बक्सर में युवाओं को फिल्म की बारीकियों से रू-ब-रू कराया संतोष भट्ट ने

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छात्रों से रू-ब-रू होते संतोष भठ्ठ
छात्रों से रू-ब-रू होते संतोष भठ्ठ

तेवरआनलाइन, बक्सर

बिहार में फिल्म निर्माण प्रक्रिया के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए संतोष भट्ट फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट के निदेशक संतोष भट्ट एक सघन मुहिम छेड़े हुये हैं। इसी मुहिम के तहत उन्होंने बक्सर में आर्यभट्ट कंप्यूटर इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित कार्यक्रम फिल्म और टेलीविजन में कैरियर कैसे बनाये में यहां के युवाओं को फिल्म की बारीकियों से रु-ब-रू कराया। इस कार्यक्रम में युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। परंपरागत पढ़ाई से इतर फिल्म निर्माण के विभिन्न पहलुओं को समझने-समझाने के दौरान संतोष भट्ट पर लगातार प्रश्नों की बौछार होती रही और बड़े ही रोचक तरीके से वे इन युवाओं की जिज्ञासाओं को शांत करते रहे।

संतोष भट्ट बिहार में फिल्म निर्माण के क्षेत्र में एक लहर लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनकी यही प्रतिबद्धता उन्हें मुंबई से यहां खींच लाई है। पटना में संतोष भट्ट फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट की नींव रखने के बाद अब संतोष भट्ट बिहार के छोटे बड़े शहरों की तरफ रुख कर रहे हैं। संतोष भट्ट का मानना है कि छोटे-छोटे शहरों में लोग फिल्म और धारावाहिक देखते तो हैं लेकिन इस क्षेत्र में अपना कैरियर बनाने का ख्याल उनके दिमाग में नहीं आता है। यदि आता भी है तो उन्हें फिल्म की विधिवत पढ़ाई के लिए महानगरों पर निर्भर होना पड़ता है। ऐसे में यह जरूरी है कि यहां के युवाओं को जमीनी स्तर पर फिल्म के हर पहलू से रू ब-रू कराया जाये। यही वजह है कि वह बिहार के छोटे-बड़े शहरों में युवाओं को फिल्म निर्माण के प्रति जागरूक करने में लगे हुये हैं। मजे की बात है कि संतोष भट्ट के कार्यक्रमों में युवा बड़ी संख्या में शिरकत कर रहे हैं। न सिर्फ शिरकत कर रहे हैं सवालों के माध्यम से इसमें गहरी रुचि भी दिखा रहे हैं। बक्सर में आर्यभट्ट कंप्यूटर इंस्टीट्यूट में आयोजित कार्यक्रम में युवाओं की दिलचस्पी देखने लायक थी।

बिहार में फिल्म निर्माण को कभी भी गंभीरता से नहीं लिया गया है। यही वजह है कि यहां को लोग अपने बच्चों को फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भेजने से हिचकिचाते हैं। एक मुहिम के तहत संतोष भट्ट की कोशिश इस हिचकिचाहट को तोड़ने की भी है। संतोष भट्ट युवाओं के साथ-साथ उनके माता-पिता को भी यह समझाने की अनवरत कोशिश कर रहे हैं कि फिल्म निर्माण के क्षेत्र में व्यापक अवसर है। लेकिन इस क्षेत्र में कुछ कर गुजरने के लिए यह जरूरी है कि फिल्म निर्माण के तमाम पहलुओं की विधिवित जानकारी युवाओं को उपलब्ध कराई जाये।

बहरहाल बक्सर में आयोजित इस कार्यक्रम का युवाओं पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला है। बड़ी संख्या में युवा इस क्षेत्र में आने के लिए कमर कस रहे हैं। और जिस तरह से युवा फिल्म निर्माण के क्षेत्र में दिलचस्पी ले रहे हैं उससे तो यही लग रहा है कि संतोष भट्ट की मुहिम अब रंग दिखाने लगी है। यदि यह मुहिम इसी तरह जारी रही तो वह दिन दूर नहीं जब बिहार में ही एक मजबूत फिल्म उद्योग का आधार तैयार हो जाएगा।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

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