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Sunday, May 9, 2021
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कैसे बनती और टूटती हैं मन्यताएं

सुधीर राघव मान्यताओं को लेकर लोगों में यह भ्रम है कि मान्यताएं सामूहिक ही होती हैं। मगर ऐसा नहीं होता। वह किसी भी व्यक्ति के...

इन गलियों में भी बसती है कला…

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उत्तमा दिक्षित यह गलियां जनजातियों की बसावट वाली है। गंदी और सामान्य जन सुविधाओं के अभाव से त्रस्त इन गलियों की कला अलग पहचान है।...

अब तो ‘राइट’ हो जाओ लेफ्ट

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नवीन पाण्डेय, नई दिल्ली यह तो अब सभी जान गए हैं कि बंगाल में बदलाव की बयार चली और ममता बनर्जी की आंधी में लेफ्ट...

रिसेशन के बाद आर्ट मार्केट में बूम

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उत्तमा दीक्षित आर्ट वर्ल्ड में एक बार फिर बूम है। रिसेशन के बाद आर्ट मार्केट ने उबरने में बेशक समय लिया, लेकिन सिचुएशन ज्यादा अच्छी...

बेनी की बेलगाम बयानबाज़ी के मायने और बहाने

जैसे हिंदी फ़िल्मों से अब कहानी गुम है, वैसे ही अब राजनीति से विचार गुम हैं। सामाजिक न्याय की राजनीति ने इस विचारहीन राजनीति...

सारंगी की तान छेड़ते ये गुदड़िया बाबा

दिमाग पर थोडा जोर दें तो आपको बचपन के वे दिन याद आ जायेंगे जब गुणा बाबा या गुदरिया बाबा को देखते ही आप...

का हो अखिलेश, कुछ बदली उत्तर प्रदेश !

प्रिय अखिलेश जी,  आप जानते ही हैं कि हमारे देश के लोग और खास कर उत्तर प्रदेश के लोग साक्षरता से ले कर रोजगार तक...

चल मां के दरबार में (कविता)

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राजेश वर्मा, चल रे साथी..हाथ जोड़ ले मां के दर्शन कर ले धुल जाएंगे पाप तेरे क्यूं मोह-माया में भटके चल रे साथी...ओ साथी...... जय जगदम्बे... जय मां जय जगदम्बे... जीवन...

हम पत्ता, तुम ओस

दयानंद पांडेय. वो हैं पास और याद आने लगे हैं मुहब्बत के होश अब ठिकाने लगे हैं । अपने विवाह की बत्तीसवीं सालगिरह पर आज 28 जून,...

बहुत परेशान करती हैं मान्यताएं

एक किस्सा सुना रहा हूं। एक गांव के किनारे की सड़क से पति-पत्नी लड़ते हुए गुजर गए। उन दोनों को लड़ते हुए गांव के...