बाल वैज्ञानिक से अभिनेता एवं गायक बनने का सफर

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नई दिल्ली,  राजू वोहरा

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी दिनांक 27 से 31 दिसम्बर 2010 तक चेन्नई में बाल विज्ञान कांग्रेस का आयोजन होने जा रहा है। बाल विज्ञान कांग्रेस ने देश में वैज्ञानिक सोच के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका तो निभाई ही है साथ ही साथ इस कांग्रेस ने देश को ऐसे प्रतिभावान युवाओं का एक समूह भी दिया है जो विज्ञान संचार के क्षेत्र के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी अपना मुकाम बना रहे हैं।

अभी हाल ही में हमारी मुलाकात एक ऐसे ही युवा से हुई जिसने अपना सफर एक बाल वैज्ञानिक के रूप में प्रारंभ किया। ओर वह है विवेक सुदर्शन जिन्होंने न केवल छोटी सी उम्र में सोसायटी फॉर सांइस एण्ड इन्वायरोन्मेन्ट, अवेयरनेस, रिसर्च, कम्युनिकेशन एण्ड हेरिटेज नाम की स्वयंसेवी संस्था की नींव रखी बल्कि इस संस्था के माध्यम से देश भर में विज्ञान संचार के आयोजनों के साथ साथ विज्ञान क्लबों की एक ऐसी श्रृंखला बना दी जो देशभर में विज्ञान संचार में महत्वपूर्ण भूमिकाऐं निभा रहे है।

अपने सामाजिक दायित्व के साथ ही हमें विवेक सुदर्शन का एक और रूप देखने को मिला जिसमें उन्होंने एक फिल्म इम्पेशेन्ट विवेक में मुख्य भूमिका निभाई है, फिल्म 7 जनवरी 2011 को रिलीज होने जा रही है। विवेक सुदर्शन अपनी लगातार मेहनत, लगन एवं रचनात्मक प्रतिभा के कारण ही एक बाल वैज्ञानिक से फिल्म अभिनेता और गायक बन गये है। इस फिल्म में उन्होंने एक मासूम एवं बेसब्रे व्यक्ति का चरित्र निभाया है जो अपने सपनों की दुनिया बुनता है ओर एक लड़की से प्यार कर बैठता है और वह लड़की ओर कोई नहीं बल्कि फिल्म की नायिका पूर्व मिस इंडिया सयाली भगत है जो फिल्म में अपनी रोमांचित करने वाले अभिनय से सभी का दिल जीत लेती हैं फिल्म में प्यार को बहुत ही सहज रूप में दिखाया गया है जहां दर्शक फिल्म से जुड़ेगा तो उसके अन्दर से हंसी के फव्वारे निकलेंगे जो उसे गुदगुदाऐंगे, वही दूसरी ओर एक युवा की अपने प्रेम को पाने के लिए कठपुतली माध्यम का सहारा लेने के नये प्रयोग का सराहे बिना नहीं रहेंगे।

फिल्म का निर्देशन एक ऐसे निर्देशक ने किया है जिसे हमेशा ही पसंद किया गया है और वह है राहत काजमी साहब और विज्ञान लेखन के मशहूर लेखक बी. के. त्यागी ने फिल्म की कहानी को लिखा है।

फिल्म का संगीत दिनांक 16 दिसम्बर को मुंबई के होटल सन एण्ड सेण्ड में मशहूर गायक एवं संगीत निर्देशक इस्माइल दरबार द्वारा जारी किया गया। यह सभी जानते है कि फिल्म के दो गीत एक परी पागल सी एवं ऐ बंदा मस्त कलंदर पहले से ही लोगों की जुबान पर चढ़ने लगे हैं और इसका अनुमान हम इसी से लगा सकते हैं कि संगीत के रिलीज के साथ ऐ बंदा मस्त कलंदर गीत पर फिल्मी सितारे भी जमकर झूमे।

 संगीत के रिलीज के साथ ही बी. के. त्यागी एवं विवेक सुदर्शन द्वारा पुतली माध्यम पर लिखी गई पुस्तक का विमोचन भी प्रसिद्व फिल्मी हस्ती आदित्य पंचोली द्वारा किया गया।

यह बड़ा सुखद है कि एक विज्ञान संचारक हमारे बीच एक मशहूर फिल्म अभिनेता एवं गायक बनकर उभरने जा रहा है किन्तु फिर भी विज्ञान संचार के लिए उनका प्रेम कम नहीं हुआ है और विज्ञान संचार पर पुस्तक का प्रकाशन फिल्म के साथ करना उनकी समाज के प्रति प्रतिबद्वता को रेखांकित करता है। फिल्म में 6 गाने उन्होंने स्वयं ही गाये हैं, फिल्म हिन्दी के साथ साथ दिनांक 7 जनवरी को ही तमिल भाषा में भी रिलीज होगी।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

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