जमीन घोटाले की आग में जलता सुशासन

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बहुत दिनों से शांत पड़ी बिहार की राजनीति में बियाडा के जमीन आवंटन को लेकर गर्माहट आ गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर खुलेआम आरोप लग रहे हैं कि उनके शासन में उनके चहेते  मंत्रियों और अधिकारियों को लाभांवित करने के लिए उद्योग के नाम पर करोड़ों की जमीन उनके पुत्र और पुत्रियों को कौड़ियों के मोल दिये गये। विपक्ष के नेता इस मुद्दे को लेकर सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला करते हुये सुशासन पर ही सवाल उठा रहे हैं। राजनीति के कुशल खिलाड़ियों की तरह इनकी मंशा साफ है, इस मुद्दे को लेकर हमला सीधे शीर्ष नेतृत्व पर हो। आज तीसरे दिन भी सदन इस मुद्दे को लेकर जाम रहा। सदन जमीन चोर गद्दी छोड़ के नारों से गूंज रहा है।

बियाडा के जमीन आवंटन को लेकर बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया है। मंत्री के साथ-साथ कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों पर भी अपने परिचितों को कीमती जमीन कौड़ियों के मोल आवंटित कराने का गंभीर आरोप है। रसूख वाले कई बेड़ नेताओं के पुत्रों और पुत्रियों को बियाडा की ओर बिहार में उद्योग धंधा लगाने के लिए जमीन दी गई है। विपक्ष की ओर से इसे लेकर सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा किये जा रहे हैं। सदन में विपक्ष के नेता अब्दूल बारीक सिद्दकी ने कहा है कि सिंगल विड के आधार पर जमीन देने का कोई तुक नहीं बनता है। नीतीश कुमार ने अपने चहेतो को लाभान्वित किया है। इसे लेकर सदन में विशेष चर्चा करने की जरूरत है। हमलोगों कार्यस्थगन प्रस्ताव लाकर इस पर चर्चा करना चाह रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हो रही है। गुलाम गौस और कांग्रेस के नेता सदानंद सिंह भी इस मामले पर नीतीश सरकार से दो- दो हाथ करने के मूड में है। कांग्रेस के विधायक दल के नेता सदानंद सिंह नीतीश कुमार की सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। वह साफतौर पर कह रहे हैं कि यह नीतीश कुमार की छवि पर एक बदनुमा दाग है। मुख्यमंत्री को इस पर सदन में आकर जवाब देना चाहिये। गुलाम गौस का कहना है कि जमीन आवंटन के मामले ने न सिर्फ सिंगल बिड का इस्तेमाल किया गया है, बल्कि करोड़ों की जमीन को औन-पौने दाम में दिया गया है। हाजीपुर के एक करोड़ की जमीन को सिर्फ 30 हजार में दे दिया गया। यह घोटाला नहीं तो और क्या है।

आनन-फानन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मामले में मुख्य सचिव से रिपोर्ट तलब की है। साथ ही इसकी जांच की जिम्मेदारी भी उन्हें ही सौंप दी है। फिलहाल उन्हें रिपोर्ट के आने का इंतजार है ताकि इस मामले की सही तस्वीर आ सके। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मामले में अभी से ही फूंक फूंककर कदम रख रहे हैं, क्योंकि इस प्रकरण में उनकी छवि धूमिल होती दिख रही है। यही वजह है कि अपने स्तर से उन्होंने इसके जांच के आदेश दे दिये हैं।

बहरहाल विपक्ष इस मुद्दे को लेकर काफी आक्रमक है। सदन के अंदर तो इस मामले को लेकर एक तरह से घमासान ही छेड़ दिया है। विपक्षी नेता इस मामले में संलिप्त मंत्रियों के साथ-साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। साथ ही इस तथाकथित घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की मांग भी कर रहे हैं ताकि सच्चाई पर से पर्दा उठ सके।

वे सारे मंत्री और अधिकारी रसूख वाले हैं जिनके पुत्रों और पुत्रियों को बियाडा की ओर से जमीन आवंटित की गई है। हालांकि अपने पुत्र और पुत्रियों के पक्ष में मंत्रियों और नेताओं के अपने तर्क हैं। अमानुल्लाह परिवार की लाड़ली बिटिया रहमत फातिमा को बिहार के बिहिया इंडस्ट्रियल इलाके में 8,7120 स्क्वॉयर फीट जमीन दे दी गई है। परवीन अमानुल्लाह इस आवंटन को किसी भी तौर पर अनैतिक नहीं ठहरा रही हैं। इस आवंटन के पक्ष में उनका कहना है कि राज्य में किसी भी व्यक्ति को कोई भी उद्योग करने का पूरा अधिकार है। उनकी बेटी को जमीन मिला है वह पूरी तरह से नियम और कानून के तहत मिला है। और जिस वक्त उसने जमीन के अप्लाई किया था उस वक्त तो वह मंत्री भी नहीं थी। ऐसे में यह कहना कि उनके मंत्री होने की वजह से जमीन मिली है सरासर गलत है।

