शहीदों का सम्मान (कविता)

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वेंकटेश कुमार.

… न करते वो वलिदान,

तो आजादी एक सपना होता !

लालकिले पर फहराता झंडा,

पर नहीं वो अपना होता !!

गर अपनाते उनके आदर्शो को,

संसार में  शर्मिंदा न होना होता !

भ्रष्टाचार, बेकारी, गरीबी और

साम्प्रदायिकता से न जूझना होता !!

बनेंगे अच्छे नागरिक,  देशभक्त,

न छोड़ेंगे किसी को भूखा और रोता,

सौगंध शहीदों की खाते है,

बनायेंगे भारत को विश्व विजेता !!

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