भूख खबर मवाद

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भरत तिवारी ‘शजर’,

खबर
भूख की
भूखों की
भूख बेचने वालों की
नंगों की
नंगे होतों की
नंगे करे जातों की
जंगल की
जंगलियों की
जंगलराज की
जंगल बचाने की
… डिमांड में है
जंगलियों की भूख बढ़ रही है
डिमांड की नियति – बदलते रहना

खबर
बेचने की
बिकने की
बिक गए की
देश की
विदेश की
देशप्रेम की
विदेश प्रेम की
… डिमांड में है
प्रेम बिक रहा है
प्रेम की नियति – बदल रही है

अन्दर झाँकना बंद कर दिया
बाहर देखना मना है
मैल –
चमड़ी का पोर पार कर गयी
रंग खून का और रंगत मवाद की
मवाद से चले खबरी-मसाला-मशीन
खबरों के प्रेमी –
सब …

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