लिटरेचर लव
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फेसबुक पर चालीस साला औरतें —-(कविता)
अंजू शर्मा, इन अलसाई आँखों ने रात भर जाग कर खरीदे हैं कुछ बंजारा सपने सालों से पोस्टपोन की गयी…
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बाइट्स प्लीज, (उपन्यास भाग-21)
44. महेश सिंह और विज्ञापन मैनेजर मंगल सिंह को लेकर पटना दफ्तर में यह अफवाह फैली हुई थी कि दोनों…
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ये प्यार तेरा मुझको पागल कर देगा(कविता)
अरविंन्द सिंह ‘मोनू’, हर लम्हा गुजरता है अरसा बन–बनकर हर दिन गुजरता है साल बन–बनकर इंतजार में जीना कितना मुश्किल…
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पापा ! क्यों तुमने ऐसा मेरे साथ किया…
विनायक विजेता, वरिष्ठ पत्रकार। परखनली से तुमने पापा, कभी मुझको जीवन दान दिया आत्मा मेरी पूछ रही, फिर क्यों ऐसा…
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बाइट, प्लीज (part 21)
44. महेश सिंह और विज्ञापन मैनेजर मंगल सिंह को लेकर पटना दफ्तर में यह अफवाह फैली हुई थी कि दोनों…
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निचली शक्तियों की अनदेखी साहित्य की सेहत के लिए ठीक नहीं : राजेंद्र यादव
दयानंद पांडेय, हंस के संपादक और कभी कहानीकार रहे राजेंद्र यादव हिंदी में एक दुर्लभ प्रजाति के जीव हैं। हद…
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भडका रहे हैं आग लब-ए-नग़्मगर से हम, ख़ामोश क्यों रहेंगे ज़माने के डर से हम — साहिर
“मेरे सरकश तराने सुन के दरिया ये समझती है कि शायद मेरे दिल को इश्क के नगमों से नफरत है”…
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कुछ मुलाकातें, कुछ बातें : सवाल रूपी मशाल जलाती बातें-मुलाकातें
डॉ. मुकेश मिश्रा, एक होनहार और विद्वान पत्रकार अपने पत्रकारिता काल में हर दिन कुछ न कुछ लिखता है। उस…
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महिलाओं का ‘राइट टू रिजेक्ट’
अशोक मिश्र रविवार को सुबह थोड़ी देर से उठा। उठते ही घरैतिन के सुलोचनी चेहरे के दर्शन नहीं हुए, तो…
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ज़ीस्त को आख़िरी साँसों में समझ पाये हम
सौरभ नेमा ‘नाकाम’ ख़्वाब को टूटती नींदों में समझ पाये हम, इश्क़ को आख़िरी लमहों में समझ पाये हम। ये…
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