सुरेश भट्ट जी को विनम्र श्रद्धांजलि…

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विनायक विजेता, वरिष्ठ पत्रकार।

अगल-बगल हट, आ रहे सुरेश भट्ट। संम्पूर्ण क्रांति और छात्र आंदोलन में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के बाद बिहार के दूसरे सबसे चर्चित और जुझारु नेता सुरेश भट्ट जब आंदोलन के दौरान सड़कों पर निकलते थे तो इसी तरह का नारा लगाया जाता था। इस नारे के बारे में आज से तीन वर्ष पूर्व राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद ने मुझे बताया था कि किस तरह सुरेश भट्ट जब सड़कों पर आंदोलन की अगुवाई करने निकलते तो उस वक्त के छात्रों में एक अपूर्व जोश भर जाता था। पर वहीं सुरेश भट्ट कई वर्षों तक गुमनामी की जिंदगी जीते हुए आज ही के दिन पिछले वर्ष स्वर्ग सिधार गए। लगभग चार वर्ष तक दिल्ली के एक ओल्ड एज होम में सुरेश भट्ट रहे पर उनके किसी समाजवादी चेलों ने उनकी सुध नहीं ली। मुझे भी अफसोस है कि मैं उनकी दशा पर लिखने के सिवा उनकी या उनके परिवार की कोई मदद नहीं कर पाया। सुरेश भट्ट ने जीते-जी अपने या अपने परिवार के लिए कुछ नहीं किया किया तो बस समाज के लिए। उन्हें न तो पद की चाहत थी न कुर्सी की। सुरेश भट्ट के कितने राजनीतिक चेले अभी सत्ता शीर्ष पर हैं पर किसी ने कभी भी उनकी सुध नहीं ली। सुरेश भट्ट की पत्नी ने सुरेश भट्ट जी को जेपी आंदोलन पेंशन देने के लिए कई राजनेताओं और अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया पर हर जगह उन्हें निराशा ही हाथ लगी। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ट नारायण सिंह ने तो यह कहकर उनके परिवार को और हताश और निराश कर दिया कि सुरेश भट्ट कौन हैं, मैं नहीं जानता।तो उनके कई समाजवादी चेलों का सवाल था किसुरेश भट्ट अभी जिन्दा हैं क्या।

मूल रुप से नवादा के निवासी सुरेश भट्ट कभी एक सिनेमा हॉल सहित लाखों की संपत्ति के मालिक थे पर जेपी आंदोलन के दौरान उन्होंने अपनी संपत्ति आंदोलन के नाम कर दी। सुरेश भट्ट की एक पुत्री असिमा भट्ट उर्फ क्रांति भट्ट मुंबई में रंगमंच से जुड़ी हैं, जो अपने पिता की यादों को सहेजकर रखने का पूरा प्रयास कर रहीं हैं। असीमा जी का प्रयास सार्थक हो इसकी कामना के साथ सुरेश भट्ट जी जैसे महान आत्मा की प्रथम पुण्य तिथि पर उन्हें मेरी विनम्र श्रद्धांजलि….

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

1 COMMENT

  1. AAJ (22july)2017 navbharat times me Asima Bhatt ji ka ek article publish hua hain, “maun kyu reh gaye budhh or ram “…. is article me aurat ki stithi or aurat ke swabhimaan ko swikaara gaya hain or purushvadi samaaj pr kataksh kiya gaya hain….

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