पीएम मोदी चाहते हैं कि किसानों को अडानी-अंबानी लूटे: डॉ. अरुण कुमार

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पटना। नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने जब संसद के चौखट पर माथा पटका था तब लगा था कि वह वाकई में लोगों की पीड़ा को महूसस कर रहे थे। लेकिन अब लगता है कि वह आम आदमी को पूरी तरह से नजर अंदाज कर रहे हैं। तेल बेचा गया, कोयला बेचा गया, प्राकृतिक संसाधन बेचे जा रहे हैं, रेल बेचा जा रहा है। मेरे जैसे लोग भी चकमे में थे। जब संसद में और संसद के बाहर उन्होंने कहा कि लोग भ्रम फैलाते हैं। रेल प्राइवेटाइज नहीं होगा। और जब अडानी का मालगाड़ी गुजरात से उत्तर प्रदेश में दौड़ता हुआ देखता हूं तो लगता है कि अडानी की सरकार है। जिस तरीके से स्टेशन बेचे जा रहे हैं, सुरक्षा और टीटी को भी कांटेक्ट पर दिया जा रहा है उस पर विचार करने पर लगता है कि इसके लिए मोदी से ज्यादा कांग्रेस पार्टी जिम्मेदार है। विपक्ष के नेता जिम्मेदार हैं, चाहे वो मुलायम सिंह यादव हो या फिर समाजवादी कहे जाने वाले लालू यादव हो। ये बातें भारतीय सबलोग पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार ने पटना में पत्रकारों को संबोधित करते हुये कही।

उन्होंने कहा कि जब मुलायम सिंह ने समाजवाद की परिभाषा बदल दी, तो आज जो स्थिति बनी है वह तो होना ही था। अब यह जो किसानों को लेकर तीन बिल लाया गया है उसे लेकर कहीं कोई हंगामा नहीं है। न संसद में हंगामा है न सड़क पर। जो कुछ है वह बस नुराकुश्ती है। इसलिए मैं सीधे किसानों और मजदूरों से अपील करता हूं।

सब लोग पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार ने कहा है कि निजीकरण की दिशा में देश को चला रहे दिल्ली के हुकमरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की ओर से किसानों पर अंतिम प्रहार किया गया है। किसानों के लिए यह काला कानून है। नड्डा साहेब किसान नहीं है। पीएम मोदी चाहते हैं कि किसानों का हिस्सा अंबानी और अडानी लूट कर ले जाये। कोर्ट में जाने का प्रावधान जानबूझ कर नहीं किया। उन्होंने कहा कि मोदी जी आप रेल बेचिये, तेल बेचिये लेकिन किसानों को मत मारिये। उन्होंने कहा कि सारे उद्योग धंधों पर काबिज होने के बाद अंबानी और अडानी की नजर किसानों पर है इसलिए किसानों को पूंजीपतियों के रहमो करम पर छोड़ा जा रहा है। यदि किसानों और फार्महाउसों के बीच किसी भी तरह का विवाद होता है तो इसका निपटारा डीएम के हवाले कर दिया गया है। जो पूंजीवादी सरकार को कुछ नहीं समझ रहे हैं वह भला डीएम को क्या समझेंगे ? पूंजीपतियों के साथ किसी भी तरह के विवाद के दौरान वह निश्चित तौर पर किसानों के साथ तो खड़े नहीं होंगे। बीजों का निजीकरण किया जा रहा है।

डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों के साथ जिस तरह की मनमानी कर रही है उसके लिए खासतौर से कमजोर विपक्ष जिम्मेदार हैं। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि इसके लिए खास करके कांग्रेस के साथ-साथ लोहिया और जेपी के चेले जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अफसोस है कि समय रहते उन लोगों की मनसा को व नहीं भाप सके थे। मोदी हुकूमत ट्रेन भेजती रही, सार्वजनिक उपक्रमों को बेचने में हाथ लगा दिया लोग खामोश रहे। अब इसने किसानों में हाथ लगा दिया। इसे किसान बर्दाश्त नहीं करेंगे। देश में किसानों और मजदूरों को एक साथ मिलकर के मोदी सरकार की मुखालफत करनी होगी। देश के नेता और पॉलीटिकल पार्टी कॉरपोरेट हाउस बनकर रह गए है। सभी नेता सिर्फ नौकरी कर रहे हैं। इनसे जन मुद्दों पर संघर्ष की अपेक्षा नहीं की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के समय हमलोग भी एनडीए का हिस्सा थे। एनडीए की बैठकों में अपनी बातों और अपने विरोध को खुलकर रखते थे। लेकिन अब किसी को बोलने की हिम्मत नहीं होती है। सभी राजनीतिक दलों के लोग बस नौकरी कर रहे हैं। राजनीतिक दलों का कॉरपोरिटकरण हो गया है। लोकतंत्र में यह जरूरी है कि सच को पूरी बेबाकी के साथ बोला जाये। आज लोग सच बोलने से डर रहे हैं।  आज जिस तरीके से रेलवे सहित तमाम सार्वजनिक उपक्रमों की निलामी हो रही है और उस पर लोग चुपी साध रहे हैं वह खतरनाक है। अब तो खेत-खलिहान निलाम हो रहे हैं।

बिहार में नीतीश हुकूमत की मुखालफत करते हुए उन्होंने खुले अल्फ़ाज़ में कहा कि यह हुकूमत चोरों और लुटेरों की है। लंबे समय से सरकारी योजनाओं को चबा खा रहे हैं। हर जगह हर चीज में लूट मची हुई है। यहां की बहू बेटियों की इज्जत भी खतरे में है। एक ओर सृर्जन घोटाला हो रहा है तो दूसरी ओर और बालिका होम जैसे कांड हो रहे हैं। हर कोई पैसा खा रहा है। हर कोई कमीशन खा रहा है।

डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि देश की मीडिया की बिक चुकी है। सच्चाई से मुंह मोड़ चुकी है। हम लोग जॉर्ज फर्नांडिस के फॉलोअर्स हैं। सच को सच कहने से बाज नहीं आएंगे। पूरी ताकत के साथ सच्चाई को बयान करेंगे, चाहे जिंदगी रहे या नहीं। आज किसानों को जिस तरह से अपनी गिरफ्त में लिया जा रहा है उसे देखते हुए देश में किसानों और मजदूरों के एक व्यापक आंदोलन की जरूरत है। किसान और मजदूर एक होकर के भारतीय जनता पार्टी का मुकाबला कर सकते है।

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार सुबह क्या बोलते हैं और शाम को क्या बोलते हैं जनता जानती है। इनकी अपनी जुबान नहीं है। यह शिक्षकों को पीटेंगे क्योंकि शिक्षकों की ओर से आवाज उठती है। किसान सब अंबानी हो जाएंगे। बिहार में एफसीआई था। नीतीश का अखबार पर राज है। कोई उनके खिलाफ कुछ नहीं छाप सकता है। उन्होंने किसानों को बिचौलियों के हवाले कर दिया। यह करामाती व्यकित्तव है। करामाती इनका अखबार है। इन चोरों और लुटेरों के खिलाफ बोलेंगे, लड़ेंगे। चाहे जेल ही क्यों न जाना पड़ा। इनके सारे अधिकारी करोड़पति हो गये, मंत्री अरपबति हो गये और ये खुद खरबपति हो गये।

 

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