ग्रामीण भारत की शानदार तस्वीर है ‘कभी तो मिल के सब बोलो’

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राजू बोहरा, नई दिल्ली

आज के इस आधुनिक दौर में भले ही प्राइवेट इंटरटेनमेंट चैनल्स की संख्या लगातार बढ़ रही हो, लेकिन सच यही है कि आज भी लोगों के लिये मनोरंजन का सबसे बड़ा एवं सशक्त माध्यम दूरदर्शन ही है जो अब भी महानगरों से लेकर गांव-गांव और छोटे-छोटे कस्बों तक में अपनी पहुंच सबसे अधिक रखता है। गौरतलब तथ्य यह भी है कि आज के इस आधुनिक युग में दूरदर्शन ही एक मात्र ऐसा चैनल है जो दर्शकों को हर विषय पर ऐसे साफ-सुथरे, मनोरंजक और सामाजिक धारावाहिक दिखा रहा है जो लोगों का मनोरंजन करने के साथ-साथ उन्हें शिक्षित भी करते हैं। डॉ.चन्द्रप्रकाश द्विवेदी के उपनिषद गंगा और आमिर खान के सत्यमेव जयते के बाद दूरदर्शन ग्रामीण पृष्ठभूमि पर आधारित एक अैर नया दिलचस्प धारावाहिक ‘कभी तो मिल के सब बोलो’ प्राइम टाइम में लेकर आया है जो तेजी से बदलते भारतीय ग्रामीण जनमानस की शानदार तस्वीर पेश करता है। कभी तो मिल के सब बोलो का प्रसारण डीडी नेशनल पर राष्टीय प्रसारण में हर गुरूवार और शुक्रवार को रात 8.30 बजे किया जा रहा है।

ग्रामीण पंचायती राज व्यवस्था, भ्रष्टाचार और ग्रामीण राजनीति जैसे मुद्दों को उठाने वाले इस धारावाहिक का निर्माण श्री सत्य साई फिल्म्स के बैनर तले अभिनेता से निर्माता बने करण आनंद कर रहे हैं और इसका निर्देशन विजय के सैनी कर रहे हैं। जबकि इसके लेखक शिवेन्द्र सिंह और विभांशु वैभव है। धारावाहिक का शीर्षक गीत मशहूर गीतकार निदा फाजली ने लिखा है जिसे अमर हल्दीपुर के संगीत निर्देशक में स्वर्गीय गजल सम्राट जगजीत सिंह ने गाया है। धारावाहिक में मुख्य किरदारों को राजेश विवेक, साधना सिंह, सुधीर दलवीं, ज्ञान प्रकाश, अनीता कुलकर्णी, अशोक बांठिया, पंकज झा, गीतांजलि मिश्रा और करन आनंद जैसे चर्चित कलाकार निभा रहे हैं।

अपने इस धारावाहिक ‘कभी तो मिल के सब बोलो’ को लेकर निर्माता व अभिनेता करण आनंद बेहद उत्साहित हैं। वह कहते कि आज हमारे गांव खत्म होते जा रहे हैं, वहां के मूल्य खत्म होते जा रहे हैं। आधुनिकता के नाम पर गांव का कल्चर भी फूहड़ता का पर्याय बन गया है। लोग पढ-लिख कर गांव छोड़कर शहर में बस रहे हैं। हमारी सरकार ग्रामीण विकास के लिये बहुत काम कर रही है किन्तु गांव वालों को उसका भरपूर लाभ नहीं मिल रहा है क्योंकि इसमें ग्रामीण राजनीतिज्ञ किस तरह हावी है और कुछ एक स्वार्थी लोग सिर्फ अपना फायदा कर रहे हैं। हमने इसमें बहुत-सी ग्रामीण समस्याओं, सुविधाओं और उनके समाधानों को उठाया है। ‘कभी तो मिल के सब बोलो’ की कहानी उत्तरप्रदेश इलाहाबाद के शहर व एक गांव के इर्द-गिर्द बुनी गई है इसलिये इसकी शूटिंग इलाहाबाद में भी की जा रही है। कुल मिलाकर यह धारावाहिक बेहद दिलचस्प विषय को उजागर करता है।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

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