एन जयराम ने स्वैच्छिक अवकाश ग्रहण किया

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पूर्व मध्य रेल के अपर महाप्रबंधक श्री एन. जयराम ने स्वैच्छिक अवकाश ग्रहण कर लिया है । इस अवसर पर उनके सम्मान में आज सम्मेलन कक्ष में पूर्व मध्य रेल के कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा एक विदाई समारोह का आयोजन किया गया । समारोह की अध्यक्षता करते हुए पूर्व मध्य रेल के महाप्रबंधक के.के. श्रीवास्तव ने कहा कि श्री एन. जयराम अधिकारियों एवं कर्मचारियों के मध्य समान रूप से लोकप्रिय रहे हैं। वह काफी अनुभवी और कर्मठ इंसान रहे हैं । उन्होंने पांच माह की छोटी सी अवधि में ही पूर्व मध्य रेल में अपनी कार्यप्रणाली से सबको आकर्षित किया है। यात्री सुविधाओं में इनकी विशेष रूचि रही है। उन्होंने श्री जयराम को अवकाश ग्रहण के स्वस्थ और मंगलमय जीवन की शुभकामनाएं दी इस अवसर पर श्री एन. जयराम ने कहा कि पूर्व मध्य रेल में उनका पांच महीने का कार्यकाल काफी सुखद रहा। 35 वर्षों की रेलसेवा के दौरान उन्हें सबसे अधिक प्यार और सम्मान हाजीपुर में ही मिला है । उन्होंने बताया कि पारिवारिक कारणों से वे समय से पूर्व सेवानिवृत्ति ले रहे हैं । रेल के माध्यम से उन्होंने जो देश की सेवा की है उसे वे हमेशा अपने दिल में संजोय रखेंगे । उन्होंने सेवा का अवसर देने के लिए भारतीय रेल का धन्यवाद देते हुए कहा कि एक रेलकर्मी के रूप में वह काफी गौरान्वित महसूस करते रहे हैं । विदाई समारोह में प्रमुख मुख्य इंजीनियर श्री जी.एस.तिवारी, वरिष्ठ उप महाप्रंधक श्री एन. कुमार. उप महाप्रबंधक (राजभाषा) मेहरबान सिंह नेगी, सहायक सतर्कता अधिकारी (इंजीनियरिंग) श्री आर.के. राय ने भी अपने उद्गार व्यक्त किये । कार्यक्रम का संचालन उप महाप्रबंधक (सामान्य) श्री ए.के. झा ने किया । इस अवसर पर मुख्य कार्मिक अधिकारी श्री जे.एस.पी. सिंह, मुख्य संरक्षा अधिकारी श्री दीपक छाबड़ा, मुख्य सिगनल एवं दूरसंचार इंजीनियर श्री एच.के. अग्रवाल, मुख्य यांत्रिक इंजीनियर श्री के.पी. राव, मुख्य सुरक्षा आयुक्त श्री नीरज सिन्हा, महाप्रबंधक के सचिव श्री वी.के. सिंह, उप मुख्य सतर्कता अधिकारी/इंजीनियरिंग श्री विकाश चंद्रा सहित अन्य उच्चाधिकारीण एवं रेलकर्मी उपस्थित थे ।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

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