चुनाव संभावनाओं से ज्यादा अनिश्चितताओं का खेल है

< ![endif]–>

हाल ही में एक न्यूज चैनल द्वारा किये गयें चुनावी सर्वेक्षण में यह कहा गया है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के नेतृतव में एनडीए सबसे बडे राजनैतिक दल के रूप में उभरेगा। सर्वेक्षण में बताया गया है कि यूपी और बिहार में भाजपा के पीएम इन वेटिंग नरेन्द्र मोदी का जादू चलेगा साथ ही भाजपा के लिए दिल्ली अभी दूर है, इसके साथ ही सर्वेक्षण में कहा गया है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए का कद घटेगा। सर्वक्षण के मुताबिक इस बार सत्ता की चाभी क्षेत्रीय दलों के हाथ में होगी। यानि साधारण शब्दों में कहा जाये तो इस रिपोर्ट का सार यही है कि इस बार दिल्ली की सत्ता कांग्रेस के हाथों से गयी।

हालाकि पिछलें दो तीन चुनावों में मीडिया सर्वेक्षणों के इतिहास को देखा जायें जो तस्वीर कुछ और ही नजर आती है। सबसें पहले बात करते है लोकसभा चुनाव 2009 की।

ये वो दौर था जब भाजपा के दिग्गज नेता लाल कृष्णा आडवाणी के नेतृत्व में पूरी भाजपा पार्टी दिल्ली की सत्ता पर आसीन होने के लिए बेताब थीं। उस दौरान आने वाले लगभग हर मीडिया सर्वेक्षण में यह बात कही जा रही थी कि काग्रेंस शासित यूपीए का ग्राफ गिर रहा है और सत्ता के शीर्ष तक पहुँचने की डगर काफी कठिन है। यह बात अलग है कि उस समय कोई भी मीडिया हाउस यह खुलकर नहीं बोल रहा था कि भाजपा सत्ता में आयेगी पर हर रिपोर्ट का निष्कर्ष लगभग यही होता था कि भाजपा सत्ता में आ रही है। पर जब लोकसभा चुनाव 2009 के परिणाम आयें तो वह अप्रत्याशित थें। काग्रेंस शासित यूपीए दुगनी ताकत के साथ सत्ता में आया।

अब बात करतें है यूपी विधानसभा चुनाव 2012 की। लोकसभा चुनावों के लिहाज से अत्यन्त महत्वपूर्ण इस विधान सभा चुनाव में जो चुनावी सर्वेक्षण परिणाम आ रहें थें उनमें सपा को लीडिंग दल के रूप में तो दिखाया जा रहा था, पर साथ यह भी कहा जा रहा था कि यूपी विधानसभा चुनाव 2012 के परिणाम त्रिशुंक होगें किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा। पर जब परिणाम आये तो सारें मीडिया सर्वेक्षण धरें के धरे रह गयें ओर सपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आयी। ऐसे तमाम चुनाव परिणाम हैं जहाँ मीडिया सर्वेक्षण की हर रिपोर्ट झूठी साबित हुयी। ऐसे में बेहद अहम सवाल यह खडा होता है कि आखिर ऐसे चुनावी सर्वेक्षण होते क्यों है ?

वास्तव में ऐसे सर्वेक्षण मीडिया टीआरपी के खेल को बढाने और एक दल विशेष को अनुग्रहित करनें का फंडा है। जहाँ सर्वेक्षण रिर्पोट के माध्यम से उस राजनैतिक दल को यह दिखाया जाता है कि हम आपके साथ है साथ ही यह भी अहसास कराया जाता है कि सबसें ज्यादा दर्शक सर्वेक्षण रिपोर्ट को ही देख रहें हैं परिणाम स्वरूप उस राजनैतिक दल सें चैनल को आपार धनलाभ प्राप्त होता है।

लोकसभा चुनाव 2014 के लिहाज से चैनलो के लिए आपार धन वर्षा करने वाला राजनैतिक दल भाजपा ही है जो अपने पीएम इन वेटिंग नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में र्वचुअल दुनिया व टेक्नालोजी के प्रभाव पर यकीन करनें लगा है। लिहाजा वह हर मीडिया हाउस पर अपने नेता के मार्फत आपार धन वर्षा कर रहा है परिणाम स्वरूप हर मीडिया हाउस मोदी और भाजपा की बढ़त लोकसभा चुनाव 2014 में दिखा रहा है।

यूपी में नरेंन्द्र मोदी की पहली विजय शंखनाद रैली को जितना भाजपा और मोदी ने सफल नहीं बनाया उससे ज्यादा मीडिया घरानों ने कोशिश की। हर चैनल पर मोदी चालीसा का पाठ पूरी तल्लीनता के साथ किया गया।

मोदी को दिखाना मीडिया वालों के लिए इसलिए भी जरूरी है क्योंकि वर्चुवल दुनिया में मोदी एक ब्रांड नेम हैं जिसके साथ असंख्य संख्या में युवा जुडा हुआ है। पर वास्तविकता के धरातल पर यह संख्या कितनी होगी यह तो लोकसभा चुनाव 2014 ही बतायेगा। वैसे भी चुनाव अनिश्चिताओं का खेल है जहाँ हर पल हवा का रूख बदलता रहता है।

जहाँ तक बात नरेंद्र मोदी की है तो फिलहाल उनके लिए अभी सिर्फ इतना ही कहा जा सकता कि

अभी तो हैं इम्तिहान बाकी कि आप रहबर हैं या राहजन हैं,

जम्हूरियत का चिराग हैं या इसी सियासत के एक फन हैं।

अनुराग मिश्र

स्वतंत्र पत्रकार

लखनऊ

मो -9389990111

editor

About editor

सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
This entry was posted in यंग तेवर. Bookmark the permalink.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>