भारत को वेश्या बनाया हथियार बनाने वाली इजरायली कंपनी राफेल ने

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देव मक्कड-

जोयल स्टाईन द्वारा भारतीयों का नस्लीय अपमान  पति और पत्नी के बीच का विवाद है?

देव मक्कड-

 देवेंद्र मक्कड़, न्यू जर्सी

ऐसा लगता है कि सभी भारतीय बुद्धिजीवी, लेखक, पत्रकार, राजनेता, धार्मिक नेता और उद्योगपति जोयल स्टाईन द्वारा टाईम पत्रिका में लिखे लेख माइ प्राइवेट इंडिया को विनोदी रूप में ले रहे हैं। हो सकता है उनके लिए विशेष रूप से हिन्दू और सिख संगठनों के लिए यह पति (इजरायल) और पत्नी (भारत) के बीच एक पारिवारिक छेड़छाड़ है।

 नवंबर 2009 में बंगलोर में हथियार बेचने वाली इजरायली कंपनी राफेल ने भारतीयों को गोला-बारूद व हथियार बेचने के लिए बंबईया स्टाईल में एक प्रोमोशनल वीडियो बनाया था, जिसमें उन्होंने अपने आप को (इजरायल) जांबाज ताकतवर मर्द के रूप में और 120 करोड़ भारतीयों को असहाय व बेबस महिलाओं के रूप में प्रदर्शित किया था। ये बेबस और असहाय महिलायें हिन्दू देवी- देवता दुर्गा मां और हनुमान जी की तस्वीरों के सामने गोला-बारूद और इजरायल के समक्ष वेश्या की तरह नाचते जाबांज और ताकतवर मर्द इजरायल को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। जाबांज मर्द (इजरायल) असहाय महिलाओं (भारतीयों) को जीवन भर संरक्षण का वायदा कर रहा है, यदि ये महिलाएं वही करेंगी जो उनको करने के लिए बोला जाता है।

सन 2006 में अमेरिका में एक इजराइली प्रेसीडेंट माईकल शवार्टज के नेतृत्व वाली पुलिस यूनियन ने बोला भारतीय तेलचट्टे, जानवर, अशिक्षित और गैर कानूनी हैं, जो वापस भारत जायें। 200 वर्ष से भी ज्यादा अमेरिकी इतिहास में इतने बुरे अपशब्द किसी भी निम्न संख्यक जाति के लिए नहीं बोले गये हैं। इसकी सूचना आठ दैनिक पत्रों तथा छह टीवी चैनलों, जिसमें भारत का सामना और हिन्दुस्तान तथा जीटीवी और सहारा टीवी भी शामिल है, में दी गई थी। इसके अलावा न्यूयार्क भारतीय कंस्यूलेट प्रवासी भारतीय मंत्री व्यालार रवि ,विदेश राज्य मंत्री आनंद शर्मा, और अन्य दलों के नेताओं को भी दी गई थी। इसके बावजूद भारत में या विदेशों में रहने वाले भारतीय नेता, बुद्धिजीवी, पत्रकार, धार्मिक नेता और उद्योगपतियों ने इस पर कोई टिप्पणी व दुख प्रकट नहीं किया और न ही पुलिस यूनियन और न्यूजर्सी की सरकार से लिखित माफी की मांग की। सबसे शर्मनाक बात तो यह है कि न्यू जर्सी और न्यूयार्क के भारतीय संगठन तथा नेता उन सबका सार्वजनिक सभाओं में आदर सम्मान करते हैं जो इस शर्मनाक घटना के जिम्मेदार हैं।

इसके विपरीत जब डान  आइम्यूस ने न्यूजर्सी की रुटर्गस यूनिवर्सिटी की अमेरिकी अफ्रीकी महिला फुटबाल टीम के मैच हारने पर यह बोला कि इनको खेलने ही क्यों दिया जाता है जब यह जीत नहीं सकती। ये तो नैपी हेडेड हाउस है। इसको लेकर अफ्रीकी समुदाय के राजनेता, पत्रकार, धार्मिक नेता कलाकार और अन्य सदस्यों ने एकजुट होकर डान आइम्यूस को सीबीएसटीवी से निकलवा दिया। डान आइम्यूस और सीबीएल के प्रबंधकों ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी कि वह मूर्खता में ऐसा कह गये। तब जाकर करीब ढाई साल बाद डान आइम्यूस को एक छोटे से स्टेडियम में काम मिल सका। यह वही डान आइम्यूस है जिनकी गिनती मार्च 2007 तक अमेरिका के 25 सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों में होती  थी।

