बाइट्स प्लीज (उपन्यास भाग-12)

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“लगता है आज आपका मूड आफ है,” अपनी बगल की कुर्सी पर बैठ हुये नीलेश की तरफ देखते हुये चंदन ने पूछा। कंट्री लाइव में एसाइनमेंट की जिम्मेदारी चंदन ने संभाल रखी थी। वह अपनी दाढ़ी को बेतरतीब तरीके से बढ़ने के लिए छोड़ देता था और फिर अचानक किसी दिन छोटे-छोटे बाल और सफाचट गाल के साथ नजर आता था। लड़कियों के साथ उसका बात करने का अंदाज सहज और दोस्ताना था, जिसके कारण लड़कियां उसे पसंद करती थी। वह खुलेआम खुद को मार्क्सवादी बताता था और हर चीज की पड़ताल मार्क्सवादी नजरिया से ही करता था। पत्रकारिता को लेकर उसके तेवर कुछ कड़े थे, जैसा कि युवा अवस्था में मार्क्सवाद से प्रभावित लोगों के होते हैं। हर खबर पर उसकी पैनी नजर होती थी, साथ ही खबरों को लेकर अपने अगल-बगल बैठे लोगों के बीच बहस छेड़ने की पहल भी वह अक्सर किया करता था।  नीलेश के बगल में बैठकर सुबह से लेकर शाम तक वह जिले के रिपोटरों से फोन पर बातें करता था। करीब तीन घंटे की बैठक के बाद बीच में वह धीरे से आफिस के बाहर निकलता और सिगरेट के कश मार कर वापस आ जाता था।

“मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि मैं यहां क्या कर रहा हूं। यही हाल रहा तो मैं तो पागल हो जाऊंगा। सुबह शूट पर जाने की योजना थी, लेकिन भाई लोगों का कोई पता नहीं,”, नीलेश ने कहा, उसके शब्दों में खुद के प्रति झुंझलाहट थी। साथ-साथ बैठने के दौरान चंदन और नीलेश की अच्छी दोस्ती हो गई थी। चंदन हर चीज को सहजता से लेता था, खुद कहने के बजाये दूसरो को सुनना ज्यादा पसंद करता था। यही वजह थी कि लोग जल्द ही उसके मुरीद हो जाते थे।

“सर, एक दिन आप एसाइमेंट पर बैठकर देखिये, रिपोटरों से पाला पड़ेगा ना तब आपका दिमाग सही रास्ते पर दौड़ने लगेगा। यहां बैठकर मुझे उन्हें बताना पड़ता है कि आपके इलाके में कौन सी खबर है। डे प्लान देते नहीं है, जबकि कई बार मैं उन लोगों से कह चुका हूं। ऊपर से भुजंग और महेश  मेरे सिर पर सवार रहते हैं। भुजंग की नजर में जो खबर होती है उसे महेश कूड़ा कहता है और जो महेश की नजर में खबर होती है उसे भुजंग कूड़ा कहता है। अब तो मैं खुद भी खबर की परिभाषा भूल चुका हूं,” चंदन ने हंसते हुये कहा।

“सर, हमलोगों ने पढ़ा था कि खबर क्या होती है, बताऊं? ”, चंदन के पीछे खड़ी पूजा ने बीच में टपकते हुये कहा। कंट्री लाइव ज्वाइन किये हुये उसे 15 दिन हुये थे। उसे ट्रेनी के तौर पर रखा गया था। इसके पहले वह शौर्य टीवी में कुछ दिन तक काम कर चुकी थी और इलेक्ट्रानिक मीडिया के तहजीब से एक हद तक वाकिफ थी। वह अपनी बात को हमेशा सलीके से कहने की कोशिश करती थी। सीनियर्स के सामने वह जान बुझ कर बच्चों की तरह व्यवहार करती थी, लेकिन उसका दिमाग हमेशा अपने आप को आगे बढ़ाने में लगा रहता था। वह एक छोटे कद की लड़की थी। उसके चेहरे पर या तो अत्यधिक तनाव रहता था या फिर वह जरूरत से ज्यादा खुश नजर आती थी। कभी वह पूरी तरह से चुपी साध लेती थी मानो वर्षों से वह चुप हो और कभी चिड़िया की तरह चहचहाती रहती थी। उसका दिमाग तेजी से स्विंग करता था, और कभी-कभी तो चौंकाने की हद तक।

