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Friday, December 9, 2022
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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

बहुराष्ट्रीय कंपनियों का मकड़जाल( भाग-1)

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प्रस्तुतकर्ता : चंदन कुमार मिश्र इन विदेशी कम्पनियों ने देश में कम्पन पैदा कर दिया है। पूरे देश में लाखों-करोड़ों लोगों के अस्वस्थ...

गांधीवाद से कुछ लेना देना नहीं है अन्ना हजारे को

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वेदप्रताप वैदिक, नई दिल्ली जिसका शुरू से मुझे डर था, अब वही हो रहा है। लोकपाल के नाम पर उमड़ा अपूर्व जनाक्रोश अब अपूर्व दिग्भ्रम...

भूल गए हम एक पत्रकार,कवि और आजादी के दिवाने को

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आशुतोष कुमार पांडेय, मुजफ्फरपुर वैसे भूलने की संस्कृति हमारी पुरानी रही है। कल तक प्रभाष जोशी साथ थे, आलोक तोमर थे। लेकिन कब तक। हम...

पैसे दो…….उसे एचआईवी संक्रमित इंजेक्शन दे के मार दूंगा….!

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आशुतोष कुमार पांडेय, मुजफ्फरपुर आप थोड़ी देर के लिए आश्चर्य में पड़ गए होंगे। आखिर मुम्बईया फिल्म के लेखकों के दिमाग को कल्पना की उड़ान से...

इतिहास के झरोखे में वैशाली

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तेवरआनलाईन डेस्क वैशाली का नामकरण महाभारत काल के इक्ष्वाकु वंशीय राजा विशाल के नाम पर हुआ है। इसी विशाल ने इस विशाल नगरी का निर्माण...

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी तंग थे इंस्पेक्टर बालेश्वर प्रसाद से

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इंस्पेक्टर बालेश्वर प्रसाद   आशुतोष कुमार पांडेय, मुजफ्फरपुर मुजफ्फरपुर में कुछ ही दिन पहले एक घटना हुई थी। बच्चों को सुनायी जाने वाली किसी राजा-रानी की कहानी...

शहीद भगत सिंह में न तो ग्लैमर है, न मार्केट वैल्यू,...

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  चंदन कुमार मिश्र, पटना 23 मार्च 2011 को हमारे देश की संसद में यह तय किया जा रहा था कि कौन सा पक्ष ज्यादा दोषी...

हर भ्रष्ट को मारो जूते जी

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फिलहाल भारत में सिविल सोसाइटी की धूम मची हुई है। बहुत कुछ हो रहा है, बहुत कुछ होनवाला है। राजू मिश्रा लंबे समय से...

जन लोकपाल बिल में रेमन मैगसेसे पुरस्कार की बात क्यों ?

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चंदन कुमार मिश्र, पटना पता नहीं कैसे लोग मीडिया में होते हैं जिनको आंख पर पट्टी बांधकर रहना अच्छा लगता है और वे समझ ही...

सिम्मी मरवाहा ट्रस्ट ने चार पत्रकारों को सम्मानित किया

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तुमने जिन पौधो को रोपा,फूले और फलेगें,पत्रकारिता की वेदी पर सौ सौ सूर्य ढलेंगे। दिवंगत कवि पांडे आशुतोष की इन पंक्तियो को पढ़ते हुए...