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Friday, December 9, 2022
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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

रंगकर्म समर्पित जीवन जिया गोपाल शरण ने

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-    रविराज पटेल// रंगमंच और जीवन का कदमताल: "ठाकुर बाबा हो, हम गोरबा लागु तोर, बेच के गगरिया, चढ़ाउआ तैयार करेला , पुजारी बताबेला हमरा के चोर ..." तीस...

“तुम्हारा स्थान” (कविता)

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अक्षय नेमा// तुम जान सकती हो मेरे अन्दर की ज्वाला को, देख सकती हो भड़कते हुए अंगारे, और छू सकती हो मेरे अन्दर के तूफानों को। मगर दूसरा वो किनारा, जहाँ खिल रहे है प्रेम...

देवताओं की साजिश (कहानी)

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मेरा बचपन किताबों से खेलता रहा, किताबों में सोता रहा, किताबों में जागता रहा। मेरे पिता ब्रजभाषा के विद्वान् थे, और घर, घर से...

भोजपुरी सिनेमा का स्वर्णिम वर्षगांठ मनाया गया

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-    मुरली मनोहर श्रीवास्तव, वरिष्ठ टी वी पत्रकार // आज  से पचास साल पूर्व  उत्तर भारत के लोकप्रिय और मृदुल भाषा ‘भोजपुरी’ को पहला सिनेमा “गंगा मैया तोहे पियरी...

दो दौरों की एक कहानी

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संजय राय,  नई दिल्ली दुनिया में छाई आर्थिक मंदी के बीच अमेरिका और समूचे यूरोप के देश मायूसी के माहौल से बाहर निकलकर बीते खुशगवार...

बाल विकास परियोजना पदाधिकारी को मोबाइल से धमकी

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सुगौली, वीरेन्द्र कुमार बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के सरकारी मोबाइल पर जान मारने की धमकी देने का मामला प्रकाश में आया है। जिसको लेकर बाल...

…आँखे नहीं भिगोना बाबा (कविता)

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''क्या हँसना क्या रोना बाबा, क्या ही गुस्सा होना बाबा'' ''तीस बरस से बिछा रहे है, बो ही एक बिछोना बाबा '' ''खून-पसीने की रोटी का, क्या पाना क्या...

सरकार सपा की और नीति बसपा की !

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हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने घोषणा की है कि किसानों को भूमि अधिग्रहण मूल्य सर्किल रेट से छह गुना अधिक दिया...

गूंगी (नाटक समीक्षा)

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भारतीय संस्कृति की संवाहिका गंगा -- यमुना और अदृश्य सरस्वती जनमानस की प्रेरणास्रोत रही है। प्राचीन काल से प्रयाग का संगम तट धर्म, संस्कृति,...

काशी का निरालापन (बनारस – काशी)

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-सुनील दत्ता// यदि आप आज भी बनारस की खूबियों से अपरचित हैं तो आइये आज आपका परिचय उससे करा दूँ। मुमकिन है आपने इन दृश्यों...