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Friday, November 27, 2020

अब तो ‘राइट’ हो जाओ लेफ्ट

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नवीन पाण्डेय, नई दिल्ली यह तो अब सभी जान गए हैं कि बंगाल में बदलाव की बयार चली और ममता बनर्जी की आंधी में लेफ्ट...

सारंगी की तान छेड़ते ये गुदड़िया बाबा

दिमाग पर थोडा जोर दें तो आपको बचपन के वे दिन याद आ जायेंगे जब गुणा बाबा या गुदरिया बाबा को देखते ही आप...

इन गलियों में भी बसती है कला…

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उत्तमा दिक्षित यह गलियां जनजातियों की बसावट वाली है। गंदी और सामान्य जन सुविधाओं के अभाव से त्रस्त इन गलियों की कला अलग पहचान है।...

रिसेशन के बाद आर्ट मार्केट में बूम

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उत्तमा दीक्षित आर्ट वर्ल्ड में एक बार फिर बूम है। रिसेशन के बाद आर्ट मार्केट ने उबरने में बेशक समय लिया, लेकिन सिचुएशन ज्यादा अच्छी...

मजदूरों को चूसता हिंडाल्को व दुम हिलाते पत्रकार

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शिवदास एशिया की सबसे बड़ी एल्युमीनियम उत्पादक कंपनी हिंडाल्को का कहर संविदा श्रमिकों पर निरंतर जारी है। कंपनी के जुर्म से आजीज आकर रेणकूट इकाई...

पत्थर की खादानों में लाश बिछाते नौकरशाही, सफेदपोश व खनन माफिया

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शिव दास   गरीबी, बेरोजगारी, जिम्मेदारी और लाचारी से बेहाल विंध्य क्षेत्र के आदिवासियों की संस्कृति का अस्तित्व खतरे में है । लाल किले पर अपनी...

हिंसा के पेट से हिंसा ही जन्म लेगी

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हिंसा से प्रतिहिंसा, प्रतिहिंसा की प्रतिक्रिया- यह आतंकवाद की शृंखला है। धर्म के नाम पर ऐसा आतंकवाद दुनिया में तेजी से बढ़ रहा है...

जो सुनायेगा दिखायेगा,वही बच पायेगा

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सुधीर राघव क्या जो बांचा जाए सिर्फ वही साहित्य है? क्या जो लिखे वही लेखक है? क्या जो बोले वही वक्ता है? क्या जो प्रस्तुत...

उत्तर आधुनिक शिक्षा में मटुकवाद

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हरिशंकर राढ़ी (यह व्यंग्य समकालीन अभिव्यक्ति के जनवरी -मार्च 2010 अंक में प्रकाशित हुआ था ।) वाद किसी भी सभ्य एवं विकसित समाज की पहचान होता...

कैसे बनती और टूटती हैं मन्यताएं

सुधीर राघव मान्यताओं को लेकर लोगों में यह भ्रम है कि मान्यताएं सामूहिक ही होती हैं। मगर ऐसा नहीं होता। वह किसी भी व्यक्ति के...