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Friday, November 27, 2020
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रेखा : शोख हसीना के विरह गीत

पहले शोख फिर सेक्स बम से अभिनय की बढ़त बनाने वाली रेखा की शोहरत एक संजीदा अभिनेत्री के सफ़र में बदल जाएगी यह भला...

इन गलियों में भी बसती है कला…

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उत्तमा दिक्षित यह गलियां जनजातियों की बसावट वाली है। गंदी और सामान्य जन सुविधाओं के अभाव से त्रस्त इन गलियों की कला अलग पहचान है।...

सारंगी की तान छेड़ते ये गुदड़िया बाबा

दिमाग पर थोडा जोर दें तो आपको बचपन के वे दिन याद आ जायेंगे जब गुणा बाबा या गुदरिया बाबा को देखते ही आप...

जो सुनायेगा दिखायेगा,वही बच पायेगा

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सुधीर राघव क्या जो बांचा जाए सिर्फ वही साहित्य है? क्या जो लिखे वही लेखक है? क्या जो बोले वही वक्ता है? क्या जो प्रस्तुत...

अदम गोंडवी की पांच गजलें

काजू भूनी प्लेट में, व्हिस्की गिलास में/ राम राज्य आया है विधायक निवास में, जैसे शेर लिखने वाले अदम गोंडवी वास्तव में दुष्यंत कुमार...

1857 के महासमर के प्रथम राष्ट्रगीत के रचनाकार – अजीमुल्लाह खान

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1857 के महासमर के महान राजनीतिक प्रतिनिधि और प्रथम राष्ट्रगीत के रचनाकार  उनका जीवन ब्रिटिश राज के विरुद्ध संघर्ष में बीता और उनका उद्देश्य...

यह तुम्हारे नयन हैं, या नयनाभिराम कोई भवन (कविता)

पचास पार की तुम और जाने कितने समंदर सोखे तुम्हारी यह आंखें जैसे बिजली का एक नंगा तार हैं कि तुम्हारी आंखें हैं इस उम्र में भी आग बन जाती...

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एन.एस.डी.) में बिहार के प्रथम छात्र प्यारे मोहन...

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- रविराज पटेल, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एन.एस.डी.) दिल्ली की स्थापना सन 1959 ई. में संस्कृति मंत्रालय ,भारत सरकार के स्वायत्त संस्थान संगीत नाटक अकादमी द्वारा...

उत्तर आधुनिक शिक्षा में मटुकवाद

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हरिशंकर राढ़ी (यह व्यंग्य समकालीन अभिव्यक्ति के जनवरी -मार्च 2010 अंक में प्रकाशित हुआ था ।) वाद किसी भी सभ्य एवं विकसित समाज की पहचान होता...

“लोग भूल गये ,हिन्दी चित्रपट में चित्रगुप्त का संगीत “

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--रविराज पटेल, तड़पाओगे तड़पा लो हम तड़प तड़प कर भी तुम्हारे गीत गायेंगे... (बरखा- १९५९ ) ऐसे गीतों को मर्म संगीत से चित्रगुप्त ही सजा...