बिहार में गायों पर बेइंतहा जुल्म

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बिहार में सबसे अधिक जुल्म गाय पर हो रहा है और वो भी पेशेवर ग्वालों द्वारा। गाय का दूध ही इनकी आजीविका का प्रमुख साधन है और अपने पाले हुये गायों का एक-एक बूंद दूध निचोड़ने के लिए क्रूरताओं की सभी सीमाओं को ये पार कर जाते हैं. यदि गाय का बछड़ा होता है तो उसका मरना तय है। ग्वाले बछड़ों को गाय का दूध पीने ही नहीं देतें हैं। बछड़ा भूख से बिलबिला कर मर जाता है। इसके बाद ग्वाले मरे हुये बछड़े की खाल निकाल कर उसे धूप में सूखा कर उसमें भूसा भर देते हैं। दूहने के पहले भूसे वाले बछड़े को गाय के सामने रख देते हैं ताकि गाय का यह भ्रम बरकरार रहे कि उसका बच्चा जिंदा है।
जब गाय को पता चल जाता है कि उसका बछड़ा मर चुका है तो उसके थन से दूध उतरना बंद हो जाता है। ऐसी स्थिति में बड़ी बेरहमी के साथ उसे इंजेक्शन दिया जाता है। गाय को इंजेक्शन देने का तरीका भी काफी खौफनाक है,जिसे देखकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं। दूहने के पहले गाय को सुबह शाम दो इंजेक्शन दिये जाते हैं। सुई की नोक से उसका पूरा गर्दन छलनी हो जाता है। गायों के खिलाफ जारी इस क्रूरता को रोकने कोई कोशिश नहीं हो रही है। इंजेक्शन द्वारा निकाला गया दूध स्वास्थ्यकर नहीं होता है।
इस संबंध में पूछे जाने पर ग्वालों का सीधा सा जवाब होता है, यदि इनका दूध नहीं निकालेंगे तो हमारा पेट कैसे चलेगा और दूध निकालने के लिए इन्हें इंजेक्शन लगाते हैं तो इसमें बुराई क्या है। हमने गाय की कीमत चुकाई है और इनसे दूध निकालने से हमें कोई नहीं रोक सकता है। जानवरों के अधिकारों को लेकर वैसे तो देशभर में कई संस्थाएं कार्य कर रही हैं लेकिन अभी तक किसी भी संस्था का ध्यान बिहार में गायों पर होने वाले अत्याचारों की ओर नहीं गया है।

2 COMMENTS

  1. गाय ही क्यों सभी जानवरों पर आदमी अपने फायदे के लिए अत्याचार करता रहा है। मेनका गाँधी के संगठन को सूचित करें, शायद कुछ भला हो पायेगा इन गायों का। पीपुल्स फार एनिमल्स नाम है उनके संगठन का। गाय तो हिन्दुओं की माता कही जाती है। गाय यानि मां का दूध तो बेचने लायक ही होता है इन हिन्दु ग्वालों के लिए।

    किसी भी जीव का दूध सिर्फ उसके बच्चों के लिए होता है न कि आदमी के लिए। पर आदमी यह कुतर्क देता है कि उसने गाय या अन्य किसी जानवर को पाला है, चारा खिलाया है तो उसका दूध वही बेचेगा और पिएगा। प्रकृति ने जब सब जीवों को स्वतंत्र होकर जीने का अधिकार दिया है तो हम मनुष्य इन्हें छीन कैसे सकता है! बुद्धिमान होने का अर्थ यह तो नहीं कि हम अपने फायदे के लिए कभी दूध तो कभी मांस के लिए इन निरीह प्राणियों को मार डालें। जब हमारे घर में कोई कमजोर या थोड़ा अल्प बुद्धि का सदस्बय होता है या बच्चा पैदा होता है तब हम उनके साथ तो इस तरह का अन्याय नहीं करते । फिर जानवरों को हमें दुख पहुँचाने का कोई हक नहीं है। मेनका गाँधी वाले संगठन का वेबसाइट पता लगाकर पूरी घटना बताने की कोशिश करें।

  2. really its a serious problem. Cow milk is very precious to us but not in such a inhuman condition. I hope one day goverment will take some action or make a important law.

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