ऐसा ही नजारा सन 2008 में अमेरिका में रहने वाले चीनी समुदायों का देखने को मिला।  सीएनएन के वरिष्ठ पत्रकार जैक कैफरटी ने अपने एक कार्यक्रम में बोला चाइनिज आर गून्स एंड थग्स। अमरीकी चीनी समुदाय ने सीएनएन के हालीवुड कार्यालय पर पथराव किया और अदालत में 1.3 बिलियन डालर का मानहानि का मुकदमा दायर किया। जैक कैफरटी और सीएनएन के प्रबंधकों ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और अदालत के बाहर कितने डालर के मुकदमे का समझौता किया गया इसकी सार्वजनिक सूचना नहीं है।

अमेरिका में शायद भारतीय मूल के ही लोग हैं जो अपने नस्लीय अपमान को खासकर यदि इसे यहूदी (इजरायली) करते हैं तो उसको अपनी प्रशंसा मानते हैं। एक अमेरिकी भारतीय नेता ने जोयल स्टाईन के भारतीयों का नस्लीय अपमान को लेकर सुझाव मांगा कि क्या कार्रवाई की जाये? मैंने सुझाव दिया, जो हश्र डान आइम्यूस और जैक कैफेरेटी का हुआ वही हश्र जोयल स्टाईन का भी होना चाहिए। टाईम पत्रिका के न्यूयार्क कार्यालय का घेराव किया जाना चाहिये और अदालत में 2 बिलियन डालर का मानहानि का मुकदमा दायर करना चाहिए। आज डेढ़ महीने बीत गये हैं, लगता है नेता जी जोयल का सार्वजनिक सभा में भारतीयों की प्रसंशा करने वास्ते आदर सम्मान की योजना में लगे हुये हैं।

जोयल से यह पूछा जाना चाहिये कि इजारयली पिछले 43 साल से फिलिस्तीनियों का मानव संहार क्यों कर रहे हैं? जोयल ने उस पर कोई लेख या टिपण्णी क्यों नहीं लिखी?

 हथियार बेचने वाली इजरायली कंपनी राफेल का तीन मिनट 25 सेकेंड का वीडियो एक ताकतवर जाबांज मर्द (इजरायल) और कुछ बेबस असहाय महिलाएं(भारत) को हिन्दू देवी देवता हनुमान और मां दुर्गा की उपस्थिति और गोला बारूद मिसाइल के आसपास उत्तेजक रूप से वेश्या जैसे नाच गान करते हुये दिखा रही हैं। इसे आप इस लिंक पर देख सकते हैं https://mail.google.com/mail/?hl=en&shva=1#inbox/12a62e541ccc2c44.

 गीत के बोल इस प्रकार हैं…

इजारयल (आदमी) : हम एक लंबे समय से भरोसेमंद दोस्त और भागीदार रहे हैं। मैं हमारे भविष्य को मजबूत बनाने के लिए और क्या वायदा कर सकता हूं?

भारत (महिला) : मुझे सुरक्षा, संरक्षण, सहारा, प्रतिबद्धता और आसरे का पक्का वादा चाहिए।

कोरस : हम तुम्हें अपने दिल में रखेंगे, हमेशा एक साथ रहेंगे, हम कभी अलग नहीं होंगे।

भारत (महिला) : मुझे आप पर विश्वास है।

इजरायल (आदमी) : आप मुझ पर विश्वास करती हैं।

इजरायल (आदमी), भारत (महिला) : हम हमेशा के लिए एक साथ हो जाएंगे।

कोरस : डिंगा डिंगा डिंगा डिंगा डिंगा…

इजरायल : मैं तुम्हारी रक्षा का वादा करता हूं, तुम्हारी उम्मीदों को पूरा करूंगा, तुम्हें सहारा दूंगा, बचाऊंगा और अपने वादों को पूरा करूंगा।

भारत (महिला) : मैं हमेशा तुम्हें अपने दिल में रखूंगी। हमेशा एक साथ रहेंगे, हम कभी अलग नहीं होंगे। मुझे तुम पर भरोसा है।

इजरायल (आदमी) : तुम्हें मुझ पर भरोसा है। 

इजरायल और भारत : हम हमेशा के लिए एक साथ हो जाएंगे।

भारत (महिला) : हम दोस्त और साथी।

इजरायल (आदमी) : एक दूसरे के लिए और ताकतवाले।

इजरायल और भारत : हम इकठ्ठे खड़े होंगे और अपने रिश्ते की रक्षा करेंगे

भारतीय कोरस (महिलाएं) : डिंगा डिंगा डिंगा डिंगा

यहूदी दुनिया के किसी भी कोने में रहता है या पैदा होता है तो स्वाभाविकतौर से इजरायल के कानून के मुताबिक इजरायली नागरिक माना जाता है, चाहे वह इजरायल में रहे या न रहे कभी भी आ सकता है। इसलिए मैं अमेरिका में रहने वाले यहुदियों को अमेरिकन मानने से इंकार करता हूं। दोहरी नागरिकता ऊपर से अमेरिकी यहूदी इजरायल के इलेक्शन में वोट डाल सकता है और वहां की सेना में नौकरी कर सकता है।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

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