लोगों को गालियां देते हुये निकलता है नीतीश का काफिला

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा में तैनात लाव-लश्कर तो पूरी तरह से बेलगाम हो गया है. डिकोरम के मुताबिक मुख्यमंत्री के आगे पीछे गाड़ियों की कतार चलती है, और जब ये निकलतें हैं तो सड़कों को पूरी तरह से खाली करा दिया जाता है। मुख्यमंत्री के इस विशेष दर्जे से किसी को एतराज नहीं है। चूंकि उनके ऊपर काम की जिम्मेदारी अधिक है, अत: क्लीयर रूट तो उन्हें मिलना ही चाहिये। लेकिन रुट को क्लीयर कराने के लिए जिस तरह से प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सड़क पर चलने वाले लोगों को गंदी-गंदी गालियां दी जाती हैं, वो कहीं न कहीं बिहार में पुलिस के आधुनिकीकरण पर सवाल तो उठाता ही है, साथ ही दोबारा सत्ता में आने के बाद शासकों द्वारा आम लोगों को भेड़-बकरी समझने की मानसिकता को भी दर्शाता है।

बिहार के लोगों का ट्रैफिक सेंस थोड़ा कमजोर है। सड़क पर ट्रैफिक नियमों के बजाय वे अपने नियम से चलते हैं। अब तक ट्रैफिक पुलिस द्वारा भी लोगों  को इस मामले में प्रशिक्षित नहीं किया गया है, और बिहार में ट्रैफिक सिस्टम के आधुनिकरण में यह सबसे बड़ी बाधा है। अज्ञानता के कारण है लोग वीआईपी रुट के बारे में नहीं जानते हैं। मुख्यमंत्री के काफिले के आगे रोड को क्लीयर कराने के लिए एक जीप चलती है, जिसमें लाउडस्पीकर भी लगा होता है. जीप पर बैठे अधिकारी रोड को क्लीयर कराने के लिए लाउडस्पीकर पर ही चिल्लाते रहते हैं। साइकिल और स्कूटर वाले अक्सर इस जीप के सामने आ जाते हैं। इसके बाद तो लाउडस्पीकर से इन्हें गालियां दी जाती हैं, वो भी पूरे पुलिसिया अंदाज में। इस जीप के सामने फंसा चालक समझ भी नहीं पाता है कि आखिर उसे गालियां क्यों दी जा रही हैं। साइकिल वालों पर तो गालियों के साथ-साथ डंडे भी बरसने लगते हैं।

सड़कों पर गुजरता हुआ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का काफिला लोगों को इरिटेट कर रहा है। काफिले के गुजरने के बाद भले ही थोड़ी देर में ट्रैफिक सहज हो जाती है, लेकिन इस दौरान लाउडस्पीकर से जो गालियां सुनाई जाती हैं उससे लोगों के मन में सुशासन के खिलाफ भावनाएं उमड़ती हैं। लोग पुलिस और प्रशासन की गालियां खाने को अब तैयार नहीं है, चाहे वो रिक्शा या साइकिल वाला ही क्यों न हो। यदि लगातार ऐसे ही चलता रहा तो इसका खामियाजा नीतीश कुमार को भुगतना पड़ सकता है। किसी समय लालू यादव का काफिला भी कुछ इसी अंदाज में चलता था। यह सही है कि पूरे देश में पुलिस की जबान गंदी है, बिहार में कुछ ज्यादा ही है। लेकिन सड़कों पर चलते हुये लोग पुलिस से सभ्य आचारण की उम्मीद तो रखते ही हैं, चाहे पुलिस वाले नीतीश कुमार के काफिले को ही बढ़ाने के लिए क्यों न मशक्त कर रहे हों।

3 COMMENTS

  1. kya kariyega SUSAASAN hai.
    saayad nitish ji k nazar mein yahi susaasan hai lekin aam aadmiyon k nazar mein ye dadagiri hai.
    police wale aisa islie karte hain kyon ki saayad nitish ji unko aisa karne k lie kahte hon.
    but aisa nahi chalega,we live in a democracy and saayad nitish ji ye bhul gye hain.
    nitish ji ko sharm aani chahiye.
    i want to ask MR.C.M. a small question,
    Sir are u aware of it?
    YA PHIR AAPKO BHI MANMOHAN JI KI TARAH KHUCH BHI PATA NAHI HAI…
    ha ha ha

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