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Saturday, January 29, 2022
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लिटरेचर लव

सुन री सखी ! (कविता)

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शोभा मिश्रा // आज भी याद है मुझे स्कूल यूनिफ़ॉर्म की मटमैली शर्ट बिना प्रेस की नीली स्कर्ट सर पर बकरी के सिंग की तरह चोटी में लगा उधरा हुआ...

जग को जीता आपने (कविता)

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सुमन सिन्हा// मेरा मौन ही तुम्हे मेरी श्रद्धांजलि है . शब्द नहीं जुट रहे , बिखर गए सारे .... तीन दिनों से इसी कोशिश में हूँ , ये खालीपन...

बाइट प्लीज (उपन्यास, भाग-7)

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13. दफ्तर से बाहर निकलते ही सुकेश की नजर माहुल वीर पर पड़ी, जो गार्डेन में सिगरेट का कश लगा रहा था। नीलेश उसके पीछे...

बाइट्स प्लीज (उपन्यास, भाग -14)

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27. रत्नेश्वर सिंह महीने में दो तीन बार ही पटना आते थे। उनका अधिकांश समय मुजफ्फरपुर में व्यतीत होता था। मुजफ्फरपुर में रिपोर्टर के तौर...

महान कवि की कविता

ऊंची इमारत की ऊपरी मंजिल पर लिखी जाने वाली कविताओं में अब हिन्दुस्तान का बोध नहीं होता शब्द गमगीन की जगह सौंदर्य से भरे होते हैं वातावरण खुशनुमा होता...

यशपाल के ‘झूठा सच’ को निगल गया कलकत्ता विश्वविद्यालय

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कलकत्ता विश्वविद्यालय द्वारा बी.ए. हिन्दी आर्नस में यशपाल के उपन्यास “झूठा सच” और मुक्तिबोध की कविताओं को शामिल न करने को लेकर पश्चिम बंग...

बाइट, प्लीज (part 21)

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44. महेश सिंह और विज्ञापन मैनेजर मंगल सिंह को लेकर पटना दफ्तर में यह अफवाह फैली हुई थी कि दोनों को इस्तीफा देकर जाने को...

Some pages of a torn- diary (part 8)

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25 June Today a team of an international Budhist organization came to teach us about world peace. All the students had been asked to come...

दारू की तलब

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आलोक नंदन रात के बारह बज रहे थे। बोतल खाली हो चुकी थी, लेकिन प्यास अभी पूरी तरह से बुझी नहीं थी। खाली बोतल को...