“खबर में फाइव वाइफ और वन हसबेंड का कंसेप्ट क्या है? ”, नीलेश ने पूजा की तरफ देखते हुये पूछा। उसके प्रश्न को सुनकर पूजा अपनी आंखों को मटकाने लगी।

“तुम्हें वाइफ की तरह बिहैव करने के लिए नहीं गया है, ”, चंदन ने पूजा के मटकते आंखों को देखकर चुटकी ली।

“देखिये नीलेश सर, ये कैसे बोल रहे हैं,” पूजा ने शिकायती लहजे में कहा। “अभी तो मेरी शादी भी नहीं हुई है, वाइफ कैसे बन जाऊंगी। मेरी बहन मीनू की शादी होने वाली है। पता है उसने मां से क्या कहा, पहले लड़के से मिलूंगी फिर बताऊंगी कि उससे शादी करनी है कि नहीं।”

“तुमसे जितना पूछा जाये उतना ही बोलो, ” नीलेश ने बीच में टोकते हुये कहा।

“मुझे नहीं पता खबर में फाइव वाइफ और वन हसबेंड के बारे में, आप लोग मुझे उल्लू बना रहे हैं, ” पूजा ने कहा।

“तुमको उल्लू बनाने की जरूरत है क्या? फाइव वाइफ और वन हसबेंड जर्नलिज्म का एबीसीडी है। लगता है पढ़ाई के समय ठीक से क्लास नहीं की थी। जर्नलिज्स की पढ़ाई कहां से की हो?”

“ वीर भद्र सिंह के संस्थान से और मैंने इतिहास में एमए भी किया है, संगीत की भी पढ़ाई की है,” पूजा ने थोड़े उत्साह से कहा।

“अब मैं समझ गया तुम्हारा प्राब्लम,” नीलेश ने हंसते हुये कहा।

“क्या है मेरा प्राब्लम?”

“ अब तक कोई भी काम ठीक से नहीं की हो।”

“प्लीज सर, ऐसे मत कहिये। मैं एक अच्छी पत्रकार बनना चाहती हूं।”

“पिछले कई दिनों से मैं तुम्हें टाइपिंग सीखने के लिए कह रहा हूं। टाइपिंग तो सीख नहीं रही हो, पत्रकार क्या खाक बनोगी।”

“लेकिन इलेक्ट्रानिक मीडिया में टाइपिंग की जरूरत कहां है सर, सबकुछ तो कैमरे और माइक से होता है,” पूजा ने मुंह बिचकाते हुये कहा।

“यही तो रोना है तुम लोगों के साथ। खुद ही सबकुछ मान कर बैठ जाते हो।”

“ठीक है मैं टाइपिंग सीख लूंगी, अब तो बता दीजिये फाइव वाइफ्स और वन हसबेंड क्या होता है।”

“व्हाट, व्हेन, व्हेयर, हू एंड व्हाय….ये पांच पत्नियां है, और हाऊ एक पति। किसी भी खबर में ये पांचों इनफार्मेशन होने ही चाहिये, तभी खबर पूरी मानी जाती है,” चंदन ने कहा। “तुम्हारा सब पढ़ा लिखा गोबर है। वैसे भी वीर भद्र सिंह पटना में थोक के भाव से पत्रकारिता की डिग्री बेच कर बच्चों का जीवन खराब कर रहे हैं और ये लोग भी डिग्री लेकर समझ जाते हैं कि रातो रात स्टार पत्रकार हो गये।”

“सर मानसी अभी वहां से पढ़ रही है, मैं उससे सीनियर हूं। मेरी पढ़ाई पूरी हो गई है।”

“अच्छी बात है कुछ दिनों में तुम हमारी भी सीनियर हो जाओगी,” नीलेश ने कहा। पूजा नीलेश की तरफ देखते हुये बुरा सा मुंह बना कर वहां चली गई।

कुछ दूरी पर बैठे हुये रंजन ने इशारे से नीलेश को अपने पास बुलाया और कान में फुसफुसा कर बोला, “तुम्हें पता है जानबुझ कर इनलोगों ने तुम्हारी शूटिंग को बिगाड़ा है। कल  महेश सिंह बाइट दे रहा था, बड़ा आया है बिहार में खोजी पत्रकारिता करने। इतने दिन से क्राइम रिपोटिंग करते हुये मैं क्या घास छिल रहा हूं। देखता हूं कैसे शूटिंग करता है। ”

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पटना के मुर्दा घाट के बगल में स्थित कंट्री लाइव का दफ्तर पूरी