नीतीश के करीबी सांसद और राज्य के दबंग नेता जगदीश शर्मा के पुत्र राहुल शर्मा को भी हाजीपुर में 15,500 वर्ग फीट जमीन दी गई है। बिहार इंडस्ट्रियल एरिया डेवलेपमंट अथॉरियी यानी बियाडा ने राहुल कुमार की कंपनी को पटना से सटे हाजीपुर में 15,500 वर्ग फीट जमीन दी है। इसके पहले चारा घाटाले में भी जगदीश शर्मा को आरोपी रह चुके हैं। अब उनके बेटे राहुल शर्मा का नाम एक नये घोटाले से जुड़ रहा है। वैसे जगदीश शर्मा का  भी यही  कहना है कि जमीन का आवंटन उनके बेटे को नियमों के तहत हुआ है। इसके साथ ही वह यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या एक राजनीतिज्ञ के बेटे को उद्योग लगाने का अधिकार नहीं है।

मानव संशासधन मंत्री पीके शाही के बेटी उर्वशी शाही भी जमीन मिला है। इस मामले में पीके शाही का कहना है कि उनकी बेटी और दमाद एक फर्म में काम करते हैं। ऐसे में उसे फर्म को उद्योग के लिए जमीन दी जा रही है तो इसमें बुरा क्या है।

फारबिस गंज गोली कांड के तार भी इस तथाकथित जमीन घोटाले से जुड़ रहे हैं। फारबिस गंज में कुछ दिन पहले जो गोली कांड हुआ था उसकी एक बड़ी वजह वह जमीन थी जिसे भाजपा के एमएलसी अशोक चौधरी को के बेटे महेश को बियाडा की ओर आवंटित की गई थी। इस हिंसक घटना में कई लोगों की जाने तो गई ही थी, पुलिस की बर्बरता भी खुलकर दिखी थी।  बीजेपी के एमएलसी अशोक चौधरी ने अपने बेटे सौरभ चौधरी के नाम पर फॉरबिसगंज में बियाडा के तहत जमीन का जुगाड़ कर लिया था। ये वही जमीन है जहां सड़क के लिए हुई हिंसक वारदात में कई अल्पसंख्यकों की जान चली गई थी। लोगों के जेहन में आज भी फारबिस गंज गोली कांड ताजा है. कांग्रेस के चंदन बागची और राजद के गुलाम गौस का कहना है कि इसी जमीन को लेकर फारबिस गंज में पुलिस ने गोली चलाई थी। ये सब कुछ अशोक चौधरी के इशारे पर हुआ था। इस हत्या कांड से सरकार की मंशा साफ हो जाती है। आने वाले दिनों में सूबे में जमीन को  लेकर व्यापाक खून खराबा होने की आशंका है। सरकार की नीयत साफ नहीं है। चंदन बागजी तो यहां तक कह रहे हैं कि बिहार का यह जमीन घोटाला महाराष्ट्र के आदर्श घोटाले से भी बड़ा है। बिहार सरकार आदर्श घोटाले से भी आगे निकल चुकी है।

दूसरी ओर एनडीए के संयोजक नंद किशोर यादव इस बात से साफ इंकार कर रहे हैं कि इस मामले में किसी तरह का घोटाला हुआ है। एक कदम आगे बढ़कर वह यहां तक कह रहे हैं कि विपक्ष के पास अब कोई मुद्दा नहीं रह गया है, बेवजह शोर शराबा करके वे लोग अपनी प्रासांगिकता बनाये रखना चाहते हैं।

