं संभावनाओं पर सार्थक संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ।

editor

सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button