Category Archives: यंग तेवर

बाल संसद का आयोजन एक चुनौती : मणि भूषण झा

कहते हैं प्रतिभा परिचय की मोहताज नहीं होती। बिहार के मधुबनी जिले के ऐसे ही एक प्रतिभाशाली युवा मणि भूषण झा से अनिता गौतम की बातचीत :- बिहार के एक छोटे से जिले से देश की राजधानी दिल्ली तक का … विस्तार से पढ़ें

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रोटी की जुगत में गुम होती शिक्षा

अनिता गौतम आदि काल से शिक्षा के महत्व की अलग अलग व्याख्या होती रही है। कभी शिक्षा सिर्फ ज्ञान अर्जन हुआ करता था। बदलते समय के साथ इसे रोटी से जोड़ कर देखा जाने लगा। यानि शिक्षा रूपी ज्ञान से … विस्तार से पढ़ें

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बिगड़ैल बाइकर्स और पटना की लाचार पुलिस

अनिता गौतम. राजधानी पटना की सड़कों पर तेज रफ्तार लहरिया काटते बाइकर्स लगातार  परेशानी का सबब बने हुये हैं। अपनी जान से खिलवाड़ करते ये बाइकर्स दूसरों के लिये भी मुसीबत खड़ी कर रहै हैं। दुर्घटनाओं के लिये जिम्मेदार ये … विस्तार से पढ़ें

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चुनाव संभावनाओं से ज्यादा अनिश्चितताओं का खेल है

< ![endif]–> हाल ही में एक न्यूज चैनल द्वारा किये गयें चुनावी सर्वेक्षण में यह कहा गया है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के नेतृतव में एनडीए सबसे बडे राजनैतिक दल के रूप में उभरेगा। सर्वेक्षण में बताया … विस्तार से पढ़ें

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महात्मा गाँधी के तीन बंदरों का पतन

अहिंसा का यथार्थ केवल इतना ही नहीं कि किसी जीव के प्रति हिंसा न की जायें, बल्कि अहिंसा को महात्मा गाँधी ने जिन विचारों व स्वरूपों में विभक्त किया, उनसे मानव एक उच्च कोटी का समाज बनाने में अपना महत्वपूर्ण … विस्तार से पढ़ें

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दीवानगी की हद बन कर न रह जाये यह ‘फैशन’

अनिता गौतम, जमाने के बदलते दौर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, पर इस बदलते दौर में एक चीज और बदली है, वह है फैशन। आज समय और परिस्थितियां इतनी परिवर्तित हुई हैं कि इन बदलाव का सीधा और साफ … विस्तार से पढ़ें

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नौकरशाही न बन जाये अखिलेश सरकार की कब्रगाह !

उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर सवाल तो पिछले एक साल से खड़े हो रहे थे पर हर बार अखिलेश सरकार इसे विपक्ष और मीडिया की साजिश बताकर विषय से अपना पल्ला झाड लेती थे। लेकिन कहावत है कि … विस्तार से पढ़ें

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जाग-जाग हे हिन्द बावरे !

अक्षय नेमा मेख, आजादी के 65 साल गुजर जाने के बाद भी न तो देश की स्थिति सुधरी और न ही देश की भोली-भाली जनता की, स्थितियाँ सुधरी तो केवल और केवल सफेद पोश के उन नेताओं की जिन्होंने न … विस्तार से पढ़ें

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उन्मुक्त चंद: क्या ‘भारतीय पीटरसन’ का जन्म हो चुका है ?

मनीष शर्मा, नई दिल्ली पहली बार उन्मुक्त चंद की बल्लेबाजी को ध्यान से देखा..(ये मेरी गलती है)..लेकिन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की आपाधापी और मैचों का भारतीयसमयानुसर सुबह जल्द शुरू होना इसकी वजह रही (ये मैं बहाना नहीं बना रहा हूं, ये … विस्तार से पढ़ें

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भूख हड़ताल पर छात्र , बेफिक्र व्यवस्था

अनंत पटना विश्वविद्यालय में 15 अगस्त के अवसर पर कुछ यूॅ मना आजादी का जश्न। विश्वविद्यालय परिसर में कुलपति शंभुनाथ सिंह द्वारा मनाया गया जश्न ए आजादी उनकी संवेदनहीनता का प्रतीक बन गया। वे विश्वविद्यालय आये और झंडोतोलन किया फिर … विस्तार से पढ़ें

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