मीडिया में भी इस मुद्दे को जमकर उठाया जा रहा है। अब तक बिहार में मीडिया नीतीश कुमार की चाटूकारिता में लिप्त थी। लेकिन इस घोटाले की खबरों को छापना उनकी मजबूरी हो गई है। ऐसे में यहां से निकलने वाले तमाम अखबार इस बात की पूरी कोशिश कर रहे हैं कि घोटाले की इस खबर को घोटाला की तरह प्रस्तुत नहीं किया जाये, लेकिन इलेक्ट्रानिक मीडिया इस खबर को लेकर थोड़ी आक्रमक जरूर हो गई है। शायद यह आईबीएन 7 की खबर का असर है कि यहां के स्थानीय चैनल भी अब इस खबर में आक्रमक नजर हो रहे हैं. लेकिन  मीडिया की यह आक्रमकता शिवानंद तिवारी को रास नहीं आ रही हैं। अब तो वह मीडिया को ही धमकाने लगे हैं। मीडिया की खबरों से बौखलाये  शिवानंद तिवारी जैसे वरिष्ट नेता भी अपनी गरिमा को भूलकर मीडिया को औकात में रहने की सीख दे रहे हैं। मीडिया को धमकाते हुये लहजे में उन्होंने यहां तक कह डाला कि यदि वे यह गुमान करते हैं कि इस तरह से लिखने या खबरें प्रसारित करने से नीतीश सरकार पर कोई आंच आएगी तो वे मुगालते में न रहे. इसके साथ ही शिवानंद तिवारी इस बात को साफतौर पर खारिज कर रहे हैं कि जमीन के आवंटन में किसी तरह का घोटाला हुआ है।

उधर, उद्योग मंत्री रेणु कुशवाहा भी बिहार की अद्यौगिक नीति की जमकर बड़ाई करती हुई नजर आ रही हैं. उनका कहना है कि सरकार उद्योग को लेकर काफी संजीदा है, खासकर कृषि आधारित उद्योग को लेकर। इस क्षेत्र में जो कुछ भी हो रहा है सब नियम और कानून के तहत ही हो रहा है।

इस तथाकथित जमीन घोटाले को लेकर विपक्ष सदन से सड़क तक लड़ाई छेड़ने की तैयारी में है और इसकी सुगबुगाहट शुरु भी हो गई है। बिहार में तथाकथित जमीन घोटाले की गूंज दिल्ली में भी सुनाई दे रही हैं। लोजपा सुप्रीमो राम विलास पासवान इस मुद्दे को लेकर दिल्ली में जमे हुये हैं।राम विलास ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर सरकार को अविलंब बर्खास्त करने की मांग की है। इसके अलावा वह सूबे में जमीन के इस बंदरबांट के खिलाफ 27 जुलाई रथयात्रा निकालने वाले हैं।

इधर पटना की सड़कों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुतले भी फूंके जाने लगे हैं। राजद इसे एक सुनहरा अवसर मान रहा है यही वजह है कि इस मुद्दे को लेकर सड़कों पर भी आंदोलन छेड़ने के सिलसिला शुरु हो चुका है। इसी क्रम में राजद कार्यकर्ताओं ने पटना के डाक बंगला चौराहे पर बिहार सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुये मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला फूंका। सड़क पर छिड़ने वाली इस लड़ाई की कमान राजद नेता राम कृपाल संभाले हुये हैं.

बहरहाल सच्चाई जो हो, विपक्ष सदन के अंदर और बाहर इस मुद्दे पर धार चढ़ाने में लगा हुआ है। नारेबाजी और पोस्टरबाजी का दौर जम कर चल रहा है। अब सदन के अंदर जमीन चोर गद्दी छोड़ जैसे नारे गूंजने लगे हैं। जिस तरीके से विपक्ष इम मुद्दे को लकर गोलबंद हो चुके हैं उसे देखते हुये कहा जा सकता है कि आने वाले दिन नीतीश सरकार पर भारी पड़ने वाले हैं।

बियाडा जमीन आवंटन के मामले को लेकर विपक्ष उत्साहित है। नीतीश कुमार के खिलाफ उसे बैठे बिठाये एक मुद्दा मिल गया है। इसका इस्तेमाल विपक्ष नीतीश कुमार के सुशासन को कुशासन साबित करने के लिए करने लगा है। अब देखना है अपनी छवि के प्रति हमेशा सजग रहने वाले नीतीश कुमार इस भंवर से खुद को कैसे निकालते हैं।

3 COMMENTS

  1. सब जमीन तो सरकार की ही है। फिर काहे का शोर भाई! और जिनको मिली है वे योग्य न होते, बिहार के नागरिक न होते तो थोड़े ही मिलती।

    बस एक बार दुशासन बाबू की निजी सम्पत्ति की जाँच भी कर ली जाय। लेकिन सी बी आई से नहीं, वह तो है ही चोर बोर्ड आफ़ इंडिया(भारत नहीं) ।

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