फिल्म “लगे रहो मुन्ना भाई” की तरह पहली बार धारावाहिक “एक किरण रौशनी की” से छोटे पर्दे पर भी ‘गांधीगिरी’

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राजू बोहरा, नयी दिल्ली,

आज के इस आधुनिक दौर की गलाकाटू प्रतिस्पर्धा के इस दौर में वैसे तो इस समय हर एक मनोरजन चैनल पर निर्माता हर विषय के धारावाहिक बना रहा है लेकिन सच्चाई यही है कि अधिक से अधिक टीआरपी जुटाने की कौशिश में यह अधिकाश धारावाहिक यथार्थ से बहुत दूर हो जाते हैं। उदहारण के तौर पर सहज ही अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सत्य घटनाओं पर बनने वाले कुछ लोकप्रिय धारावाहिकों को भी  भरपूर ड्रामे के साथ पेश किया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा दर्शक इन धरावाहिकों को देखने के लिए आकर्षित हों। ऐसे में आज भी हमारा एक मात्र स्वदेशी चैनल दूरदर्शन इन चैनलों से एकदम अलग हटकर ऐसे सामाजिक धारावाहिक पेश कर रहा है जो दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक संदेश भी दे रहे हैं। ग्लैमर के तड़के से दूर दूरदर्शन के अधिकाश धारावाहिकों में आज भी हमारी संस्कृति और सभ्यता की खुशबू मिलती है।

दूरदर्शन का एक ऐसा ही लोकप्रिय व सामाजिक धारावाहिक है एक किरण रौशनी की जिसने सफलता के कई आयाम छुये है। दूरदर्शन के प्राइम टाइम में करीब सवा साल से चल रहा यह धारावाहिक एक ऐसे दिलचस्प विषय पर आधारित है जो अब तक छोटे पर्दे नहीं आया। यूं तो इसमें दहेज प्रथा”, “विधवा विवाह”, “नशाखोरी” “अडौप्शन(गोद लेना)” ”ट्यूशनबाजी”, ”शराब की समस्या”, “रैगिंग”, “बलात्कार”,”अपहरण”,”महिला विधेयक” ”खाप पंचायत”, ”महंगाई”, ”बेरोजगारी” “पश्चिमी सभ्यता का अंधानुसरणजैसे तमाम गंभीर व सामाजिक मुद्दों को उठाया गया है लेकिन इसकी मूल कहानी हमारे राष्टपिता महात्मा गांधी जी की विचारधारा से प्रेरित है।

यह आज के दौर की एक ऐसी युवा हौसलामंद लड़की रौशनी की कहानी है जो गांधी जी की विचारधारा के माध्यम से समाज में पुनःजागृति लाती है। जिसे कलयुग छू तक नहीं पाया है, जिसे गांधी नोट के अलावा हर जगह दिखाई देते है, जो पूरी मानवता से प्रेम करती है उसके ये सारे गुण आज के इस भौतिक, व्यवसायिक, व्यवहारिक और संकुचित मानसिकता वाले युग में अवगुण बन जाते है। बेहद गंभीर सब्जेक्ट पर बन रहे इस लोकप्रिय धारावाहिक ने पिछले ही दिनों  अपने प्रसारण का पहला शतक सफलता पूर्वक पूरा कर लिया है।

हर शुक्रवार और शनिवार प्राइम टाइम में रात 9 दिखाए जाने वाले इस धारावाहिक की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है की अब इसका प्रसारण प्राइम टाइम में दो दिन के बजाय तीन दिन यानि शुक्रवार और शनिवार के अलावा रविवार हो भी किया जा रहा है। जानेमाने निर्देशक अलोकनाथ दिक्षित के निर्देशन में बन रहे इस चर्चित  धारावाहिक का निर्माण युवा निर्मात्री अश्विनी सिदवानी कर रही हैं और इसके लेखन है सुप्रसिद्ध हास्य व्यंग्य कवि हुल्लड़ मुरादाबादी के सुपुत्र नवनीत हुल्लड़ मुरादाबादी। इसमें ज़रीना वहाब, अंनग देसाई, ,उपासना सिंह, नवनीत हुल्लड, मानिनी मिश्रा, अंजन श्रीवास्तव, राजेश पुरी, पकंज बैरी, फिरदौस दादी, सुप्रित रैना, और सीमा तांबे जैसे फिल्मो व टेलीविजन के दर्जनों लोकप्रिय कलाकार काम कर रहे हैं।

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