धारावाहिक “एक किरण रौशनी की” की लोकप्रियता बढ़ी, अब सप्ताह में तीन दिन

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राजू बोहरा नयी दिल्ली,

नव वर्ष 2013 के 26 जनवरी से दूरदर्शन ने भी अपनी कमर कस ली है, दूरदर्शन जल्द ही अपने लगभग सभी पुराने धारावाहिकों को समाप्त कर दर्शकों को और अधिक आकर्षित करने के लिए बड़े पैमाने पर नये धारावाहिक लाने की तैयारी में जुट गया है और उसने संजय लीला भंशाली जैसे बड़े निर्माता द्वारा निर्मित “सरस्वतीचंद्र”  जैसे कई बड़े नए शो भी शुरू कर दिए है। ऐसे में कुछ ही पुराने ऐसे  धारावाहिक हैं जो दूरदर्शन के दर्शकों को बाधे रखने में अपनी अहम् भूमिका  निभा रहे हैं, जिनमें प्राइम टाइम पर लम्बे अर्से से चल रहा ऐसा ही एक लोकप्रिय धारावाहिक है “एक किरण रौशनी की”, जो गांघी जी की विचार धारा पर  केन्द्रित है। इस धारावाहिक में लगातार नये-नये दिलचस्प ट्रेक आ रहे हैं  जिसमें आम आदमी और महिला सशक्तिकरण से जुड़े बेहद गंभीर मुद्दों जैसे “दहेज प्रथा”, “विधवा विवाह”, “नशाखोरी” “अडौप्शन (गोद लेना)” “ट्यूशनबाजी”, “शराब की समस्या”, “रैगिंग”, “बलात्कार”, “अपहरण”, “महिला विधेयक”, “खाप पंचायत”, “महंगाई”, “बेरोजगारी”, “पश्चिमी सभ्यता का अंधानुसरण” जैसे तमाम गंभीर  मुद्दे को प्रमुखता से शामिल किया गया है।

यह आज के दौर की एक ऐसी युवा हौसलामंद लड़की की कहानी  है जो गांधी जी की विचारधारा के माध्यम से समाज में पुनःजागृति लाती है। जिसे कलयुग छू तक नहीं पाया है, जिसे गांधी नोट के अलावा हर जगह दिखाई देते हैं, जो पूरी मानवता से प्रेम करती है उसके ये सारे गुण आज के इस भौतिक, व्यवसायिक, व्यवहारिक और संकुचित मानसिकता वाले युग में अवगुण बन जाते  हैं। “एक किरण रौशनी की” का निर्माण युवा निर्मात्री अश्विनी सिदवानी कर रही  हैं और इसका लेखन सुप्रसिद्ध हास्य व्यंग्य कवि हुल्लड़ मुरादाबादी के सुपुत्र नवनीत हुल्लड़ मुरादाबादी कर रहे हैं। हर शुक्रवार और शनिवार प्राइम  टाइम में रात 9 दिखाए जाने वाले इस धारावाहिक की लोकप्रियता का अंदाजा इसी  से लगाया जा सकता है कि अब दूरदर्शन पर इसका प्रसारण दो दिन के बजाय तीन दिन यानि शुक्रवार और शनिवार के अलावा 18 अप्रैल से रविवार हो भी    होगा। निर्मात्री अश्विनी सिदवानी के अनुसार उनका यह शो प्राइम टाइम में  धारावाहिक जल्द ही अपना शतक पूरा करने जा रहा है। ज़रीना वहाब, अंनग देसाई, उपासना सिंह, नवनीत  हुल्लड, मानिनी मिश्रा, अंजन श्रीवास्तव, राजेश पुरी, पकंज बैरी, फिरदौस दादी, सुप्रित रैना, और सीमा तांबे जैसे फिल्मों व टेलीविजन के दर्जनों लोकप्रिय कलाकार इसमें अभिनय कर रहे हैं।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

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