सुरेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर कूड़ा परोसता एक पत्रकारिता संस्थान

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तेवरआनलाईन, पटना

बिहार में पत्रकारों की लंबी चौड़ी फौज पहले से ही सरकार की अर्दली बनी हुई है। यहां के तमाम अखबार नीतीश के गुणगान करने में लगे हुये हैं। अब यहां के पत्रकारिता संस्थानों को देखकर यही लगता है कि आने वाले दिनों में पत्रकारिता पूरी तरह से गर्त में मिलने वाली है। ताजा उदाहरण है सुरेंद्र प्रताप सिंह पत्रकारिता एवं जनसंचार संस्थान द्वारा आयोजित आंतरिक मूल्यांकन परीक्षा में पूछे गये प्रश्नों का।

14 मई को सुरेंद्र प्रताप सिंह पत्रकारिता एवं जनसंचार संस्थान ने एमए(एमसी) की परीक्षा ली। जब प्रश्न पत्र छात्रों को दिया गया तो उनके होश ही उड़ गये। कई प्रश्न ऐसे थे जिनका मतलब ही छात्रों को समझ में नहीं आ रहा था। और जब मतलब ही समझ में नहीं आ रहा था तो उत्तर क्या खाक देते। नमूने के तौर पर उस  प्रश्न पत्र से कुछ प्रश्न यहां दिया जा रहा है…

  1. Define clobalisation and descued about the frend in detail.
  2. Discus and define ebal concept singnificance and objective of corporate communication.

  4. What is Modernism. Is it a tought process is life style.

Journalism is a course on man and development, few and bedy.

पटना में पत्रकारिता की पढ़ाई के नाम पर छात्रों के बीच कूड़ा परोसा जा रहा है. हालांकि इसके लिए मोटी फीस ली जा रही है। अब जिस तरीके से छात्रों से प्रश्न पूछे जा रहे हैं उसे देखकर सहजता से अहससास किया जा सकता है कि इस पत्रकारिता संस्थान को चलाने वाले लोग कितने काबिल हैं. मजे की बात तो ये है कि इस संस्थान का नाम देश के एक बड़े और होनहार पत्रकार सुरेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर है। पूछे गये प्रश्नों को देखकर इस संस्थान के संचालकों की बौद्धिक स्तर को समझा जा सकता है। इस संस्थान से निकलने वाले छात्र क्या एक बेहतर पत्रकार बन पाएंगे इस प्रश्न का जवाब ढूंढने की जरुरत है। छात्रों के पूछे गये प्रश्नों को देखकर सुरेंद्र प्रताप सिंह की आत्म भी दुखी होगी।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

4 COMMENTS

  1. आत्मा को छोड़िए। इतना तय है कि पत्रकारिता हमेशा के लिए विदा होगी और कुछ दशकों में ही होगी। जब 50 देशों का साम्राज्य समय के साथ खत्म हो गया तो यह पत्रकारिता कौन सी बड़ी चीज है।

  2. तेवरआनलाईन, पटना
    मैंने आपकी खबर पढी सुरेन्द्र प्रताप सिंह पत्रकारिता महाविद्यालय के सम्बन्ध में… वो तो नालायक होंगे ही जैसा की आपके द्वारा दिए प्रमाण से प्रतीत हुआ… लेकिन आप भी तो कम नहीं मालूम होते .,जिन बातों से दुःख और क्षोभ हो वो मजेदार भी होते हैं ….. मरने के बाद भी कोई होनहार होता है ये बताने और शब्दों के अनुपम प्रयोग की जानकारी देने के लिए आपका धन्यवाद… आपकी रिपोर्ट क में आपके ही ध्यानार्थ प्रस्तुत है -:

    ” पटना में पत्रकारिता की पढ़ाई के नाम पर छात्रों के बीच कूड़ा परोसा जा रहा है. हालांकि इसके लिए मोटी फीस ली जा रही है। अब जिस तरीके से छात्रों से प्रश्न पूछे जा रहे हैं उसे देखकर सहजता से अहससास किया जा सकता है कि इस पत्रकारिता संस्थान को चलाने वाले लोग कितने काबिल हैं. मजे की बात तो ये है कि इस संस्थान का नाम देश के एक बड़े और होनहार पत्रकार सुरेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर है। पूछे गये प्रश्नों को देखकर इस संस्थान के संचालकों की बौद्धिक स्तर को समझा जा सकता है। इस संस्थान से निकलने वाले छात्र क्या एक बेहतर पत्रकार बन पाएंगे इस प्रश्न का जवाब ढूंढने की जरुरत है। छात्रों के पूछे गये प्रश्नों को देखकर सुरेंद्र प्रताप सिंह की आत्म भी दुखी होगी।”

    पहले आपको शब्दों का अर्थ और उसके प्रयोग सीखना चाहिए – आप भी तो प्रकारांतर से कूड़ा ही परोस रहे हैं मेरे मित्र .आपको ठेस पहुंचाने का दुःख तब होगा जब गलतियाँ सुधारने की प्रवृति मुझे आपलोगों के भीतर नहीं दिखेगी.
    राजेश झा ,मुंबई (०९०२९२१२३३९ )

  3. tewar online per is tarah ki khabar ko dekhkar mujhe kafi dukh huaa bina janch partal ka kuchh se kuchh likhana ye ptrakarita nahi hai aapko batate chale ki abhi bhi patna ke electronic media me is institute ke 50 percent ptra kar hai main bhi isi institute ka product hun

  4. प्रश्नपत्र को देखने के बाद ही इस खबर को प्रकाशित किया गया है और पूरी जिम्मेदारी के साथ इसे प्रकाशित किया गया है….यदि सच्चाई पढ कर आपको दुख हो रहा तो क्या किया जा सकता है।

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