दलित, महादलित के घोर विरोधी है नीतीश कुमार : लोजपा

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तेवरऑनलाईन, पटना

दलित, महादलित के घोर विरोधी है नीतीश कुमार। अपने साढ़े 8 वर्षों के शासन काल में नीतीश कुमार ने सिर्फ दलितों का अहित किया है। गाँव की बात छोड़ दीजिये। सरकार में पदस्थापित दलित पदाधिकारियों को चुन-चुन कर परेषान किया है। यह बात आज लोजपा के प्रदेश महासचिव विष्णु पासवान ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है। उन्होंने कहा कि बिहार पुलिस सेवा के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सामान्ती मानसिकता, उदासिनता और लापरवाही के कारण 36 वर्षों तक दलित कर्मचारी को न तो पदोन्नति मिली और न ही एसीपी का लाभ मिला उदाहरण स्वरूप 1976 बैच में दारोगा के पद पर सिधी नियुक्ति के अर्न्तगत पीसी राम नामक व्यक्ति कार्यरत हुआ था और 01 अप्रैल 2010 को सेवा निवृत भी हो चुका। इस बीच पुलिस सेवा में कार्यरत कर्मचारी  राम का न तो पदोन्नती हुई और न ही पुरे सेवा काल के दौरान ए.सी.पी. का लाभ मिला। यह सामन्ती मानसिकता का परिचायक है। पुलिस उप महानिरीक्षक कोषी प्रक्षेत्र सहरसा ने अपने कार्यालय के ज्ञापंन सं0- 390 सामान्य शाखा दिनांक- 20.06.2009 को अनुशासित कर पुलिस मुख्यालय, पुलिस उपमहानिरीक्षक (कार्मिक) बिहार पटना को भेजा। उस समय आरक्षी महानिरीक्षक ने पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर राम का सर्विस बुक अप्राप्त दिखाकर आयोग्य घोषित कर दिया जबकी राम का सर्विस बुक पुलिस उप महानिरीक्षक सहरसा के कार्यालय का ज्ञापांक सं0- 335 सामान्य शाखा दिनांक- 22.05.2009 को ही पुलिस अवर निरीक्षक से पदोन्नती के संबंध में पुलिस मुख्यालय में उपलब्ध था। पदोन्नती के संबंध में श्री राम को दी गई सजा की अवधि की तिथि से जोड़कर आयोग्य घोषित किया गया। जो कानून सम्मत नहीं है। चुॅंकि विभागीय कारवाई के प्रारम्भ तिथि से (ब्लैक रिर्माक्र्स) की अवधि जोड़ी जाति हैं कोषी प्रक्षेत्र सहरसा बोर्ड द्वारा सभी विन्दुओं को ध्यान में रखते हुए श्री राम को योग्य पाकर ही अनुषंसा कर पटना मुख्यालय को भेजा है जो आज भी लम्बीत है। अन्त में पासवान ने पत्र में मुख्यमंत्री श्री जीतन राम मांझी से श्री पासवान के मामले को अपने स्तर से जाँच कराने और ए.सी.पी. लाभ अविलम्ब देने की कारवाई करने का आदेष देने का आग्रह किया है और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष से इस मामले में संज्ञान लेने के लिए पत्र भी लिखा है।

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